EC का जवाब: राहुल गांधी से शपथ पत्र मांगने की असली वजह क्या है?
अब ये मामला दिलचस्प हो गया है! कर्नाटक चुनाव आयोग (EC) ने राहुल गांधी को एक affidavit जमा करने को कहा है – वो भी voter list में धांधली के उनके खुद के आरोपों पर। सच कहूं तो, ये मांग तब आई है जब राहुल ने खुलेआम दावा किया था कि उनके पास voter list में हेराफेरी के “पक्के सबूत” हैं। लेकिन EC ने इन आरोपों को हवा-हवाई बताया है। और अब? अब तो ये मामला पूरी राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
पूरा माजरा क्या है?
याद है ना, कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक जनसभा में क्या कहा था? उन्होंने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि voter list में बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। उनका दावा था कि BJP सरकार ने लाखों voters के नाम या तो गायब कर दिए हैं, या फर्जी नाम डाल दिए हैं। भई साहब, ये तो गंभीर बात है! अगर सच है तो चुनाव की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा होता है।
लेकिन EC ने भी कमाल कर दिया। उन्होंने अपनी तरफ से जांच की और क्या पाया? कि राहुल के दावों में कोई दम नहीं है। और फिर? फिर तो EC ने सीधे कह दिया – “सर, आपने दावा किया है, तो सबूत भी दीजिए।” बिल्कुल वैसे ही जैसे हम स्कूल में टीचर से कहते थे – “मैम, होमवर्क कुत्ते ने खा लिया” तो वो कहती थीं – “प्रूफ लाओ!”
अब ताजा क्या है?
EC ने तो जैसे राहुल गांधी को चेकमेट कर दिया है। उन्हें साफ 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया – affidavit के साथ सबूत पेश करने को कहा है। और सच कहूं तो, ये सही भी है। क्योंकि बिना सबूत के ऐसे गंभीर आरोप लगाने से चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगते हैं।
राहुल जी ने तो कह दिया है कि वो सबूत देंगे… लेकिन अभी तक? अभी तक तो कुछ भी सामने नहीं आया। देखना ये है कि अब वो क्या करते हैं – कागजात पेश करते हैं या फिर…?
राजनीति गरमाई
इस पूरे मामले ने दिल्ली से बेंगलुरु तक राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस वाले एक तरफ तो EC के फैसले का समर्थन कर रहे हैं (क्योंकि करें भी क्या?), लेकिन साथ ही voter list में गड़बड़ी के दावे पर अड़े हुए हैं। वहीं BJP? भई, BJP तो मानो मौके की ताक में ही बैठी थी! उन्होंने तुरंत राहुल पर “झूठ फैलाने” का आरोप लगा दिया। उनका कहना है कि ये सब चुनाव से पहले का डर दिखाने वाला नाटक है।
कुछ जानकारों का तो ये भी कहना है कि ये मामला voter list की जांच की पेचीदगियों को उजागर करता है। सच तो ये है कि ऐसे गंभीर आरोप लगाने से पहले ठोस सबूत होने चाहिए। वरना? वरना तो कोई भी किसी पर कुछ भी आरोप लगाने लगेगा!
अब आगे क्या?
तो अब बड़ा सवाल ये है कि अगले 48 घंटों में क्या होगा? अगर राहुल गांधी सबूत नहीं दे पाए तो? तो EC के पास कई विकल्प हैं – जुर्माना लगाने से लेकर और भी सख्त कार्रवाई तक।
मेरी निजी राय? ये मामला कर्नाटक चुनावों को लेकर बहस को और गरमा देगा। और EC की ये कार्रवाई भविष्य में नेताओं को बिना सबूत के आरोप लगाने से रोकने का एक बेहतरीन उदाहरण बन सकती है।
आखिर में, ये केवल कर्नाटक का मामला नहीं रहा। पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए ये एक टेस्ट केस बन गया है। अब देखना ये है कि अगले कुछ दिनों में और क्या नया घटित होता है। क्योंकि राजनीति में, जैसा कि हम सभी जानते हैं, कुछ भी हो सकता है!
वोटर लिस्ट धांधली और EC का जवाब – क्या सच में कुछ गड़बड़ है?
सुनकर हैरानी होगी, लेकिन ये मामला सिर्फ राजनीति से आगे बढ़ चुका है। EC (Election Commission) और राहुल गांधी के बीच ये टेंशन… असल में क्या चल रहा है? चलिए समझते हैं, बिना किसी पक्षपात के।
1. EC ने राहुल गांधी से शपथ पत्र मांगा – पर क्यों?
देखिए, बात सीधी है। जब कोई बड़ा आरोप लगाता है, तो उसे साबित भी तो करना चाहिए न? EC ने बस यही किया। राहुल जी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का दावा किया, तो EC ने कहा – “ठीक है, लेकिन सबूत दीजिए।” एक तरह से कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
2. वोटर लिस्ट धांधली – क्या है पूरा माजरा?
अब ये बात दिलचस्प है। आरोप ये है कि कुछ राज्यों में…
– लाखों असली वोटर्स के नाम गायब!
– और कहीं फर्जी नाम जुड़ गए?
अगर ये सच हुआ तो… है न चिंता की बात? चुनाव का पूरा नतीजा ही पलट सकता है। लेकिन सच्चाई क्या है? वही तो जांच का विषय है।
3. Affidavit देना – काम्प्लीकेटेड है या आसान?
ईमानदारी से कहूं तो… न तो बहुत मुश्किल, न बहुत आसान। शपथ पत्र देने का प्रोसेस कुछ ऐसा है:
1. अपने दावे को कागज पर उतारो
2. नोटरी या अधिकारी के सामने साइन करो
3. फाइल कर दो!
पर सच बताऊं? असली मुश्किल तो सबूत जुटाने में होती है। वो भी इतने बड़े आरोप के लिए!
4. EC का रोल – सिर्फ नाम की संस्था या असली दांवपेंच?
अरे भई, EC कोई खिलौना तो है नहीं! उसका काम है चुनाव को साफ-सुथरा रखना। कोई शिकायत आई? जांचो। सबूत मांगो। निष्पक्ष रहो।
पर सवाल ये है कि क्या EC वाकई इतनी ‘इंडिपेंडेंट’ है जितनी दिखती है? ये तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो वो अपना काम कर रही है – procedure फॉलो कर रही है।
तो ये थी पूरी कहानी… थोड़ी सी राजनीति, थोड़ा सा कानून। पर सच क्या है? वो तो जांच के बाद ही पता चलेगा। आपको क्या लगता है – क्या सच में कुछ fishy है या सब सही है?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com