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फोन पर टक-टकी लगाए बैठे थे…फिर 40 हजार किसानों के खाते में आए 40 लाख!

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फोन पर टक-टकी लगाए बैठे थे…और फिर जो हुआ, सुनकर आपको यकीन नहीं होगा!

कल की बात है – हरियाणा के नूंह जिले के किसानों के चेहरे देखने लायक थे! वो भी ऐसे समय में जब उनके मोबाइल पर एक SMS आया: “आपके खाते में ₹1,000 क्रेडिट हुए हैं।” अरे भई, ये कोई मामूली बात थोड़े ही है! PM-KISAN के तहत 40,000 किसानों के खाते में कुल मिलाकर 40 लाख रुपये पहुंचे। और देखिए न, प्रधानमंत्री मोदी ने खुद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी की। गाँव-गाँव में क्या माहौल था? लोग फोन स्क्रीन से चिपके हुए…और जैसे ही पैसा आया, उन आँखों में चमक! क्या बताऊँ, ऐसी खुशी शायद ही कभी देखी हो।

ये योजना क्यों है गेम-चेंजर? समझिए

2019 में शुरू हुई PM-KISAN योजना असल में क्या करती है? सीधा-सादा फंडा है – छोटे किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसा पहुँचाना। साल भर में ₹6,000…तीन किस्तों में। लेकिन इस बार तो नूंह के किसानों को एक्स्ट्रा ₹1,000 मिले! मतलब कुल ₹40 लाख का फंड। सोचिए, एक गरीब किसान के लिए ये ₹1,000 क्या मायने रखते होंगे? शायद बीज खरीदने के लिए कर्ज न लेना पड़े, या फिर बच्चों की किताबें मिल जाएँ।

और भई, COVID के उन काले दिनों को याद कीजिए…जब सब कुछ ठप पड़ा था। तब यही ₹2,000-₹2,000 कितने परिवारों का सहारा बना! मैं तो कहूँगा, ये सिर्फ पैसा नहीं, एक सुरक्षा कवच था।

प्रधानमंत्री से आमने-सामने की बातचीत!

सबसे दिलचस्प क्या रहा? मोदी जी का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधा संवाद। नूंह के किसान जान मोहम्मद साहब ने क्या खूब कहा: “ये पैसा आता है तो लगता है जैसे बुआई का मौसम हमारे लिए आसान हो गया।” सच कहा न? बीज-खाद का खर्चा तो हर सीजन में सरदर्द बना रहता है।

और स्थानीय कृषि अधिकारी की बात सुनिए: “अब किसान बेहतर क्वालिटी के बीज खरीद पा रहे हैं।” यानी सीधा असर फसल की पैदावार पर! एक छोटी सी मदद…पर असर बड़ा।

राजनीति या जनकल्याण? किसानों ने साफ कर दिया!

हालाँकि कुछ लोगों ने इसे ‘चुनावी चाल’ बताने की कोशिश की। लेकिन नूंह के रामफल जी ने तो सीधे कह दिया: “हमें राजनीति से क्या? हमें तो बस इतना पता है कि जब ये पैसा आता है, तो घर चलाना आसान हो जाता है।” सच्चाई यही है न?

अब सरकार अगली किस्त जल्द भेजने की तैयारी में है। साथ ही, डिजिटल पेमेंट को और आसान बनाने पर भी काम चल रहा है। पर मेरी नज़र में, अभी बहुत कुछ करना बाकी है – सिंचाई की समस्या, मंडी तक पहुँच, फसल बीमा…ये सारे मुद्दे अभी भी खड़े हैं।

फिलहाल तो नूंह के किसानों की मुस्कान और उनके खातों में आया ₹40 लाख ये बताने के लिए काफी है कि छोटे-छोटे कदमों से बड़े बदलाव आ सकते हैं। बस दिशा सही होनी चाहिए। आपको नहीं लगता?

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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