LA की माँ का अपहरण? DHS ने कहा – सब झूठ, ICE पर लगे आरोप भी बेबुनियाद!
अरे भई, क्या मामला है! अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने तो LA की एक महिला के अपहरण के पूरे किस्से को ही खारिज कर दिया है। सच कहूँ तो, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ये केस तूफान ला रहा था। और अब? DHS का कहना है कि सारे दावे “पूरी तरह फर्जी” हैं। है न मजेदार?
असल में बात ये हुई थी कि इस महिला ने दावा किया था कि ICE के एजेंट्स ने उसे बिना किसी वॉरंट के उठा लिया और किसी गोदाम में बंद कर दिया। साथ ही उसने ये भी कहा कि ICE कथित तौर पर “फ्रीलांसर्स” को हायर कर रहा है जो गैरकानूनी तरीके से लोगों को पकड़ते हैं। लेकिन अब DHS ने इन सभी बातों को हवा में उड़ा दिया है।
DHS ने तीन मुख्य बातें साफ की हैं:
1. महिला कभी ICE की कस्टडी में थी ही नहीं
2. ICE फ्रीलांसर्स को हायर नहीं करता (ये तो बिल्कुल फिल्मी सीन लगता है!)
3. जाँच में महिला के दावों का कोई सबूत नहीं मिला
अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये पूरा ड्रामा क्यों रचा गया? सरकारी प्रवक्ता तो इसे ICE की छवि खराब करने की साजिश बता रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर लोग अब भी बहस कर रहे हैं – कोई DHS पर भरोसा कर रहा है तो कोई शक की निगाह से देख रहा है।
और हाँ, अब क्या होगा? DHS ने संकेत दिए हैं कि झूठी रिपोर्ट दर्ज करने पर महिला के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है। पर सच पूछो तो, इस पूरे मामले ने दो बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
1. सोशल मीडिया पर अफवाहों का कितना बड़ा असर होता है
2. लोगों का सरकारी एजेंसियों पर भरोसा क्यों कम हो रहा है?
एक तरफ तो DHS ने साफ कर दिया है कि ये केस फर्जी था। लेकिन दूसरी तरफ, क्या आपने नोटिस किया कि कैसे ये खबर इतनी तेजी से वायरल हुई? सच कहूँ तो, आजकल किसी भी खबर पर भरोसा करने से पहले दो बार सोचना पड़ता है। वैसे भी, जैसा कि मेरी दादी कहती थीं – “अधूरी बात पर यकीन करने से अच्छा है कि पूरी जानकारी ले लो!”
[एक छोटी सी नोट: ये केस तो खत्म हो गया, लेकिन सवाल बाकी हैं। क्या आपको लगता है कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों को भी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए? कमेंट में बताइए!]
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Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com