बच्चे को स्कूल भेजना है? ये 8 UNICEF टिप्स आपका काम आसान कर देंगे!
भई, बात तो सच है – पहली बार स्कूल भेजना सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं, माँ-बाप के लिए भी टेंशन भरा होता है। एक तरफ तो खुशी होती है कि बच्चा बड़ा हो रहा है, लेकिन दूसरी तरफ यह डर भी सताता है कि कहीं वह रोएगा तो नहीं? मेरा तो अनुभव यही कहता है कि यह पल हर पेरेंट्स के लिए इमोशनल रोलरकोस्टर जैसा होता है। पर सच्चाई यह है कि यह डर बिल्कुल नॉर्मल है, और UNICEF ने तो इसके लिए कुछ जबरदस्त टिप्स दिए हैं जो वाकई काम आते हैं।
क्यों रोता है आपका बच्चा? समझिए असली वजह
असल में बात यह है कि बच्चे का दिमाग एकदम खाली स्लेट की तरह होता है। नया माहौल, नए चेहरे, नया Routine – यह सब उसके लिए अजनबी होता है। मेरी भतीजी तो पहले दिन इतनी रोई कि टीचर को उसे गोद में उठाकर चुप कराना पड़ा! और तो और, कुछ बच्चे तो पेट दर्द या सिरदर्द जैसे शारीरिक लक्षण भी दिखाने लगते हैं। पर यह सब उस एक डर की वजह से होता है – कि कहीं मम्मी-पापा उसे छोड़कर चले तो नहीं जाएंगे? बेचारा बच्चा समझ ही नहीं पाता कि आप शाम को वापस आ जाएंगे।
मेरे पसंदीदा UNICEF टिप्स: ट्राई करके देखिए!
अब सवाल यह है कि इस स्थिति से कैसे निपटा जाए? मैंने जब ये UNICEF के टिप्स पढ़े, तो लगा कि ये तो बिल्कुल वही चीजें हैं जो हमारी दादी-नानी भी कहती थीं, बस थोड़े साइंटिफिक तरीके से:
1. छोटे-छोटे स्टेप्स लें: एकदम से पूरा दिन स्कूल में न छोड़ें। पहले उसे किसी दोस्त के घर 1-2 घंटे के लिए अकेला छोड़कर देखिए। काम करेगा!
2. स्कूल को ‘कूल’ बनाइए: बताइए न कि स्कूल में कितने मजे हैं – नए दोस्त, रंग-बिरंगी किताबें, खेलने के लिए झूले! बच्चे का उत्साह देखकर आपको भी अच्छा लगेगा।
3. टाइम टेबल बनाएं: सुबह उठने से लेकर नाश्ते तक का एक फिक्स्ड Routine सेट करें। मेरा मानना है कि predictability बच्चों को सेफ फील कराती है।
4. बाय-बाय का सही तरीका: देखिए, जब आप बच्चे को छोड़ने जाएं, तो एक ही बार में अलविदा कहकर चले आएं। बार-बार पीछे मुड़कर देखने से तो बच्चा और ज्यादा रोएगा!
5. सिक्योरिटी ब्लैंकी: अगर बच्चा बहुत जिद करे, तो उसका कोई पसंदीदा खिलौना या रुमाल साथ में दे दीजिए। यह छोटी सी चीज उसे सुरक्षा का अहसास दिलाएगी।
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स्कूल डे पर तो खाने का खास ख्याल रखना पड़ता है। मेरी बहन हमेशा अपने बेटे के लिए ये पैक करती है:
– एनर्जी के लिए: मूंगफली-गुड़ की चिक्की या ड्राई फ्रूट्स
– हेल्दी ऑप्शन: पराठा रोल या पोहा
– ड्रिंक: नारियल पानी या छाछ
और हाँ, चिप्स-चॉकलेट जैसी चीजें तो बिल्कुल न दें – पहले तो एनर्जी मिलेगी, फिर अचानक से बच्चा सुस्त हो जाएगा।
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सच कहूँ तो ज्यादातर बच्चे 1-2 हफ्ते में एडजस्ट कर लेते हैं। लेकिन अगर आपका बच्चा:
– 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक लगातार रोए
– रात को सो न पाए या बुरे सपने देखे
– खाना-पीना छोड़ दे
तो फौरन किसी अच्छे चाइल्ड स्पेशलिस्ट से मिलिए। हो सकता है यह सामान्य से ज्यादा गंभीर समस्या हो।
अंत में बस इतना कहूँगा – थोड़ा सब्र रखिए। मेरा यकीन मानिए, कुछ ही दिनों में आपका बच्चा स्कूल जाने के लिए आपको जगाएगा! और हाँ, पहले दिन की फोटो जरूर खींचकर रखिएगा – बाद में यादें ताजा करने में मजा आएगा।
माता-पिता होना आसान नहीं, खासकर जब बात स्कूल की आती है। कितनी बार आपने देखा है कि बच्चा सुबह-सुबह रोने लगता है या बस स्कूल जाने का नाम सुनते ही मूड खराब हो जाता है? पर चिंता की कोई बात नहीं – UNICEF के ये 8 practical tips आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए game changer साबित हो सकते हैं। सच कहूं तो, मैंने खुद कुछ टिप्स अपने भांजे पर आजमाई थीं – और हैरानी की बात ये कि काम कर गईं!
अब सवाल यह है कि ये टिप्स इतने खास क्यों हैं? देखिए न, ये सिर्फ स्कूल जाने को आसान नहीं बनाते… बल्कि पूरे experience को ही बदल देते हैं। थोड़ी सी planning, थोड़ा सा patience – और फर्क आप खुद देखेंगे। मेरा तो यकीन है कि इन्हें follow करके आपका बच्चा न सिर्फ happily स्कूल जाएगा, बल्कि नए दोस्त बनाने से लेकर पढ़ाई तक में interest दिखाने लगेगा। सचमुच!
तो क्या आप तैयार हैं? आज से ही इन्हें try कीजिए और देखिए कैसे आपके बच्चे के स्कूल के दिन special memories में बदल जाते हैं। वैसे, एक छोटी सी tip और – जब भी मौका मिले, बच्चे से उसके school के बारे में बातें करते रहिए। Trust me, ये छोटी-छोटी बातें बड़ा difference लाती हैं।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

