IAF के 8 जांबाज पायलटों ने जटायु पर पहली उड़ान भरी – कहानी एक क्रांति की!
दोस्तों, क्या आप जानते हैं मार्च 1963 में IAF ने क्या ऐतिहासिक काम किया था? 8 हिम्मती पायलटों ने मिग-21 ‘जटायु’ पर पहली बार उड़ान भरी थी। बस इतना ही नहीं – ये लोग रूस से सिर्फ विमान उड़ाना ही नहीं सीखकर आए थे, बल्कि इसके हथियार सिस्टम बनाने और मेंटेन करने का भी पूरा गुर सीखकर आए थे। सोचिए, ये कोई मामूली बात थी? बिल्कुल नहीं!
जब भारत ने ली थी ‘सुपरपावर’ बनने की पहली ठोकर
1963… ये साल IAF के लिए क्या, पूरे देश के लिए खास था। हमने अपना पहला मिग-21 स्क्वाड्रन बनाया था – जो उस वक्त दुनिया का सबसे एडवांस्ड फाइटर प्लेन था। मजे की बात ये कि हमारे इन 8 पायलटों को रूस भेजा गया था, जहां उन्होंने सिर्फ उड़ान भरना ही नहीं सीखा, बल्कि इसके हथियार सिस्टम की A से Z तक की ट्रेनिंग ली। एक तरह से देखें तो ये भारत के लिए ‘आत्मनिर्भरता’ की पहली सीढ़ी थी।
ट्रेनिंग के वो दिन – जब सीखा था असली ‘टॉप गन’ वाला गुर
इस टीम में एयर मार्शल एस. रागवेंद्र और एयर कमोडोर हरजीत सिंह जैसे दिग्गज शामिल थे। रूस में इन्हें क्या-क्या नहीं सिखाया गया – मिग-21 की सुपरसोनिक स्पीड से लेकर मिसाइल सिस्टम तक, एयर-टू-एयर कॉम्बैट की बारीकियां तक। पर असली बात ये थी कि ये सिर्फ ‘फ्लाइंग’ नहीं, ‘टेक्नोलॉजी समझने’ की ट्रेनिंग थी। मतलब साफ था – हमें विमान चलाने वाले नहीं, विमान समझने वाले पायलट चाहिए थे!
जब मिग-21 बना हमारी ‘आंख का तारा’
इस ट्रेनिंग के बाद तो मिग-21 हमारी वायुसेना की ‘आंख का तारा’ बन गया। एक वायुसेना प्रमुख ने तो सही कहा था – “ये ट्रेनिंग हमारे लिए गेम-चेंजर साबित हुई।” सच भी था – मिग-21 ने हमें वो ताकत दी जिसकी हमें सख्त जरूरत थी। एक पायलट ने तो बताया था – “रूस में सीखी गई हर बात हमारे काम आई… चाहे वो विमान उड़ाना हो या उसकी तकनीक समझना।”
आज के जमाने में इसका क्या मतलब?
अब हम मिग-21 को रिटायर कर रहे हैं, ये सच है। लेकिन 1963 की ये ट्रेनिंग हमारे लिए वो नींव बनी जिस पर आज राफेल और तेजस जैसे विमान खड़े हैं। सीख क्या मिलती है? ये कि अच्छी ट्रेनिंग और तकनीकी ज्ञान किसी भी सेना की असली ताकत होती है। और हां… ये कहानी हमें याद दिलाती है कि हमारे पायलट सिर्फ उड़ान भरना नहीं जानते – वो तकनीक के जादूगर भी होते हैं!
क्या आपको लगता है आज के पायलटों को भी इस तरह की गहन ट्रेनिंग मिल रही है? कमेंट में बताइएगा जरूर!
IAF के 8 पायलटों ने Jatayu पर मारी पहली उड़ान – जानिए सबकुछ!
1. Jatayu aircraft आखिर है क्या चीज़? और IAF के लिए इसका क्या मतलब है?
देखिए, Jatayu कोई आम ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट नहीं है। असल में यह एक advanced training aircraft है जो हमारे पायलटों को modern warfare की असली मारकाट सिखाता है। सोचिए, कितना अलग होगा जब आप सिर्फ किताबी ज्ञान की जगह real-life combat scenarios में हथियार चलाने का मौका पाएं? बिल्कुल वैसा ही यहाँ हो रहा है। और यही वजह है कि IAF के लिए यह इतना खास है।
2. इन 8 पायलटों ने Jatayu पर क्या-क्या सीखा? और ट्रेनिंग कितनी लंबी थी?
अरे भाई, ये कोई रट्टा तो नहीं था! इन पायलटों ने सीखा advanced weapon manufacturing, मिसाइल सिस्टम्स को हैंडल करना, और modern combat के नए-नए तरीके। ट्रेनिंग? कुछ हफ्तों की थी, पर इतनी intensive कि theory से लेकर practical तक सब कुछ cover हुआ। एक तरफ क्लासरूम, दूसरी तरफ एक्शन – दोनों का बेहतरीन मेल।
3. सवाल तो यह भी है कि Jatayu भारत में बना है या बाहर से मंगाया गया है?
अच्छा सवाल पूछा! गर्व से कहूं तो Jatayu पूरी तरह से indigenous है। DRDO और HAL की जोड़ी ने इसे बनाया है। Make in India का असली नमूना है यह। हमारे देश में बना, हमारे लोगों ने डिजाइन किया – क्या बात है न?
4. यह ट्रेनिंग प्रोग्राम IAF के भविष्य के operations को कैसे बदलेगा?
ईमानदारी से कहूं तो यह game-changer साबित होगा। हमारे पायलटों को modern warfare की गहरी समझ मिलेगी। सोचिए, जब ये ट्रेंड पायलट असली मिशन पर जाएंगे तो कितना effective होंगे? भारत की air defense तो और भी मजबूत होगी ही। एक तरह से देखें तो यह हमारी सुरक्षा का नया चैप्टर है। सच में।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

