F-104 बनाम MiG-21: जब आसमान में दो जानलेवा मशीनों की भिड़ंत ने इतिहास बदल दिया!
11 सितंबर 1965… एक ऐसा दिन जिसे भारतीय वायुसेना कभी नहीं भूल सकती। सोचिए, पंजाब की नीली छत पर हमारे MiG-21 और पाकिस्तान के F-104 Starfighter आमने-सामने! और फिर क्या हुआ? एक ऐसी मुठभेड़ जिसने युद्ध के नियम ही बदल दिए। 1965 का वो युद्ध हो या आज का डॉगफाइट, कहानी तो वही है – जीतता वही जो स्मार्ट हो। है न?
दो किलर मशीनें, दो सुपरपावर्स की जंग
1960s… शीत युद्ध का वो दौर जब अमेरिका और USSR अपने-अपने ‘पालतू’ देशों को हथियारों से लैस कर रहे थे। हमें मिले USSR के MiG-21 – छोटे, फुर्तीले, पर जानलेवा। एक तरह से flying sword जैसे। वहीं पाकिस्तान को अमेरिका ने दिए F-104 Starfighter – जिन्हें देखकर लगता था जैसे कोई मिसाइल पंख लगाकर उड़ रही हो। सच कहूं तो दोनों ही अपने-अपने मैदान के बादशाह थे। पर असली टेस्ट तो युद्ध के मैदान में ही होना था, है न?
वो ऐतिहासिक 11 सितंबर: जब तूफान आया
कल्पना कीजिए उस दिन का सीन – पाकिस्तानी F-104 चुपके से भारतीय सीमा में घुसा, और हमारे रडार ने पकड़ लिया। तुरंत हमारा MiG-21 उसके पीछे पड़ गया। अब यहां से शुरू हुआ असली ड्रामा! F-104 अपनी रफ्तार से भागने की कोशिश कर रहा था, पर हमारा MiG-21 उसके पीछे सांप की तरह लिपटा रहा। और फिर… बाम! हमारे पायलट ने जो निशाना लगाया, उसने F-104 को छलनी कर दिया। बेचारा विमान तो बस अपने बेस तक पहुंचने की जद्दोजहद में लग गया। क्या सीन रहा होगा वो!
दुनिया की आंखें फटी की फटी रह गईं
इसके बाद तो जैसे हंगामा मच गया। हमारे वायुसेना वालों का सीना चौड़ा हो गया – “देखा हमारे पायलट्स का कमाल!” वहीं पाकिस्तानी सेना शुरू में तो मुंह छिपाती रही, पर बाद में मानना पड़ा कि F-104 की कमियां सामने आ गई थीं। एक्सपर्ट्स की राय? साफ थी – MiG-21 का बेहतर डिजाइन और हमारे पायलट्स का ट्रेनिंग लेवल ही जीत का राज था। सच कहूं तो ये तकनीक से ज्यादा टैलेंट की जीत थी।
इतिहास ने करवट बदल ली
इस एक झड़प ने दोनों देशों की एयर स्ट्रैटेजी ही बदल दी। हमारे लिए MiG-21 ‘गर्व का प्रतीक’ बन गया – आने वाले सालों में इसने कमाल के करिश्मे दिखाए। वहीं पाकिस्तान को एहसास हुआ कि F-104 उतने ‘ऑल-वेदर’ नहीं हैं जितना दिखते थे। धीरे-धीरे उन्होंने इन्हें फेज आउट करना शुरू कर दिया। आज भी military historians इस घटना को पढ़ते हैं – एक ऐसी केस स्टडी जो साबित करती है कि युद्ध में हार्डवेयर से ज्यादा सॉफ्टवेयर (यानी स्ट्रैटेजी और स्किल) मायने रखता है।
1965 की ये हवाई लड़ाई सिर्फ भारत-पाकिस्तान युद्ध का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के military aviation का टर्निंग प्वाइंट बन गई। जब दो जानी दुश्मन आसमान में भिड़े, तो उन्होंने न सिर्फ एक-दूसरे की ताकत तौली, बल्कि युद्धक कलाओं के नए अध्याय भी रच डाले। और हां, एक बात तो तय है – भारतीय वायुसेना का वो जलवा आज भी हमें गर्व से भर देता है। क्या कहते हैं आप?
F-104 और MiG-21 की यह मशहूर जंग सिर्फ दो विमानों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसा दिलचस्प मुकाबला था जिसने एयर कॉम्बैट की दुनिया ही बदल दी। सोचिए, एक तरफ अमेरिका का ‘मिसाइल विद विंग्स’ F-104 और दूसरी तरफ सोवियत यूनियन का ‘बैलिस्टिक मिसाइल जैसा’ MiG-21। दोनों ही अपने-अपने दौर के बेहतरीन फाइटर जेट्स, लेकिन सवाल यह है कि आखिर किसने मारी बाजी?
असल में, इस लड़ाई ने साबित किया कि जंग के मैदान में सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि पायलट का हुनर भी उतना ही अहम होता है। यह वही बात है जैसे आपके पास सबसे तेज़ कार हो, लेकिन ड्राइविंग स्किल्स न हों तो क्या फायदा? और हाँ, इस मुठभेड़ ने एयर वॉर स्ट्रैटेजी के किताब में एक नया चैप्टर जरूर जोड़ दिया।
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एक बात और – क्या आप जानते हैं कि इन दोनों विमानों में से कौन सा आज भी कुछ देशों की एयर फोर्स में सर्विस में है? है न मजेदार बात? लेकिन यह किस्सा फिर कभी…
F-104 बनाम MiG-21: दो जंगी दानवों की कहानी जो आज भी दिलचस्प है!
F-104 या MiG-21 – असली सवाल ये है कि कौन था ज्यादा खतरनाक?
देखिए, F-104 “Starfighter” और MiG-21 दोनों ही अपने जमाने के बादशाह थे। पर यहाँ एक मजेदार बात – F-104 तो सच में रॉकेट जैसा था, खासकर ऊंचाई पर। वहीं MiG-21… अरे भई, उसकी तो चाल देखते ही बनती थी! मानो हवा में नाचता हो। असल में, सब कुछ पायलट पर निर्भर करता था। आपको पता है न, जैसे एक अच्छा ड्राइवर पुरानी गाड़ी को भी चमका देता है?
1965 की जंग – क्या सच में भिड़े थे ये दोनों? और किसकी चली थी?
अच्छा सवाल पूछा! हां, 1965 में ये दोनों आमने-सामने आए थे। और सुनिए… हमारे IAF के MiG-21 ने पाकिस्तानी F-104 को धूल चटा दी थी! है न मजेदार? Experts तो हैरान रह गए थे। मेरा मानना है कि MiG-21 की फुर्ती ने यहाँ जादू कर दिया। वैसे भी, dogfight में तो agility ही राज करती है, है न?
F-104 का डरावना नाम “Widow Maker” – क्यों पड़ा ऐसा नाम?
अरे बाप रे! ये नाम सुनकर ही डर लगता है। सच तो ये है कि F-104 पायलटों के लिए सच में किसी बुरे सपने जैसा था। इतना tricky कि जर्मन पायलट तो इससे खासे परेशान थे। High speed landing और ऐसे controls जो बस एक छोटी सी गलती की इंतजार कर रहे हों। सच कहूँ तो ये जेट विधवाएं बनाने में माहिर था।
आखिर क्यों आज भी IAF में है ये “Flying Coffin” MiG-21?
ये सवाल मुझे हमेशा से हैरान करता है। सच तो ये है कि MiG-21 हमारे लिए वफादार घोड़े जैसा रहा है। सस्ता, भरोसेमंद, और काम चलाऊ। हालांकि, अब इसका वक्त लद रहा है। Tejas जैसे नए जेट्स आ रहे हैं। पर एक बात मानिए, MiG-21 ने भारतीय वायुसेना के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। क्या आपको नहीं लगता?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com