हिमाचल का बद्दी-नालागढ़ डूबा पानी में: पुल गया, मजदूरों की मुश्किलें बढ़ीं
अभी कुछ दिनों से हिमाचल के सोलन जिले में जो बारिश हो रही है, वो सिर्फ बारिश नहीं बल्कि मुसीबत बनकर आई है। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ का हाल तो देखिए – मानकपुर का वो पुल जिस पर सैकड़ों लोग रोज गुजरते थे, बारिश के आगे बेबस होकर बह गया! अब पूरे इलाके का ट्रैफिक सिस्टम ठप है। प्रशासन ने किशनपुरा-गुरुमाजरा का रास्ता सुझाया है, पर सच कहूं तो ये सिर्फ एक अस्थायी समाधान है। और सबसे ज्यादा मुश्किल में कौन? वो दिहाड़ी मजदूर जिनके लिए ये पुल रोजी-रोटी का सवाल था।
पीछे की कहानी: ये सब क्यों हुआ?
इस बार हिमाचल में मानसून ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बारिश सामान्य से कहीं ज्यादा हो रही है। और बद्दी-नालागढ़ जैसे पहाड़ी इलाके तो हमेशा से ही बारिश में परेशान होते आए हैं – या तो भूस्खलन या फिर नदियों का पानी सड़कों पर। मानकपुर का ये पुल सिर्फ सीमेंट और लोहे का ढांचा नहीं था, बल्कि सैकड़ों परिवारों की जिंदगी से जुड़ा हुआ था। अब जब ये टूटा है, तो पूरा इलाका मानो दुनिया से कट सा गया है।
अभी क्या चल रहा है?
पुल गिरने के बाद तो प्रशासन ने हड़बड़ी में हाई alert जारी कर दिया। NDRF वाले भी पहुंच गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये काफी है? वैकल्पिक रास्ता तो खोल दिया गया है, पर वो भी क्या रास्ता – लंबा, संकरा और अभी से ही जाम से भरा हुआ! आप सोचिए उन मजदूरों की हालत जो सुबह 5 बजे इसी रास्ते से काम पर जाते थे। अब उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
लोग क्या कह रहे हैं?
एक स्थानीय निवासी ने मुझे बताया – “भाई साहब, ये पुल हमारे लिए जीवनरेखा था। अब बच्चों को स्कूल भेजना भी मुश्किल हो गया है।” प्रशासन नए पुल की बात कर रहा है, पर ये तो वही बात हुई – ‘अंधे के हाथ बटेर लगना’। मौसम वालों ने तो और बारिश की चेतावनी दे दी है। अगर ऐसा हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
आगे क्या होगा?
प्रशासन कह रहा है कि नया पुल बनाने में कम से कम एक महीना लगेगा। पर सच्चाई ये है कि अगर बारिश जारी रही तो काम शुरू करना भी मुश्किल होगा। लोगों की मांग साफ है – सिर्फ पुल ही नहीं, बल्कि पूरी infrastructure को मजबूत बनाने की जरूरत है। बेहतर drainage system, मजबूत पुल… पर सवाल ये है कि क्या सरकार इन सबके लिए तैयार है?
हिमाचल की ये घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के लिए हम कितने कम तैयार हैं। अभी तो सिर्फ राहत कार्यों पर ध्यान देना काफी नहीं है। लंबे समय के लिए planning की जरूरत है। वरना अगली बारिश में फिर वही हाल होगा। सच कहूं तो – ‘जब जागो तभी सवेरा’ वाली कहावत यहां सटीक बैठती है।
यह भी पढ़ें:
- Heavy Rain Disaster Himachal Pradesh 51 Deaths Roads Closed
- Up Weather Update Heavy Rain Lucknow Moradabad Rampur
- Himachal Pradesh Rain Damage
हिमाचल के बद्दी-नालागढ़ में भारी बारिश ने मचाई तबाही – जानिए सबकुछ
1. बद्दी-नालागढ़ में बारिश ने क्या-क्या बर्बाद किया है?
अरे भाई, स्थिति बड़ी गंभीर है। एक तरफ तो पूरा इलाका पानी-पानी हो गया है, वहीं एक पुल भी धराशायी हो गया। सोचिए, जिन मजदूरों का रोज का काम ही उनकी रोटी से जुड़ा है, उनके लिए तो ये मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। सड़कें बंद, गाड़ियां अटकी हुईं, और कई इलाकों में तो पानी घुस गया है – बिल्कुल जैसे किसी ने लोगों की दिनचर्या को उलट-पलट कर दिया हो।
2. टूटा हुआ पुल लोगों के लिए किस तरह सिरदर्द बन गया है?
सच कहूं तो पुल का टूटना तो जैसे रीढ़ की हड्डी ही टूट जाने जैसा है। लोगों को अब 10 किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है – वो भी ऐसे समय में जब petrol के दाम आसमान छू रहे हैं! और स्थानीय मजदूरों की बात करें तो… उनके लिए तो हर दिन बिना काम के बिताना मतलब परिवार का पेट कैसे भरेंगे, ये सवाल। सामान की ढुलाई? उसकी तो बात ही छोड़िए!
3. सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
अच्छी खबर ये है कि NDRF की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं। पर सच पूछो तो? सिर्फ टीमें भेज देना काफी नहीं होता। खैर, प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं – पुल की मरम्मत का काम चल रहा है, लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है, और राशन भी बांटा जा रहा है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सब पर्याप्त है?
4. आगे ऐसी मुसीबतों से कैसे बचा जा सकता है?
देखिए, nature के सामने हम बेबस हैं, लेकिन तैयारी तो कर ही सकते हैं न? पहली बात तो drainage system… वो भी ऐसी जो सिर्फ कागजों पर न हो। दूसरा, पुलों और सड़कों का नियमित inspection – वो भी ईमानदारी से। और हां, हमें भी मौसम updates पर नजर रखनी होगी। क्योंकि जान है तो जहान है, है न?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com