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“डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ ने अमेरिका को ही घायल किया! भारत के लिए बड़ा आर्थिक मौका?”

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ ने अमेरिका को ही घायल किया? भारत के लिए बड़ा मौका!

तो 1 अगस्त 2023 को अमेरिका की टैरिफ समयसीमा खत्म हो गई, और अब 7 अगस्त से नए नियम लागू होंगे। सच कहूं तो यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है – यह वैश्विक व्यापार का पूरा गेम बदल सकता है। हैरानी की बात ये कि ट्रंप प्रशासन ने अभी तक सिर्फ 33 देशों के साथ डील की है, जबकि 120 से ज़्यादा देश (हमारा भारत भी इसमें शामिल) अभी भी इस ट्रेड वॉर के चपेट में आने से बचे हुए हैं। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है? क्योंकि एक्सपर्ट्स तो यही कह रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, हमारे लिए ये एक बिल्कुल गोल्डन चांस हो सकता है।

ट्रंप की टैरिफ नीति: क्या ये बैकफायर कर रही है?

देखिए, ट्रंप तो 2018 से ही अपनी “America First” वाली पॉलिसी पर अड़े हुए हैं। शुरू-शुरू में तो लगा था कि ये अमेरिकी इंडस्ट्री को प्रोटेक्ट करने का बढ़िया तरीका है। लेकिन अब? अब तो असल नुकसान खुद अमेरिका को ही होता दिख रहा है। हमारे भारत-अमेरिका ट्रेड रिलेशन्स पर भी इसका बुरा असर पड़ा है – याद है न वो मामला जब अमेरिका ने हमारे स्टील और एल्युमिनियम पर एक्स्ट्रा टैक्स लगा दिया था? हमने भी तुरंत जवाब दिया था – 28 अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर अपने टैरिफ बढ़ाकर। एकदम tit-for-tat वाला गेम!

और चीन के साथ तो ट्रंप का ट्रेड वॉर तो जैसे पूरी दुनिया देख रही है। लेकिन अब ये पॉलिसी उल्टी पड़ती दिख रही है। सप्लाई चेन डिसरप्शन की वजह से अमेरिकी कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा है, ये तो वो खुद मान रहे हैं।

नए टैरिफ: भारत के लिए क्यों है ये बड़ा मौका?

7 अगस्त से जो नए टैरिफ लागू होने वाले हैं, उससे 120 से ज़्यादा देश प्रभावित होंगे। और हमारी सरकार? वो तो अमेरिका के साथ नई डील की तैयारी में जुट गई है। हालांकि अभी तक कुछ फाइनल नहीं हुआ है। लेकिन यहां सबसे मजेदार बात ये है कि इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा परेशान तो अमेरिकी इंडस्ट्री ही हो रही है! क्यों? क्योंकि टैरिफ की वजह से रॉ मटीरियल की कीमतें आसमान छू रही हैं, और प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

अमेरिकन ट्रेड फेडरेशन तो साफ-साफ कह चुका है – “ये पॉलिसी हमारे अपने बिजनेस और कंज्यूमर्स को नुकसान पहुंचा रही है।” और हमारे भारतीय उद्योगपति? वो तो मानो इस मौके का इंतज़ार ही कर रहे थे! चीन के प्रोडक्ट्स की जगह अब हमारे एक्सपोर्टर्स अमेरिकन मार्केट में अपना दबदबा बना सकते हैं।

आगे क्या? भविष्य की संभावनाएं

एक्सपर्ट्स की मानें तो ट्रंप की ये स्ट्रैटजी अमेरिका को ग्लोबल ट्रेड में अलग-थलग कर सकती है। और हमारा भारत? हमारे लिए तो ये यूरोप और दूसरे मार्केट्स में अपनी पकड़ मजबूत करने का सही समय है। ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़े बदलाव आने वाले हैं – कंपनियां अमेरिका पर निर्भरता कम करके भारत, वियतनाम जैसे देशों की तरफ रुख कर सकती हैं।

राजनीतिक नजरिए से देखें तो आने वाले अमेरिकी चुनावों में ये टैरिफ इश्यू एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। अमेरिकी वोटर्स पर इसके इकोनॉमिक इम्पैक्ट को लेकर बहस तेज होगी ही।

तो निष्कर्ष ये कि ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी अमेरिका के लिए तो मुसीबत बनती जा रही है, लेकिन हम भारतीयों के लिए? ये तो जैसे किसी ने सुनहरा मौका थमा दिया हो! ग्लोबल ट्रेड के इस नए दौर में भारत की पोजीशन और मजबूत होने वाली है। क्या आपको नहीं लगता?

यह भी पढ़ें:

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ और भारत का गेम-चेंजर मौका – आपके सवाल, हमारे जवाब

1. क्या सच में ट्रंप की टैरिफ़ policy ने अमेरिका को पीछे धकेल दिया?

सुनने में तो ये अमेरिका के फायदे की बात लगती थी, लेकिन असल में हुआ क्या? देखिए, जब imported goods पर टैरिफ़ लगा तो अमेरिकी companies के लिए raw material महंगा हो गया। और भईया, production cost बढ़ी तो आखिरकार ये बोझ consumer पर ही पड़ा। सीधा सा मामला – अमेरिकी घरों की grocery bills बढ़ गईं, और economy को झटका लगा। क्या ये ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ वाला सपना था? शायद नहीं।

2. भारत के लिए ये संकट या सुनहरा मौका?

अब यहां दिलचस्प बात शुरू होती है। जब अमेरिका में manufacturing महंगी हुई, तो कंपनियों ने क्या किया? बिल्कुल – उन्होंने अपना बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर दिया। और भारत? हमारे पास तो पहले से ही दो ताकतें हैं – सस्ती लेबर और skilled workforce। ऐसे में अगर हम थोड़ी सी भी smartness दिखाएं, तो ये हमारे exports और रोजगार के लिए game-changer साबित हो सकता है। सोचिए, क्या हम इस मौके को गंवा सकते हैं?

3. क्या भारत भी ट्रंप के टैरिफ़ की मार से बच पाया?

ईमानदारी से कहूं तो – नहीं, बिल्कुल नहीं। खासकर steel और aluminum के कारोबारियों को तो काफी झटका लगा। लेकिन यहां हमारी सरकार ने जो किया वो काबिले-तारीफ है। हमने अपने exports को diversify किया, नए markets तलाशे। नतीजा? Overall impact को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया। थोड़ा तो लगेगा ही ना, लेकिन हमने इसे manage कैसे किया – ये सीखने की बात है।

4. भारतीय businesses के लिए बेस्ट strategy क्या हो सकती है?

अब ये सबसे जरूरी सवाल है। मेरा मानना है कि हमें US पर depend रहने की बजाय तीन चीजें करनी चाहिए:
1. EU और African markets पर ज्यादा focus देना
2. अपने domestic market को strengthen करना (क्योंकि अगर घर में मजबूत होगे तो बाहर भी टिक पाएंगे)
3. सबसे बड़ी बात – quality और pricing में balance बनाना

याद रखिए, हर crisis में opportunity छुपी होती है। बस नजर चाहिए उसे पहचानने की। और हां, थोड़ा risk लेने का हौसला भी!

Source: Aaj Tak – Home | Secondary News Source: Pulsivic.com

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