ट्रंप की नीतियों ने भारत-अमेरिका रिश्तों को क्यों धकेला 50 साल पीछे? पूरा विवरण समझिए
अरे भाई, क्या आपने सुना? डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से वही किया जिसके लिए वो मशहूर हैं – अचानक ऐलान कर दिया कि भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया जाएगा। सच कहूं तो ये सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि ये तो ऐसा है जैसे पुराने ज़ख्मों को फिर से खुरच दिया हो। 1971 के युद्ध की बात याद आती है न? जब अमेरिका ने पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया था। वैसा ही एक डरावना डीजा वु फील हो रहा है।
पूरा मामला: 1971 से आज तक का सफर
देखिए, 1971 वाली घटना तो हमारे देश के इतिहास में काली स्याही से लिखी गई है। उस वक्त निक्सन ने जो किया, वो तो सीधे-सीधे धोखा था। पाकिस्तान को हथियार दिए, भारत के खिलाफ। और अब? ट्रंप साहब उसी रास्ते पर चल पड़े हैं। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान के साथ उनकी जो ‘दोस्ती’ बढ़ी है, वो तो हम सब देख ही रहे हैं। सच पूछो तो ये सिर्फ टैरिफ का मामला नहीं, सुरक्षा की चिंता भी है।
ट्रंप का नया टैरिफ फैसला: क्या है असल में?
अब ये नया नाटक क्या है? 25% टैरिफ! मतलब साफ है – भारतीय सामान अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। हमारी सरकार तो इसे ‘एकतरफा’ कह रही है, पर अमेरिकी प्रतिनिधि कहते हैं कि ये उनके ‘हित’ में है। पर सच्चाई? ये फैसला दोनों तरफ के लोगों को चोट पहुंचाएगा। भारतीय उद्योग तो प्रभावित होंगे ही, अमेरिकी consumers को भी जेब ढीली करनी पड़ेगी। क्या यही है ‘अमेरिका फर्स्ट’ का मतलब?
किसने क्या कहा? सरकार से लेकर एक्सपर्ट्स तक
हमारी सरकार ने तो साफ कह दिया – “ये गलत है, हम जवाब देंगे।” विपक्ष वालों ने मौका देखकर सरकार पर हमला बोल दिया। पर असली बात तो एक्सपर्ट्स कह रहे हैं। उनका मानना है कि ट्रंप की ये चाल हमारे रिश्तों को सचमुच 50 साल पीछे धकेल रही है। डर तो इस बात का है कि कहीं ये नया ट्रेंड न बन जाए!
अब आगे क्या? 5 संभावित रास्ते
तो अब सवाल यह है कि हम क्या कर सकते हैं? कुछ विकल्प दिमाग में आते हैं:
1. WTO में केस करना (पर प्रक्रिया लंबी है)
2. खुद भी अमेरिकी सामान पर टैरिफ लगाना (आंख के बदले आंख?)
3. नए व्यापार समझौतों की बातचीत (पर ट्रंप तो बातचीत में यकीन नहीं रखते)
4. दूसरे बाजारों की तलाश (चीन की तरह)
5. सबसे डरावना विकल्प – अगर ट्रंप 2024 में फिर जीत गए तो?
ईमानदारी से कहूं तो ये ट्रंप का ये कदम बिल्कुल अच्छा संकेत नहीं है। ये सिर्फ पैसे का मामला नहीं, बल्कि हमारे गौरव का सवाल है। देखते हैं कि ये नया संकट हम कैसे सुलझाते हैं। एक बात तो तय है – अबकी बार भारत 1971 वाली गलती दोहराने वाला नहीं है!
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1. ट्रंप की वो कौन-सी चालें थीं जिनसे भारत को दिक्कत हुई?
असल में देखा जाए तो ट्रंप ने H-1B वीज़ा पर जो restrictions लगाईं, वो तो हमारे IT professionals के लिए सपने तोड़ने जैसी थी। साथ ही trade tariffs और Pakistan को लेकर उनका वो ‘ढुलमुल’ रवैया… ये सब मिलकर रिश्तों में खटास लाने के लिए काफी था। और हां, exporters का तो बुरा हाल हो गया था – सच कहूं तो!
2. क्या ट्रंप के कारण भारत-अमेरिका trade को नुकसान पहुंचा?
बिल्कुल! याद है वो मामला जब ट्रंप ने ‘trade deficit’ का राग अलापते हुए हमारे steel और aluminum पर extra tariffs ठोक दिए? एकदम बेमतलब की बात थी। हालांकि, बाद में थोड़ा समझौता भी हुआ – पर वो तो वैसे ही जैसे झगड़े के बाद रिश्तेदारों का मनाना होता है। Limited trade deal पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन क्या वाकई कुछ हासिल हुआ? शक की नज़र से देखता हूं।
3. Pakistan को लेकर ट्रंप का रवैया कैसा था?
अरे भई, शुरू-शुरू में तो ट्रंप साहब Pakistan को ‘terrorism के खिलाफ partner’ बता रहे थे – जैसे कोई बड़ा मजाक हो! भारत की तो बस इतनी समझ में आया कि हमारे security concerns को तो उन्होंने पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया। बाद में थोड़ा पैसा काटा उन्होंने Pakistan का, पर पहला impression तो खराब हो चुका था न?
4. क्या ट्रंप और मोदी की ‘दोस्ती’ भी ठंडी पड़ गई थी?
देखिए, शुरुआत तो बहुत धमाकेदार थी – ‘Howdy Modi’ event याद है न? लेकिन फिर… Kashmir और CAA पर ट्रंप के वो unnecessary comments आ गए। ऐसा लगा जैसे दोस्त के घर जाकर उसके परिवार की बुराई करने लगे। हालांकि, public में तो दोनों ने एक-दूसरे को संभाला – राजनीति है भाई, यहां दिखावा तो चलता ही है।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com