“गोपी को मिली आजीवन कैद! जज ने सुनाई सख्त सजा, जानें क्या था पूरा मामला”

गोपी को मिली आजीवन कैद! जज साहब ने ऐसी सजा सुनाई कि लोगों के होश उड़ गए

सुनकर अजीब लगता है न? मुंगेर के शास्त्री नगर में एक बेचारे bulb को लेकर हुई लड़ाई ने इतना भयानक रूप ले लिया। असल में, 15 जून 2023 की वो शाम तो किसी साधारण दिन जैसी ही थी… लेकिन फिर क्या हुआ? रुबी देवी की जान चली गई। और वजह? बिजली के एक बल्ब को लेकर पड़ोसी से हुई तकरार। अब तो एडीजे प्रबल दत्ता ने गोपी चौधरी को आजीवन कैद की सजा सुना दी है – साथ में 25 हजार का जुर्माना भी। सच कहूं तो, ये फैसला सिर्फ कानूनी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक तगड़ा झटका है।

बल्ब से हत्या तक का सफर – कैसे पहुंचे यहां?

कहानी शुरू होती है एक आम पड़ोसी झगड़े से। रुबी देवी और गोपी चौधरी – दोनों ही शास्त्री नगर के रहने वाले। मामला तो कई दिनों से चल रहा था, लेकिन 15 जून को गोपी का गुस्सा इतना भड़क गया कि उसने लाठी उठा ली। और फिर? रुबी के सिर पर वार कर दिया। मौके पर ही मौत। पुलिस ने तुरंत गोपी को पकड़ लिया। कोर्ट में तो सारे सबूत गोपी के खिलाफ ही बोल रहे थे – गवाहों से लेकर forensics रिपोर्ट तक। सच तो ये है कि भागने का कोई रास्ता ही नहीं बचा था।

जज साहब ने किया ऐसा फैसला कि इतिहास में दर्ज हो गया

मुंगेर कोर्ट ने तो इस मामले में एकदम सख्त रुख अपनाया। IPC की धारा 302 के तहत आजीवन कैद। साथ में 25 हजार का जुर्माना – और अगर नहीं भरा तो? एक साल की अतिरिक्त सजा! स्थानीय वकीलों का कहना है कि ऐसा फैसला शायद ही पहले कभी सुना गया हो। कानून की भाषा में कहें तो ये एक landmark judgment है।

लोग क्या कह रहे हैं? सुनिए जनता की राय

रुबी का परिवार तो संतुष्ट दिखा… पर क्या सच में कोई सजा किसी खोए हुए अपने को वापस ला सकती है? वहीं दूसरी तरफ, area के एक senior leader ने इसे सही कदम बताया। लेकिन आम जनता की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों को लगता है कि ऐसे मामलों में तो फांसी ही सही सजा होती। वहीं कुछ का मानना है कि आजीवन कारावास भी काफी है। आप क्या सोचते हैं?

अब आगे क्या? गोपी के लिए क्या बचा है?

अभी तो गोपी जेल भेज दिया गया है… लेकिन कानूनी जानकारों की मानें तो story यहीं खत्म नहीं होती। हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है। पर इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या हम इतने गुस्सैल हो गए हैं कि एक bulb के लिए जान लेने पर उतारू हो जाते हैं? प्रशासन ने community awareness programs चलाने की बात कही है… देखते हैं कितना असर होता है।

सच तो ये है कि ये मामला हम सभी के लिए एक आईना है। न्यायिक प्रणाली तो अपना काम कर रही है… लेकिन हमें भी समझना होगा कि छोटी-मोटी बातों पर हाथ उठाना किसी समस्या का हल नहीं। बल्कि नई मुसीबतों को दावत देने जैसा है। क्या पता… आज bulb के लिए लड़ाई, कल किसी और बात पर। सोचने वाली बात है, है न?

यह भी पढ़ें:

गोपी केस: वो सारे सवाल जो आप पूछना चाहते हैं लेकिन डर रहे हैं!

1. गोपी को आजीवन कैद? भाई, इतनी सख्त सजा क्यों?

सुनकर हैरानी होगी, लेकिन गोपी पर जो इल्ज़ाम साबित हुआ वो कोई मामूली चोरी-छुपटी नहीं थी। हत्या या फिर देशद्रोह जैसा कोई गंभीर मामला रहा होगा – वरना जज साहब इतनी बड़ी सजा सुनाते? हालांकि, पूरा केस अभी भी कोर्ट की फाइलों में दबा हुआ है। क्या पता, कुछ और ही सच सामने आ जाए!

2. अपील? हां भई हां, ये तो उसका बुनियादी हक है!

अरे भई, हमारे यहाँ कानून तो है ना! गोपी चाहे तो हाई कोर्ट या फिर सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है। बस एक अच्छा वकील मिल जाए जो उसकी पैरवी कर सके। पर सच कहूँ? ये सब इतना आसान भी नहीं होता। पैसा, पावर और सबूत – तीनों चाहिए!

3. ‘आजीवन’ का मतलब? सच में जिंदगी भर जेल में सड़ना?

नाम से तो लगता है कि बस – जन्म के बाद मृत्यु तक! लेकिन असलियत थोड़ी अलग है। देखिए ना, हमारे यहाँ 14 साल काटने के बाद remission (यानी छूट) की गुंजाइश रहती है। पर ये केस जितना गंभीर, उतना ही मुश्किल। क्या पता गोपी को पूरी सजा भुगतनी पड़े। बुरा लगता है सुनने में, है ना?

4. सबूत? भई, मीडिया वालों के मुताबिक तो कुछ ऐसा था…

CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट्स – ये सब तो थे। पर असल सच क्या है? वो तो कोर्ट की फाइलों में बंद है। मीडिया वाले क्या बताएँगे? उन्हें तो TRP चाहिए! एक बात तो तय है – इतनी बड़ी सजा बिना मजबूत सबूतों के नहीं सुनाई जाती। या फिर… कहीं कोई राजनीतिक खेल तो नहीं? सोचने वाली बात है!

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को दी बड़ी जिम्मेदारी, TMC का लोकसभा नेता नियुक्त किया

शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार: कौन देगा मुखाग्नि? अग्नि संस्कार, दफन या समाधि – जानें पूरी जानकारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments