ब्रह्मोस मिसाइल का पहला ग्राहक कौन? दक्षिण चीन सागर में भारत का यह दोस्त गेम-चेंजर साबित हो सकता है!
अरे वाह! भारत और फिलीपींस की दोस्ती अब सिर्फ डिप्लोमैटिक हैलो-हाइ तक सीमित नहीं रहने वाली। फिलीपींस के प्रेसिडेंट मार्कोस का हालिया दिल्ली दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं थी – असल में, यह तो एक ऐतिहासिक डिफेंस डील की भूमिका साबित हो सकता है। सुना है न कि ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति पर गंभीर बातचीत हुई है? अगर यह डील पक्की हो गई, तो फिलीपींस बनेगा ब्रह्मोस का पहला अंतरराष्ट्रीय कस्टमर। क्या बात है न?
ये साझेदारी इतनी खास क्यों?
देखिए, भारत और फिलीपींस के रिश्ते तो पुराने हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में इंडो-पैसिफिक में चीन के बढ़ते दखल ने इन रिश्तों को नई दिशा दे दी है। अब सवाल यह है कि फिलीपींस को ब्रह्मोस जैसी मिसाइल की जरूरत क्यों? सीधी बात – दक्षिण चीन सागर में चीन की धौंसपट्टी से निपटने के लिए! फिलीपींस लंबे समय से चीन की आक्रामकता झेल रहा है, और ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइल उसकी मुट्ठी में एक तगड़ा जवाबी हथियार होगा।
ब्रह्मोस की बात करें तो यह भारत-रूस की जॉइंट वेंचर है जो 290 किमी तक मार कर सकती है। सच कहूं तो यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का ब्रैंड एंबेसडर बन चुकी है। अगर फिलीपींस इसे खरीद लेता है, तो पूरे इंडो-पैसिफिक रीजन की सिक्योरिटी डायनैमिक्स ही बदल जाएगी। गेम चेंजर, है न?
375 मिलियन डॉलर का यह डील क्यों है खास?
तो जानिए कि इस डील में क्या है – फिलीपींस ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए भारत के साथ 375 मिलियन डॉलर (करीब 3100 करोड़ रुपये!) का करार किया है। भारत के लिए यह सिर्फ एक डिफेंस एक्सपोर्ट नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ का जीता-जागता प्रमाण है। और फिलीपींस? उनके लिए तो यह अपनी नेवी को मॉडर्नाइज करने का गोल्डन चांस है। साथ ही दोनों देशों ने मैरीटाइम सिक्योरिटी, साइबर सिक्योरिटी पर भी बातचीत की – यानी पूरा पैकेज डील!
आगे क्या होगा?
भारत सरकार तो इस डील पर फूली नहीं समा रही – ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना साकार होता दिख रहा है। वहीं फिलीपींस का डिफेंस मिनिस्ट्री भी खुश है, उनका कहना है कि ब्रह्मोस उनकी स्ट्रैटेजी में नया डायमेंशन जोड़ देगा। एक्सपर्ट्स की राय? यह डील चीन को एक क्लियर मैसेज है कि भारत और फिलीपींस सिक्योरिटी मामलों में साथ खड़े हैं।
अब सवाल यह कि आगे क्या? ब्रह्मोस की डिलीवरी के बाद फिलीपींस की मिलिट्री डिप्लॉयमेंट में बड़े बदलाव आ सकते हैं। और भारत? वह वियतनाम, इंडोनेशिया जैसे दूसरे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को भी ब्रह्मोस बेचने पर विचार कर सकता है। हालांकि, चीन की प्रतिक्रिया भी देखने लायक होगी – आखिर दक्षिण चीन सागर में उसका एकाधिकार चुनौती मिल रही है न!
अंत में, यह डील सिर्फ दो देशों के बीच का एक समझौता नहीं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पावर बैलेंस को रीडिफाइन करने वाला कदम है। भविष्य में और भी डिफेंस कोलैबोरेशन की उम्मीद है – जो इस रीजन में स्टेबिलिटी और सिक्योरिटी के लिए अच्छा संकेत है। क्या आपको नहीं लगता कि यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है?
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com