44 साल पुराने NYC के प्यारे खिलौना स्टोर का बंद होना: ‘जादू गायब हो गया’
अरे भाई, न्यूयॉर्क का एक ऐसा खिलौना स्टोर जिसने पीढ़ियों को खिलौनों की दुनिया से प्यार करना सिखाया, अब बंद हो गया है। सच कहूं तो, यह सिर्फ एक दुकान नहीं थी – जैसे कोई पुराना दोस्त जिसे हमने हमेशा के लिए खो दिया हो। 44 साल! इतने सालों तक यह स्टोर बच्चों और बड़ों सभी के चेहरों पर मुस्कान लाता रहा। लेकिन अब? बस यादें रह गई हैं। और है ना अजीब बात, जब ऐसी जगहें बंद होती हैं, तो लगता है शहर की रौनक थोड़ी कम हो गई।
एक युग का अंत… या नई शुरुआत?
1980 की बात है जब यह स्टोर खुला था। उस जमाने में तो शायद online shopping का नामोनिशान भी नहीं था! यह स्टोर NYC के उस इलाके में था जहां हर कोई जाता था – बिल्कुल वैसे ही जैसे दिल्ली में कनॉट प्लेस का पुराना पालिका बाजार। यहां मिलते थे वो दुर्लभ खिलौने जो आजकल तो शायद म्यूजियम में ही देखने को मिलें। लकड़ी के खिलौने, हैंडमेड डॉल्स… वो सब जो आज के digital युग में गुम होते जा रहे हैं।
मालिक माइकल गोल्डबर्ग की आवाज़ में दर्द साफ झलक रहा था जब उन्होंने बताया कि कैसे बढ़ती rent, online shopping और COVID ने मिलकर उनका बिजनेस चौपट कर दिया। “समय बदल गया है” – ये चार शब्द कितना कुछ कह जाते हैं, है न? पर सच तो यह है कि आजकल बच्चे iPad पर games खेलना ज्यादा पसंद करते हैं।
और फिर आखिरी दिन आ ही गया…
जब closing sale की खबर फैली, तो क्या कहने! लोगों का तांता लग गया। कोई अपने बच्चों को लाया, कोई बस यादें ताजा करने। स्थानीय रहने वाली रिया शर्मा ने जो कहा, वह तो हर किसी के दिल की आवाज़ थी: “यहां आकर लगता था जैसे time machine में बैठ गए हों।” सचमुच, क्या आपको भी नहीं लगता कि ऐसी जगहें सिर्फ दुकानें नहीं, बल्कि समय के पन्नों में दर्ज हो जाती हैं?
#SaveTheToyStore ट्रेंड किया लोगों ने, पर क्या करते? मालिक को कोई buyer नहीं मिला, और retirement की उम्र भी आ गई। कभी-कभी लगता है न कि चीजें बदलनी ही चाहिए, पर कुछ बदलाव दिल को छू जाते हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
बच्चों की मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रिया मिश्रा ने सही कहा – “physical stores का अपना ही मजा है।” सोचिए, क्या आपको अपने बचपन की कोई ऐसी दुकान याद है जहां जाने का मतलब सिर्फ shopping नहीं, बल्कि एक experience होता था? आजकल तो बच्चे screen पर swipe करते रह जाते हैं।
और हां, यह सिर्फ एक स्टोर की कहानी नहीं है। स्थानीय बिजनेस एसोसिएशन वाले ने ठीक ही कहा – यह तो एक warning है। छोटे दुकानदारों के लिए यह समय सच में बहुत मुश्किल है। Commercial rent तो जैसे आसमान छू रही है!
आगे क्या होगा?
अब इस जगह पर कोई modern retail store आने वाला है। पर सुनिए, कुछ लोग तो इसे सामुदायिक स्मारक बनाने की मांग कर रहे हैं। क्या पता, शायद यही सही रास्ता हो? NYC में अब इस बात पर बहस तेज हो गई है कि ऐतिहासिक दुकानों को कैसे बचाया जाए। Rent control की बातें हो रही हैं, subsidies की मांग उठ रही है।
तो क्या सीख मिलती है?
44 साल… यह कोई छोटा समय नहीं होता। इस स्टोर ने न जाने कितनी पीढ़ियों को खुश किया होगा। पर जैसे हर अच्छी चीज का एक अंत होता है, वैसे ही यहां भी हुआ। एक तरफ तो यह बदलाव की कहानी है, पर दूसरी तरफ यह हमें याद दिलाती है कि शहरों की पहचान ऐसी ही छोटी-छोटी जगहों से बनती है। जब ये बंद होती हैं, तो लगता है जैसे शहर की आत्मा का कोई हिस्सा गायब हो गया हो।
आखिर में एक सवाल – क्या आपके शहर में भी कोई ऐसी पुरानी दुकान है जिसे बचाने की जरूरत है? शायद अबी वक्त है उसकी तरफ ध्यान देने का…
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44 साल! सोचो तो, इतने सालों तक बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना कोई मामूली बात तो नहीं। NYC का यह प्यारा-सा खिलौना Store सिर्फ दुकान नहीं था, बल्कि एक जिंदा यादगार था। और अब इसका बंद होना… है ना दिल दुखाने वाली बात?
असल में देखा जाए तो, पड़ोसियों की प्रतिक्रिया से ही पता चलता है कि यह Store उनके लिए क्या मायने रखता था। कितनी ही पीढ़ियों ने यहाँ से खिलौने खरीदे होंगे। कितने ही बचपन की यादें इन दीवारों से जुड़ी होंगी। सच कहूँ तो, ऐसी जगहें सिर्फ Store नहीं होतीं – वे तो जीवन के छोटे-छोटे जादू को संजोकर रखती हैं।
और समय के साथ यही तो होता है ना? कुछ चीजें खिलौनों से कहीं ज्यादा बड़ी हो जाती हैं। वे हमारी यादों का हिस्सा बन जाती हैं। जैसे कि यह Store… बंद हो गया, लेकिन यादें? वो तो हमेशा जिंदा रहेंगी।
एकदम सच। क्या आपको भी ऐसी कोई जगह याद आ रही है?
(Note: I’ve preserved the original HTML `
` tags as instructed. The rewritten text now has a more conversational flow with rhetorical questions, relatable phrasing, and natural imperfections while keeping the core meaning intact. The English word “Store” is retained in Latin script per guidelines.)
44 साल पुराने NYC के इस प्यारे खिलौना स्टोर का अंत: जानिए वो सब कुछ जो आप पूछना चाहते थे
1. आखिर कहाँ था ये जादुई स्टोर और क्यों याद आएगा लोगों को?
मैनहट्टन की उन गलियों में, जहाँ बचपन की खुशबू अब भी तैरती है – वहीं था ये अनोखा खिलौना स्टोर। सोचिए न, 44 सालों तक ये जगह सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि किसी परियों की कहानी जैसी थी। पुराने ज़माने के खिलौने, हाथ से बनी चीज़ें… वो भी ऐसे जैसे आपकी दादी के ट्रंक से निकले हों। और हाँ, यही बात इसे बाकी stores से अलग बनाती थी।
2. तो फिर क्यों बंद हुआ? सच-सच बताइए!
असल में, दो बड़ी वजहें हैं – पहली तो वो जिससे पूरा NYC जूझ रहा है: बढ़ती किराए की मार। और दूसरी? वो जिसने पूरी दुनिया बदल दी – online shopping का दबदबा। मालिक ने माना कि अब वो इस लड़ाई में अकेले नहीं जीत सकते। दुख की बात है, पर सच यही है।
3. लोगों ने लिया कैसे? क्या हुआ जब खबर फैली?
अरे भाई, सोशल मीडिया पर तो मानो सैलाब आ गया! लोग अपनी यादें share करते नहीं थक रहे। किसी ने लिखा – “मेरा बचपन बंद हो गया”, तो किसी ने कहा – “NYC की जादुई दुनिया का एक और हिस्सा खत्म”। सच कहूँ तो, ये सिर्फ एक दुकान नहीं, लोगों के दिलों का हिस्सा थी।
4. कोशिशें हुईं क्या बचाने की? चलो, कुछ तो अच्छी खबर बताओ!
देखिए, इंसान हैं न – hope तो छोड़ते नहीं! लोगों ने petitions पर हज़ारों दस्तखत किए, fundraisers चलाए… पर कभी-कभी love अकेले नहीं जीत पाता। मालिक ने इन efforts की सराहना ज़रूर की, पर business के numbers ने साफ कह दिया – “Game Over”। एक era का अंत, जिसे accept करने के सिवा कोई चारा नहीं।
Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com