भारत में सोने की मांग ने तोड़ा 11 महीने का रिकॉर्ड! क्या यह हमारी अर्थव्यवस्था की असली ताकत दिखाता है?
अरे वाह! ये खबर तो वाकई उम्मीद जगाने वाली है। विश्व सोना परिषद (WGC) के नए आंकड़े देखिए – भारत में सोने की मांग ने पिछले 11 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। और ये सब उस वक्त हो रहा है जब चीन और अमेरिका के बीच टैरिफ वॉर चल रहा है, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है। लेकिन हमारा भारत? वो तो जैसे अपनी ही धुन में मस्त है! जुलाई में सर्विस PMI 60.5 पर पहुंच गया – और याद रखिए, 50 से ऊपर का आंकड़ा मतलब ग्रोथ का संकेत। बस, समझ लीजिए कि हालात कितने अच्छे हैं।
दुनिया भर में तूफान, पर भारत का क्या?
देखिए ना, चीन-अमेरिका का झगड़ा तो जैसे पूरी दुनिया को हिला रहा है। लेकिन हमारे देश ने तो इस मुश्किल वक्त में भी साबित कर दिया कि हमारी अर्थव्यवस्था की जड़ें कितनी मजबूत हैं। सोना? अरे भई, भारतीयों के लिए तो ये सिर्फ एक निवेश नहीं, एक भावना है। जब सोने की मांग बढ़ती है, तो इसका मतलब साफ है – लोगों को अर्थव्यवस्था पर भरोसा है। और ये भरोसा ही तो असली पूंजी होती है, है न?
सर्विस सेक्टर के आंकड़े तो और भी दिलचस्प हैं। IT हो या hospitality, बैंकिंग हो या दूसरे सेवा क्षेत्र – सबने जुलाई में शानदार प्रदर्शन किया। और रुपया? वो भी डॉलर के मुकाबले स्थिर रहा। ये सब मिलकर क्या संकेत देता है? शायद यही कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. राजीव मेहरा का कहना है, “ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में लचीलापन है।” सच कहूं तो, ये बात तो हर कोई मान रहा है। वित्त मंत्रालय इसे सरकार की नीतियों का नतीजा बता रहा है, तो FICCI जैसे उद्योग संगठनों का कहना है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पर असल सवाल ये है कि क्या हम इस गति को बनाए रख पाएंगे?
आगे का रास्ता: मौके और चुनौतियां
अगर वैश्विक हालात ऐसे ही रहे, तो सोने की मांग बनी रह सकती है। IT और tourism सेक्टर से तो और भी अच्छी खबरें आने की उम्मीद है। लेकिन यहां सरकार की भूमिका बेहद अहम होगी – नीतियों में स्थिरता बनाए रखनी होगी, FDI को आकर्षित करना होगा। थोड़ा सा भी लापरवाही और… आप समझ गए न?
तो कुल मिलाकर? स्थिति अच्छी है, बहुत अच्छी। पर याद रखिए, अर्थव्यवस्था कोई क्रिकेट मैच नहीं जहां आप विजय रथ पर सवार हो जाएं। ये तो एक लंबी दौड़ है, जहां हर कदम सोच-समझकर उठाना पड़ता है। फिलहाल तो हम सही दिशा में दौड़ रहे हैं – बस यही जारी रखना है!
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सोने की बढ़ती मांग और टैरिफ वॉर – क्या जानना चाहिए?
1. भारत में सोने की मांग अचानक आसमान क्यों छू रही है?
देखिए, यह कोई एक वजह से नहीं हो रहा। असल में, जब भी महंगाई (inflation) बढ़ती है, लोगों को लगता है कि सोना ही एकमात्र ऐसी चीज़ है जो उनके पैसे को सुरक्षित रखेगी। वैसे भी, अभी शादियों का सीज़न चल रहा है ना? और फिर जो निवेशक (investors) हैं, वो तो पहले से ही सोने को ‘safe-haven asset’ मानते आए हैं। सच कहूं तो, टैरिफ वॉर ने तो जैसे आग में घी का काम किया है – global markets में जो अनिश्चितता फैली है, उसने सोने की डिमांड को और भी बढ़ा दिया है।
2. टैरिफ वॉर – सोने की कीमतों पर क्या गाज गिरा रहा है?
अरे भई, जब दो देश आपस में टैरिफ वॉर में उलझ जाते हैं, तो पूरी दुनिया के markets हिल जाते हैं। और जब markets हिलते हैं, तो निवेशक कहाँ जाते हैं? सोने की तरफ भागते हैं! क्योंकि यही तो वो चीज़ है जो हमेशा से सुरक्षित मानी जाती रही है। यही कारण है कि demand के साथ-साथ price भी बढ़ रही है। और हां, भारत भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ भी वही ट्रेंड चल रहा है।
3. क्या अभी सोना खरीदना समझदारी होगी?
ईमानदारी से कहूं तो, यह आपके नज़रिए पर निर्भर करता है। अगर आप long-term investment की सोच रहे हैं, तो हाँ, सोना अभी भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन… और यह एक बड़ा लेकिन है… short-term में तो कीमतें उतार-चढ़ाव भरी रहेंगी। मेरी सलाह? Market trends पर नज़र रखें, कुछ expert advice लें, और फिर निर्णय लें। वैसे भी, निवेश हमेशा जोखिम के साथ आता है, है ना?
4. सोने की इस दीवानगी का हमारी अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
एक तरफ तो यह चिंता की बात है – क्योंकि ज्यादा सोना मतलब ज्यादा import, और ज्यादा import मतलब trade deficit (व्यापार घाटा) बढ़ने का खतरा। लेकिन दूसरी तरफ, jewellery sector और gold-related businesses के लिए तो यह मानो स्वर्ग से वरदान जैसा है। सच पूछो तो, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। और यहाँ भी वही बात लागू होती है।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

