** “ट्रंप के टैरिफ ऐलान पर भारत सरकार का जवाब: ‘देश के हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे'”

ट्रंप का टैरिफ ऐलान: भारत सरकार ने क्या कहा? ‘हम अपने हितों की खातिर कुछ भी करेंगे!’

अरे भई, फिर शुरू हो गया न? डोनाल्ड ट्रंप साहब ने एक बार फिर भारतीय सामानों पर नए टैरिफ की बात छेड़ दी है। और सच कहूं तो, इस बार भारत सरकार की प्रतिक्रिया में कोई ढिलाई नहीं दिखी। साफ-साफ कह दिया कि हमारे किसानों, छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। बात सिर्फ टैरिफ की नहीं है, असल में यह भारत की आर्थिक आज़ादी का सवाल है। और देखा जाए तो, अंतरराष्ट्रीय मंच पर हमारी स्थिति पहले से कहीं मजबूत है।

पूरा माजरा क्या है?

तो सुनिए, ट्रंप ने यह बयान किस मौके पर दिया? एक चुनावी रैली में! मतलब साफ है – अमेरिकी वोटरों को खुश करने की कोशिश। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ। 2019 में भी तो यही नाटक हुआ था न? उस समय भारत ने 28 अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाकर अपनी ताकत दिखाई थी। एक तरफ तो अमेरिका हमारा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है, लेकिन दूसरी तरफ ये टैरिफ का खेल बार-बार खेला जा रहा है। थोड़ा तो अजीब लगता है, है न?

अब क्या होगा? सरकार ने क्या कदम उठाए?

सरकार इस बार भी नींद में नहीं है। ट्रंप के बयान के ठीक बाद वाणिज्य मंत्रालय ने तुरंत बैठक बुला ली। और बात सिर्फ बैठक की नहीं – असल चिंता तो उन छोटे-मझोले उद्योगों की है जो अमेरिका को कपड़े, दवाइयां और हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट करते हैं। CII जैसे संगठन तो शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, लेकिन सच तो यह है कि अगर अमेरिका ने टैरिफ लगा दिए तो हमारे पास भी तो कुछ तो जवाबी कार्रवाई के विकल्प हैं न?

राजनीति और अर्थव्यवस्था – दोनों में हलचल

अब जरा राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखिए। विपक्ष तो मौके की ताक में ही बैठा है – “सरकार अमेरिका के आगे झुक रही है” वाली रट लगा रहा है। लेकिन असल मुद्दा यह है कि किसानों को क्या होगा? बासमती चावल और मसालों का क्या होगा जो अमेरिका जाते हैं? मेरे एक किसान दोस्त ने तो कल ही कहा था – “भैया, हमारी फसल का दाम तो पहले से ही कम है, अब अगर एक्सपोर्ट भी रुक गया तो…” बात पूरी भी नहीं की, लेकिन समझ तो गए न आप?

आगे की राह – क्या हो सकता है?

तो अब सवाल यह है कि आगे क्या? मेरे हिसाब से दो ही रास्ते हैं – या तो फिर से वार्ता शुरू होगी, या फिर हम भी जवाबी टैरिफ लगाएंगे। पर एक बात तो तय है – अगर यह तनाव बढ़ा तो सिर्फ भारत-अमेरिका ही नहीं, पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी। और हां, एक बात और – भारत अब वह देश नहीं रहा जो आंख मूंदकर दूसरों की बात मान ले। यह नई भारत की नई आर्थिक सोच है। थोड़ा तो गर्व होता है, है न?

अंत में बस इतना ही – यह टैरिफ का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। लेकिन एक बात पक्की है कि भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। चाहे जो हो जाए। और यही तो असली आर्थिक संप्रभुता है, है न?

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ट्रंप का टैरिफ ऐलान और भारत की चिंता – जानिए पूरा मामला

अरे भाई, ट्रंप साहब फिर से सुर्खियों में हैं! उन्होंने हाल ही में कुछ नए टैरिफ लगाने की घोषणा की है, और इसमें हमारा भारत भी निशाने पर है। सवाल यह है कि यह हमारे देश को कैसे प्रभावित करेगा? चलिए, बिना किसी जटिल भाषा के समझते हैं पूरा मामला।

1. क्या सच में भारत के exports को खतरा है?

देखिए, सीधी बात यह है कि steel और aluminum सेक्टर तो इससे सीधे प्रभावित होंगे ही। पर सरकार ने साफ कहा है – “हम चुप नहीं बैठेंगे!” WTO में शिकायत दर्ज करना हो या फिर counter-tariffs लगाना, हर विकल्प टेबल पर है। मजे की बात यह कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है। 2018 में भी ऐसी ही नौटंकी हुई थी, याद है?

2. सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?

असल में, मोदी सरकार ने इस मामले को हल्के में नहीं लिया है। अमेरिका के साथ बातचीत तो जारी है ही, साथ ही हमारी domestic industries को संभालने के लिए कुछ राहत उपाय भी घोषित किए गए हैं। पर सच कहूं? यह सिर्फ शुरुआत है। आगे और कदम उठाए जा सकते हैं।

3. क्या अमेरिका के साथ trade relations खराब होंगे?

ऐसा लगता तो है। Short term में तनाव तो बढ़ेगा ही – यह तो स्वाभाविक है। लेकिन एक तरफ जहां यह सच है, वहीं दूसरी तरफ experts की राय अलग है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच का long-term trade partnership इतना मजबूत है कि यह झटका सहन कर लेगा। समझौता होने की पूरी संभावना है।

4. हम आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

अब यह सबसे दिलचस्प सवाल है! अगर सरकार counter-tariffs लगाती है (जो कि बहुत संभव है), तो prepare yourself – आपका पसंदीदा iPhone या फिर वह luxury car जिसे आप खरीदने की सोच रहे थे, महंगा हो सकता है। पर घबराइए नहीं, सरकार ने साफ कहा है कि जनता के हित सर्वोपरि हैं। शायद कुछ alternative options पर काम चल रहा हो? कौन जाने!

तो कुल मिलाकर? स्थिति गंभीर है, पर घबराने वाली नहीं। भारत ने पहले भी ऐसी चुनौतियों का सामना किया है। देखते हैं, यह नया अध्याय कैसे लिखा जाता है। आपकी क्या राय है इस पूरे मामले में? कमेंट में जरूर बताइएगा!

Source: Aaj Tak – Home | Secondary News Source: Pulsivic.com

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