high mortgage rates above 6 percent traps homeowners 20250706032810556384

6.6% से ऊपर अड़े बंधक दरें: क्यों लाखों लोग फंसे हैं महंगे किश्तों और रिफाइनेंस के बिना?

6.6% से ऊपर अड़े बंधक दरें: क्या अब घर खरीदना सपना हो गया है?

अरे भाई, क्या बताऊं… पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी mortgage rates 6.6% के पार जमे हुए हैं। और ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, असल में लाखों लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। सोचो जरा – जिन्होंने पहले से घर खरीद रखा है, उनकी monthly EMI आसमान छू रही है। और जो नया घर लेना चाहते हैं? उनके लिए तो ये दरें सीधे सपने तोड़ने का काम कर रही हैं। सच कहूं तो, ये हालात middle class के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं!

ये मुसीबत आई कहां से? पूरी कहानी समझते हैं

याद है वो 2020-21 का समय? जब COVID के चलते Federal Reserve ने दरें इतनी गिरा दी थी कि mortgage rates 3% से भी नीचे पहुंच गए थे। उस वक्त तो लोगों ने खूब मजे किए – नए घर खरीदे, पुराने loans को refinance करवाया। लेकिन 2022 आते-आते inflation ने सिर उठाया और फेड ने दरें बढ़ानी शुरू कर दीं। नतीजा? हमारे प्यारे mortgage rates दोगुने से भी ज्यादा हो गए! अब inflation थोड़ा कंट्रोल में आया है, लेकिन घर खरीदने वालों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। क्या करें, सिस्टम ही ऐसा है!

आजकल बाजार का क्या हाल है? सच्चाई जानकर दिल दहल जाएगा

देखिए न, पिछले तीन महीने से rates 6.6% से 7% के बीच डोल रहे हैं – ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे। और इसका असर? घरों की बिक्री पर सीधा चोट! नए buyers की संख्या लगातार गिर रही है। सबसे बुरा हाल तो उनका है जिन्होंने 2020-21 में कम दरों पर loan लिया था। अब वो refinance भी नहीं करवा पा रहे क्योंकि नई दरें देखकर तो पसीने छूट जाते हैं। EMI बढ़ी है, बजट बिगड़ा है… समझ नहीं आता क्या करें। सच में बड़ी मुश्किल वक्त चल रहा है।

लोग क्या कह रहे हैं? और experts की क्या राय है?

आम आदमी की बात करें तो हालात देखकर दिल दुखता है। कई परिवारों ने तो अपनी बचत ही खत्म कर दी है EMI भरने में। वहीं economists की मानें तो जब तक Federal Reserve rates कम नहीं करता, तब तक राहत की उम्मीद करना बेकार है। हां, कुछ banks ने special offers देकर लोगों को लुभाने की कोशिश की है। लेकिन ये तो वैसा ही है जैसे सूखे में एक बूंद पानी। असली बारिश का इंतजार अभी बाकी है!

आगे क्या होगा? क्या कोई उम्मीद की किरण है?

तो अब सवाल यह है कि इसका अंत कब होगा? सच बताऊं तो सब Federal Reserve के हाथ में है। अगर वो अगले कुछ महीनों में rates कम कर दे, तो शायद हमें राहत मिले। नहीं तो… ये ऊंची दरें लंबे समय तक चलीं तो housing market को बड़ा झटका लग सकता है। कीमतें गिर सकती हैं, मांग घट सकती है। एक तरफ तो ये खरीदारों के लिए अच्छा होगा, लेकिन दूसरी तरफ economy पर बुरा असर पड़ेगा। फिलहाल तो हम सबको बस इंतजार करना होगा। और हां, उम्मीद नहीं छोड़नी है – क्योंकि जिंदगी में कुछ भी permanent नहीं होता, न अच्छा और न बुरा!

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6.6% से ऊपर बंधक दरें: जानिए क्या करें और क्या न करें

अरे भाई, आजकल तो home loan की ब्याज दरें आसमान छू रही हैं न? 6.6% से भी ऊपर! सच कहूं तो मेरे भी कई दोस्त परेशान हैं। तो चलिए, इस मसले को गहराई से समझते हैं…

1. ये बढ़ी हुई बंधक दरें – असली वजह क्या है और हम पर क्या असर पड़ रहा है?

देखिए, असल में पूरी कहानी RBI की policy rates से शुरू होती है। जब inflation बढ़ता है (और भाई, आजकल तो सबकी जेब पर बोझ है), तो RBI दरें बढ़ा देता है। नतीजा? Banks का cost of funds बढ़ जाता है और वो ये बोझ हम पर डाल देते हैं।

अब सोचिए – नए खरीदारों की EMI तो बढ़ ही रही है, साथ ही पुराने लोन वालों को रिफाइनेंस के फायदे भी नहीं मिल पा रहे। एक तरफ तो मकान महंगे, दूसरी तरफ लोन भी महंगा। क्या करें भला?

2. अभी लोन लें या रुकें? (सच्ची सलाह)

ईमानदारी से कहूं तो ये कोई one-size-fits-all जवाब नहीं है। Experts की राय है कि अगर आपको real जरूरत है (जैसे शादी हो रही हो या जॉब शिफ्ट हुआ हो), तो fixed-rate loan ले लीजिए। क्यों? क्योंकि ये दरें और भी ऊपर जा सकती हैं।

लेकिन… हमेशा एक लेकिन होता है न? अगर आपके पास थोड़ा time है (मतलब किराए पर रह सकते हैं), तो 3-4 महीने wait करके देखिए। कौन जाने RBI मेहरबान हो जाए!

3. EMI का बोझ कैसे कम करें? (कुछ असली practical टिप्स)

मेरे एक दोस्त ने ये तरीके अपनाए थे, शेयर करता हूँ:
– सबसे पहले, loan tenure बढ़ा दीजिए। हां, interest ज्यादा देना पड़ेगा, लेकिन monthly बोझ कम होगा।
– अगर savings हैं तो partial prepayment कर दीजिए। थोड़ा सा भी काम आएगा!
– दूसरे banks के balance transfer options जरूर check कीजिए। कभी-कभी 0.5% की बचत भी लाखों रुपये बचा देती है।
– और हां, बजट से Netflix, Zomato जैसे expenses कम करिए। मुश्किल है, पर करना पड़ेगा!

4. रिफाइनेंस करें या न करें? (गणित समझिए)

यहां एक simple rule है – अगर आपका current rate 8% से ऊपर है और आपको 1% से ज्यादा की बचत मिल रही है (सभी charges काटने के बाद भी), तो जाइए और रिफाइनेंस करवा लीजिए।

लेकिन अगर difference केवल 0.25-0.5% है, तो processing fee और paperwork के झंझट में पड़ने से अच्छा है wait करिए। क्योंकि कभी-कभी ‘सस्ते में महंगा पड़ जाता है’। समझे न?

अंत में एक बात – ये सब पढ़कर घबराइए मत। थोड़ा planning, थोड़ा patience… और सब ठीक हो जाएगा। मेरा विश्वास कीजिए!

Source: Dow Jones – Social Economy | Secondary News Source: Pulsivic.com

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