दिल्ली में 1 जुलाई से पुरानी गाड़ियों पर बैन: CNG वालों को मिलेगी छूट, पर कितनी राहत?
दिल्ली सरकार ने आखिरकार वो कड़वी गोली पी ही ली जिसका इंतज़ार सबको था। अब 1 जुलाई 2024 से राजधानी में 10 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल और 15 साल से ऊपर की डीजल गाड़ियों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। मतलब साफ है – ये वाहन न सिर्फ चलने से बैन होंगे, बल्कि इन्हें जब्त करके सीधे कबाड़े में तब्दील कर दिया जाएगा। लेकिन इसमें एक राहत वाली बात? हां, CNG वाली गाड़ियों को इससे छूट मिल गई है। अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला वाकई दिल्ली की जहरीली हवा को साफ कर पाएगा? चलिए समझते हैं।
ये फैसला आखिर क्यों?
सच कहूं तो दिल्ली की हवा में सांस लेना तो पहले ही मुश्किल हो चुका था। और इसमें सबसे बड़ा हाथ इन्हीं पुरानी गाड़ियों का है जो धुंआ उगल-उगलकर हमारे फेफड़ों में जा रहा है। NGT और सुप्रीम कोर्ट तो सालों से इस पर रोक लगाने की बात कर रहे थे। 2018 में GRAP लागू हुआ था, पर वो तो बस एक शुरुआत थी। असल मसला ये है कि CNG वाहनों को ‘इको-फ्रेंडली’ माना जाता है – पेट्रोल-डीजल के मुकाबले ये 80% कम प्रदूषण फैलाते हैं। शायद इसीलिए सरकार ने इन्हें बचा लिया। समझदारी की बात है, है न?
नए नियम की खास बातें: आपकी गाड़ी पर क्या असर पड़ेगा?
तो स्थिति ये है – अगर आपकी पेट्रोल कार 2014 से पुरानी है या डीजल वाली 2009 से, तो बस… गए! जुलाई से दिल्ली की सड़कों पर निकले तो भारी जुर्माना + गाड़ी सीधे कबाड़ाखाने में। लेकिन अगर आप CNG, इलेक्ट्रिक या सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो फिक्र नहीं। सरकार ने पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के लिए कुछ स्कीम्स भी घोषित की हैं – शायद नई गाड़ी खरीदने में मदद मिल जाए। पर सच पूछो तो ये कितना कारगर होगा, ये तो वक्त ही बताएगा।
किसको पसंद आया, किसको नहीं?
पर्यावरणविद तो मानो झूम ही रहे हैं! उनका कहना है कि ये कदम सही दिशा में है। वहीं दूसरी तरफ, आम लोगों की आवाज़ सुनिए – “भई, हर कोई नई गाड़ी थोड़े ही खरीद सकता है?” सरकार का जवाब? वो कह रहे हैं कि गरीब परिवारों को इलेक्ट्रिक/CNG वाहनों के लिए सब्सिडी देंगे। अच्छी बात है, पर देखना ये है कि ये सिर्फ वादा रह जाता है या हकीकत में बदलता है।
आगे क्या? क्या ये ट्रेंड पूरे देश में फैलेगा?
मेरी नज़र में तो दिल्ली ये टेस्ट केस बन गई है। अगर यहां ये पॉलिसी कामयाब रही, तो देखते-देखते बाकी राज्य भी इसी राह पर चल पड़ेंगे। CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड तो बढ़नी ही है – ये तय है। पर सरकार को ये नहीं भूलना चाहिए कि मध्यम वर्ग पर ये बोझ न बन जाए। थोड़ी और राहत, कुछ और सब्सिडी… शायद तभी ये योजना वाकई काम कर पाएगी।
आखिर में बस इतना – ये फैसला सही दिशा में है, पर इसे लागू करने का तरीका थोड़ा नरम होना चाहिए। वरना हालात वैसे ही हो जाएंगे जैसे हमारे दादाजी कहा करते थे – “दवा से ज्यादा बीमारी का डोज खतरनाक होता है!”
Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com
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