Site icon surkhiya.com

“पूर्व CJI ने उजागर की एकसाथ चुनाव की बड़ी खामी! क्या ये रोड़ा बनेगा?”

पूर्व CJI ने एकसाथ चुनाव पर उठाए सवाल – क्या सच में है ये इतना आसान?

अरे भाई, मामला गरम है! भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जेएस खेहर ने “One Nation, One Election” के इस पूरे प्रस्ताव पर कुछ ऐसे सवाल उठाए हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। JPC के सामने रखी गई अपनी बात में उन्होंने सीधे-सीधे कहा है कि ये विधेयक संविधान की बुनियादी भावना के साथ खिलवाड़ करता दिख रहा है। और सच कहूँ तो, उनकी चिंताएँ बिल्कुल वाजिब लगती हैं। सरकार ने हालांकि सुधार का वादा किया है, लेकिन क्या ये सिर्फ़ राजनीति का चालबाज़ी है? समझना मुश्किल है।

देखिए, एकसाथ चुनाव की बात नई तो नहीं है। हमारे यहाँ पहले भी ऐसा होता रहा है। पर सवाल ये है कि क्या आज के दौर में, जब राजनीति इतनी जटिल हो चुकी है, ये प्रस्ताव वाकई काम कर पाएगा? सरकार का दावा है कि इससे पैसा बचेगा और कामकाज आसान होगा। लेकिन दूसरी तरफ़, क्या ये राज्यों की आज़ादी पर डाका तो नहीं डाल देगा? विपक्ष तो इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है। और ईमानदारी से कहूँ तो, उनकी बात में भी दम नज़र आता है।

पूर्व CJI ने जो मुद्दे उठाए हैं, वो तो बिल्कुल सटीक हैं। जैसे – अगर किसी राज्य में सरकार गिर जाए तो? या फिर किसी वजह से चुनाव टल जाए तो? इन स्थितियों का कोई स्पष्ट जवाब इस विधेयक में नहीं दिया गया है। और सबसे बड़ी बात – क्या ये प्रस्ताव संविधान के ‘Basic Structure’ के साथ छेड़छाड़ तो नहीं? ये सवाल तो सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है, अगर विधेयक इसी रूप में पास होता है।

राजनीतिक गलियारों में तो इस पर बवाल मचा हुआ है। एक तरफ़ केंद्रीय मंत्री कह रहे हैं कि “हर आपत्ति पर गंभीरता से विचार होगा”। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेता इसे लोकतंत्र के लिए ख़तरा बता रहे हैं। और सच्चाई ये है कि दोनों पक्षों के तर्कों में कुछ न कुछ सच्चाई ज़रूर है।

अब सबकी निगाहें JPC पर टिकी हैं। अगर उनकी रिपोर्ट में पूर्व CJI की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो राज्यसभा में तूफ़ान खड़ा हो सकता है। विपक्ष तो जनता को जागरूक करने की तैयारी में जुट गया है।

असल में, ये मामला अब सिर्फ़ चुनावों के समय को लेकर नहीं रह गया है। ये तो हमारे संविधान, हमारे लोकतंत्र की मूल भावना से जुड़ा सवाल बन चुका है। सरकार के लिए ये सच्ची परीक्षा की घड़ी है – क्या वो इन सवालों का संतोषजनक जवाब दे पाएगी? वक्त ही बताएगा।

यह भी पढ़ें:

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

Exit mobile version