भारत का ₹2 ट्रिलियन पनीर बाजार: नकली पनीर से जंग की कहानी
अरे भाई, भारत में पनीर की दीवानगी अब सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं रही! आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारा पनीर बाजार रॉकेट की तरह उछल रहा है – और 2033 तक ₹2 ट्रिलियन का आंकड़ा छूने वाला है। सोचिए, ये सब क्यों हो रहा है? असल में, जिम जाने वालों से लेकर शाकाहारी लोगों तक, सबको पनीर से प्यार हो गया है। Protein का सस्ता और टेस्टी सोर्स मिल जाए तो भला कौन नहीं खाएगा? लेकिन यहां एक बड़ा ‘लेकिन’ है – बाजार में नकली पनीर का काला सच। Amul, Mother Dairy जैसी बड़ी कंपनियां तो ब्रांडेड पनीर बेच रही हैं, मगर स्थानीय दुकानों पर मिलने वाला सस्ता पनीर कितना सच्चा है? यही सवाल सबसे बड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि: क्यों फैल रहा है नकली पनीर?
पिछले 10 सालों में तो पनीर ने भारत में धमाल मचा दिया है। शहर हो या गांव, हर जगह लोग इसके दीवाने हो रहे हैं। पर एक मजेदार बात – करीब 70% मार्केट अभी भी उन छोटे-छोटे दुकानदारों के हाथ में है जिनके पास कोई ब्रांड नहीं। और यहीं शुरू होती है समस्या। क्या आप जानते हैं कि इनमें से कई दुकानें सिंथेटिक चीजों से बना पनीर बेच रही हैं? स्टार्च, केमिकल्स और भगवान जाने क्या-क्या! स्वाद तो खराब होता ही है, सेहत के साथ खिलवाड़ तो बिल्कुल नहीं चलेगा न?
ब्रांडेड कंपनियों की मुश्किलें: सस्ते के आगे कैसे टिकें?
देखिए, Amul और Mother Dairy जैसी कंपनियां तो अपना पूरा जोर लगा रही हैं। उनका कहना है कि ब्रांडेड पनीर सुरक्षित और बेहतर है – जो बिल्कुल सही भी है। पर समस्या ये है कि जब कोई ग्राहक 100 रुपये वाले असली पनीर और 40 रुपये वाले नकली पनीर के बीच चुनाव करेगा, तो क्या चुनेगा? FSSAI वाले तो छापे मार-मारकर थक गए हैं। पिछले कुछ महीनों में कितनी ही जगहों से नकली पनीर की खेप पकड़ी गई। लेकिन सच तो ये है कि अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। सख्त कार्रवाई के बिना ये समस्या खत्म होने वाली नहीं।
हम उपभोक्ताओं की क्या भूमिका है?
अब सवाल ये उठता है कि हम आम लोग क्या कर सकते हैं? सोशल मीडिया पर तो कई NGOs जागरूकता फैला रहे हैं। Amul के एक अधिकारी ने सही कहा – “सस्ते के चक्कर में सेहत से समझौता?” बिल्कुल नहीं! पर एक कड़वा सच ये भी है कि ब्रांडेड पनीर की कीमतें कई लोगों की पहुंच से बाहर हैं। ऐसे में क्या विकल्प है? शायद हमें थोड़ा और सचेत होने की जरूरत है। थोड़ा ज्यादा पैसा खर्च करके अच्छी क्वालिटी का पनीर लेना ही बेहतर है।
आगे का रास्ता: क्या हो सकता है समाधान?
तो फिर क्या उम्मीद करें? पहली बात तो ये कि ब्रांडेड कंपनियों को कीमतें थोड़ी कम करनी होंगी। दूसरा, FSSAI को और सख्त नियम बनाने होंगे। और सबसे मजेदार बात – अब तो QR कोड वाले पनीर भी आने लगे हैं! टेक्नोलॉजी की मदद से असली-नकली की पहचान आसान होगी। अगर ये सब ठीक से हो जाए, तो भारत का डेयरी सेक्टर वाकई नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
आखिर में बस इतना कहूंगा – थोड़ी सी जागरूकता हम सभी को सुरक्षित रख सकती है। सस्ते के चक्कर में न पड़ें, क्वालिटी पर ध्यान दें। क्योंकि सेहत से बढ़कर कुछ नहीं, है न?
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भारत का ₹2 ट्रिलियन पनीर बाजार: नकली पनीर से जंग – और आप क्या जानना चाहते हैं?
अरे भाई, पनीर तो हम सबकी जान है ना? पर आजकल बाजार में असली की जगह नकली चीजें इतनी बढ़ गई हैं कि समझना मुश्किल हो गया है। तो चलिए, इसी बारे में बात करते हैं – बिना किसी झमेले के, सीधे-साधे तरीके से!
1. नकली पनीर क्या है? और आप इसे कैसे पकड़ सकते हैं?
देखिए, असली पनीर तो दूध से बनता है, लेकिन नकली वाले में? उसमें डाल देते हैं स्टार्च, वनस्पति तेल, और न जाने क्या-क्या! ऐसा लगता है जैसे किसी केमिस्ट की लैब से निकला हो। अब सवाल यह है कि इसे कैसे पहचानें? आसान है – अगर पनीर पानी में घुल जाए या जलाने पर प्लास्टिक जैसी बदबू आए, तो समझ जाइए… ये नकली है। सच कहूं तो, ये ट्रिक्स मेरी दादी ने सिखाई थी!
2. नकली पनीर खाने से क्या होता है? सच-सच बताओ!
भई, ये सिर्फ स्वाद ही नहीं बिगाड़ता, सेहत का भी दुश्मन है। एक तरफ तो ये digestion को खराब करता है, वहीं दूसरी तरफ long-term में allergies और organ damage तक का खतरा हो सकता है। और तो और, कभी-कभी तो food poisoning जैसी समस्या भी हो जाती है। सोचिए, पनीर खाएं या जहर? मजाक नहीं कर रहा हूं!
3. असली vs नकली पनीर: कीमत में कितना फर्क?
असली पनीर की बात करें तो ₹300-400/kg तक का खर्चा आता है। लेकिन नकली? वो मिल जाएगा ₹150-250/kg में। अब आप ही बताइए, इतना सस्ता कैसे हो सकता है? जैसे कहते हैं न – “सस्ता रोए बार, महंगा रोए एक बार!” तो अगली बार बहुत सस्ता पनीर देखकर थोड़ा सावधान हो जाइएगा।
4. FSSAI क्या कर रहा है इस मामले में?
अच्छी बात पूछी! FSSAI ने कमर कस ली है। surprise raids, strict quality checks, और heavy penalties का पूरा system बना दिया है। साथ ही, हम जैसे consumers को educate करने के लिए awareness campaigns भी चला रहे हैं। पर सच तो ये है कि सरकार के साथ-साथ हमें भी सतर्क रहना होगा। क्योंकि जागरूक consumer ही सबसे बड़ा सुपरहीरो है!
तो कैसा लगा आपको ये जानकारी? कोई सवाल हो तो पूछिएगा जरूर। और हां, अगली बार पनीर खरीदते वक्त ये tips जरूर याद रखिएगा। सेहत से बढ़कर कुछ नहीं, है न?
Source: Livemint – Industry | Secondary News Source: Pulsivic.com