जिला जज का धमाकेदार फैसला: पूर्णमासी राम की मुश्किलें बढ़ीं, निचली अदालत का आदेश उलट दिया!
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। बगहा के माले नेता और पूर्व मंत्री पूर्णमासी राम को 23 साल पुराने एक केस में बड़ा झटका लगा है। चंपारण की जिला अदालत ने क्या किया? निचली अदालत के फैसले को पलट दिया! और साथ ही, मामले में 30 दिनों के अंदर नई सुनवाई का आदेश दे डाला। अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला सिर्फ पूर्णमासी राम के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगा?
पूरा माजरा क्या है? 2001 का वह विवाद जो आज तक था ठंडा
ये कहानी तो 2001 की है जब पूर्णमासी राम पर बगहा के नेता दयानंद द्विवेदी की पिटाई का आरोप लगा था। उस वक्त निचली अदालत ने उन्हें राहत दे दी थी। लेकिन अब? जिला जज ने उस फैसले को ही रद्द कर दिया है। असल में, ये केस सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रंजिश की कहानी भी है। दोनों नेताओं के बीच की ये प्रतिद्वंद्विता तो सालों पुरानी है। और अब ये फैसला उसी आग में घी डालने जैसा है।
जिला अदालत ने क्यों मचाया बवाल? फैसले की खास बातें
जिला जज का ये फैसला किसी बम से कम नहीं! एक तरफ तो उन्होंने निचली अदालत के फैसले को खारिज किया, वहीं दूसरी तरफ मामले को फिर से खोलने का आदेश दे डाला। और वो भी सिर्फ 30 दिनों के अंदर! अब पूर्णमासी राम के लिए स्थिति कितनी गंभीर हो गई है? सीधा जवाब – बहुत। क्योंकि अब उन्हें न सिर्फ नए सिरे से केस का सामना करना पड़ेगा, बल्कि राजनीतिक रूप से भी उनकी छवि पर दाग लग सकता है।
किसने क्या कहा? सियासी गलियारों में मची खलबली
इस फैसले के बाद तो सभी पक्षों की प्रतिक्रियाएं आनी ही थीं। पूर्णमासी राम के वकील का कहना है कि वे हाई कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, दयानंद द्विवेदी के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो ये मामला माले दल के अंदर भी नए तनाव पैदा कर सकता है। क्योंकि पूर्णमासी राम तो पार्टी के बड़े चेहरों में से एक हैं।
आगे क्या? अगले 30 दिनों में क्या-क्या हो सकता है?
अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अगर पूर्णमासी राम के खिलाफ आरोप साबित हो गए तो? फिर तो न सिर्फ उनका राजनीतिक करियर खतरे में पड़ सकता है, बल्कि बिहार की सियासत का पूरा समीकरण ही बदल सकता है। एक तरफ तो ये केस है, वहीं दूसरी तरफ माले दल के अंदर की राजनीति। सच कहूं तो अगले एक महीने में बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।
जिला जज के इस फैसले ने पूर्णमासी राम को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मुश्किल में डाल दिया है। अब देखना ये है कि ये केस आगे किस दिशा में जाता है। क्योंकि इसका असर सिर्फ एक नेता तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है। और हां, अगले 30 दिन तो बिल्कुल ध्यान से देखने वाले होंगे!
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सोशल मीडिया पर तूफान मचा रहा है ये केस, और अब जिला जज ने जो फैसला सुनाया है, उसने तो पूरे मामले को ही नया मोड़ दे दिया है। तो चलिए, बिना समय गंवाए समझते हैं कि आखिर हुआ क्या है…
1. निचली अदालत का फैसला पलटने की क्या वजह रही?
देखिए, जिला जज ने जो किया, वो कोई आम बात नहीं है। उन्हें लगा कि lower court ने सबूतों को ठीक से नहीं समझा – जैसे कोई पहेली का सिर्फ आधा हिस्सा हल किया हो। और सच कहूं तो, case के कुछ legal points तो बिल्कुल ही miss हो गए थे। ऐसे में फैसला पलटना तो लाजिमी था, है न?
2. पूर्णमासी राम के लिए अब क्या मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं?
अरे भई, मुश्किलें तो बढ़ ही गई हैं! केस फिर से खुल गया है – यानी नए सिरे से सारी प्रक्रिया। नए charges, bail का खतरा… समझ लीजिए जैसे किसी ने बस से उतारकर फिर से सफर शुरू करवा दिया हो। और ये सफर बिल्कुल आसान नहीं होने वाला।
3. क्या इस फैसले के खिलाफ और ऊपर जाया जा सकता है?
बिल्कुल! ये तो भारतीय न्याय प्रणाली की खूबसूरती है। पूर्णमासी राम या उनकी legal team हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। पर सवाल यह है कि क्या higher court इस order को बदलेगी? वो तो वक्त ही बताएगा।
4. अब आगे क्या? केस की अगली कड़ी क्या होगी?
तो अब सीन अगले एपिसोड में शिफ्ट होगा – नई hearing, नए सबूत, नए arguments… जैसे कोई धारावाहिक का नया सीजन शुरू हो रहा हो। Legal teams फिर से अपनी पूरी ताकत झोंक देंगी। और हम? हमारा काम है बैठकर पॉपकॉर्न खाते हुए देखना कि आखिरकार न्याय किसके हक में जाता है!
एक बात और – ये सब जानकर क्या आपको नहीं लगता कि हमारी न्याय प्रणाली वाकई में बहुत दिलचस्प है? सोचिएगा जरूर…
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com