F-35 की ये वॉर एक्सरसाइज: अमेरिका चीन को क्या सिग्नल देना चाहता है?
देखिए न, हाल ही में एक दिलचस्प घटना हुई। अमेरिका और ब्रिटेन के F-35 जैसे हाई-टेक फाइटर जेट्स ने हमारे आसपास के इंडो-पैसिफिक रीजन में जॉइंट वॉर एक्सरसाइज की। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक रूटीन मिलिट्री ड्रिल है? नहीं यार, इसे चीन को दिया गया एक साफ़-साफ़ मैसेज समझिए। और हैरानी की बात तो ये कि भारत भी इस पूरे खेल में कहीं न कहीं शामिल है, भले ही ऑफिशियली हमारा कोई रोल न हो। सच कहूं तो, ये पूरा मामला हमारी सेफ्टी और जियोपॉलिटिक्स के लिए कितना अहम है, इसका अंदाज़ा आप खुद लगा सकते हैं।
पूरा माजरा क्या है?
F-35 को दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर माना जाता है – जैसे कि मोबाइल में iPhone 15 Pro Max हो। अमेरिका और उसके दोस्त देशों के पास ये जेट्स उनकी एयर पावर को नया लेवल देते हैं। पिछले कुछ सालों से अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक में अपनी मिलिट्री प्रेजेंस बढ़ाने पर जोर दिया है। क्यों? सीधी सी बात – चीन के बढ़ते दबदबे को बैलेंस करना। और इसमें भारत की भूमिका? अरे भाई, हम अमेरिका के टॉप डिफेंस पार्टनर्स में से एक हैं न! हालांकि इस बार हमने एक्टिवली पार्टिसिपेट नहीं किया, लेकिन इसके इफेक्ट्स हमारी सिक्योरिटी पॉलिसी पर ज़रूर पड़ेंगे।
क्या-क्या हुआ असल में?
तो सीन कुछ यूं रहा – अमेरिका और ब्रिटेन ने अपने F-35 स्क्वॉड्रन को इंडो-पैसिफिक में उतारा और जमकर वॉर गेम्स खेले। चीन के लिए ये क्या मतलब रखता है? साफ़ है न, खासकर तब जब वो साउथ चाइना सी में अपनी मसल्स दिखा रहा हो। इन जेट्स ने कुछ ऐसे एडवांस्ड मैन्युवर्स किए कि चीन के लिए ये एक वॉर्निंग सिग्नल से कम नहीं। भारत ने अभी तक ऑफिशियली कुछ नहीं कहा, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय है कि ये हमारे लिए गेम-चेंजर हो सकता है।
किसने क्या कहा?
अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट का कहना है कि ये तो बस अपने allies के साथ मिलकर रीजनल सिक्योरिटी सुनिश्चित करने की कोशिश है। वहीं चीन? उनका तो पुराना रिकॉर्ड है – “ये तो शांति भंग करने वाला कदम है” वाला रिएक्शन। भारतीय एक्सपर्ट्स की राय में मजा आ गया – कुछ कह रहे हैं ये हमारे लिए अच्छा है क्योंकि चीन पर प्रेशर बना रहेगा, तो कुछ का मानना है कि हमें बैलेंस बनाकर चलना चाहिए। सच तो ये है कि हर कोई अपने-अपने एंगल से देख रहा है मामले को।
अब आगे क्या?
अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि चीन अब और ज्यादा मिलिट्री एक्टिविटी बढ़ाएगा। टेंशन? वो तो बढ़ेगी ही। भारत को भी अपनी डिफेंस स्ट्रैटजी पर फिर से सोचना पड़ सकता है, खासकर अमेरिका-चीन के इस नए कोल्ड वॉर जैसे माहौल में। हो सकता है आने वाले दिनों में अमेरिका हमें F-35 जैसे एडवांस्ड वेपन्स देने की बात करे। फायदे? हैं। चुनौतियां? वो भी कम नहीं। असल में ये पूरा मामला हमारे लिए एक तरह का टेस्ट केस है – कि हम कितना बैलेंस बना पाते हैं अपनी स्ट्रैटजिक ऑटोनॉमी और ग्लोबल पार्टनरशिप्स के बीच।
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अमेरिका का यह F-35 वॉर एक्सरसाइज वाला मूव… सच कहूं तो मुझे थोड़ा सा ‘calculated’ लग रहा है। है न? भारत के पड़ोस में अचानक इतनी बड़ी military activity… ये सिर्फ coincidence तो नहीं हो सकता।
अब सवाल यह है कि इसका असल मकसद क्या है? एक तरफ तो यह क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख देता है – वो अलग बात है। लेकिन मुझे लगता है कि यहां भारत को एक साफ़ संदेश दिया जा रहा है। थोड़ा indirect तरीके से, पर message clear है।
#भारत और #F35 के इस equation को समझना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि… देखिए न, global politics अब पहले जैसी नहीं रही। नए rules, नए players। और इन सबके बीच हमें अपनी position समझनी होगी।
मेरा मतलब… ये कोई रॉकेट साइंस तो नहीं, लेकिन इसे ignore करना भी ठीक नहीं। क्या आपको नहीं लगता?
(Note: I’ve maintained the original HTML paragraph tags while completely rewriting the content in a more human, conversational style with rhetorical questions, sentence fragments, and natural flow as per your instructions. The tone is now that of an opinionated but friendly Indian blogger analyzing the situation.)
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com