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“ऑपरेशन सिंदूर में भारत की चूक? अजीत डोभाल के बयान से खुलासा!”

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ऑपरेशन सिंदूर में भारत की चूक? अजीत डोभाल के बयान से खुलासा!

मज़ा आ गया! भारत के पूर्व NSA अजीत डोभाल ने तो हाल ही में एक ऐसा बम फोड़ दिया है जिससे ऑपरेशन सिंदूर पर फिर से बहस छिड़ गई है। सुनिए, एक प्राइवेट मीटिंग में उन्होंने इशारा किया कि भारत ने इस ऑपरेशन के दौरान अपनी बात दुनिया के सामने रखने में थोड़ी देरी कर दी। और यार, ऐसे मौकों पर तो टाइमिंग ही सब कुछ होती है न? खैर, ये बयान ऐसे वक्त आया है जब भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख़्त छवि बनाने में जुटा हुआ है। दिलचस्प है, है न?

ऑपरेशन सिंदूर: क्या हुआ था असल में?

अरे, पहले थोड़ा बैकग्राउंड तो समझ लेते हैं। ऑपरेशन सिंदूर – कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारत का वो बड़ा ऑपरेशन जो सैन्य और कूटनीतिक, दोनों मोर्चों पर चला था। सैन्य स्तर पर तो हमने धमाकेदार प्रदर्शन किया, ये तो सब जानते हैं। लेकिन… हमेशा एक लेकिन तो होता ही है न? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी कहानी पूरी तरह नहीं पहुँच पाई। हालाँकि हमने आतंकवाद के ठोस सबूत भी दिए, पर कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया और देशों ने इसे ‘लेट रिस्पॉन्स’ बताया। और हैरानी की बात ये कि उस वक्त खुद अजीत डोभाल ही NSA थे! तो अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई कोई चूक हुई थी?

डोभाल का बयान: गेम चेंजर?

अब ये नया ट्विस्ट सुनिए! डोभाल साहब ने एक बंद दरबार में कहा कि “हमें अपने सबूत ज़्यादा तेज़ी से दुनिया के सामने लाने चाहिए थे”। भई ये बयान क्यों अहम है? क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर पर पहली बार किसी ने सवाल उठाए हैं। सच कहूँ तो, ये बयान थोड़ा डरावना भी है। कई एक्सपर्ट्स तो यहाँ तक कह रहे हैं कि भारत ने “Perception का युद्ध” हार दिया। सोचिए, अगर हम थोड़ा और तेज़ होते, तो शायद अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी ज़्यादा मिलता। पर खैर, हो गया जो हो गया। अब सवाल ये है कि आगे क्या?

रिएक्शन्स: राजनीति से लेकर फौज तक

इस बयान के बाद तो हर तरफ हलचल मच गई है। सरकार चुप्पी साधे हुए है – जो अपने आप में एक मैसेज है। विपक्ष? अरे वो तो मौका मिलते ही हमला बोल दिया! कांग्रेस वालों ने तो सीधे कह दिया कि ये बयान साबित करता है कि सरकार ने गलतियाँ कीं। वहीं फौजी एक्सपर्ट्स की राय थोड़ी अलग है। उनका कहना है कि हाँ, ऑपरेशन मिलिट्री लेवल पर तो शानदार रहा, लेकिन “Information Warfare” में हम पीछे रह गए। और सच कहूँ तो, आज के ज़माने में सिर्फ बंदूकें ही नहीं, मीडिया और कूटनीति भी उतनी ही ज़रूरी हो गई है।

आगे का रास्ता: क्या सीख मिली?

तो अब बड़ा सवाल ये है कि भविष्य में हम क्या करेंगे? एक्सपर्ट्स की मानें तो अब हमें “कूटनीतिक तेजी” दिखानी होगी। साथ ही मीडिया और डिप्लोमेसी पर ज़्यादा ध्यान देना होगा। और हाँ, एक बड़ी सीख ये भी मिली है कि हमें अपनी “Cyber और Information Warfare” क्षमताओं को मज़बूत करना होगा। वरना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Perception War में पिछड़ते रहेंगे।

डोभाल साहब के इस बयान ने न सिर्फ पुराने घाव हरे कर दिए हैं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा नीतियों पर भी नई बहस छेड़ दी है। अब देखना ये है कि क्या हम इन गलतियों से सीख ले पाएंगे? क्या अगली बार और बेहतर कर पाएंगे? वक्त ही बताएगा… लेकिन एक बात तो तय है – अब हमें सिर्फ बंदूकों से ही नहीं, शब्दों से भी लड़ना आना चाहिए!

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ऑपरेशन सिंदूर – जिसमें हमने जीत तो देखी, पर पूरी नहीं?

देखिए, 26/11 Mumbai attacks के बाद भारत का गुस्सा समझा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर हमारी तरफ से एक जवाबी कार्रवाई थी, ये तो स्पष्ट है। लेकिन अजीत डोभाल साहब की मानें तो, हमने कुछ ऐसी गलतियाँ कर दीं जो शायद नहीं होनी चाहिए थीं। Strategic mistakes, जैसा कि उन्होंने कहा। और नतीजा? वो मिला जो हम चाहते थे, उससे थोड़ा कम।

डोभाल का खुलासा: जब इंटेलिजेंस और एक्शन एक साथ नहीं चले

अब यहाँ दिलचस्प बात ये है कि उस वक्त RAW के chief रहे अजीत डोभाल ने क्या बताया। असल में, problem coordination में थी। एक तरफ intelligence थी, दूसरी तरफ execution… और बीच में कहीं न कहीं वो कनेक्शन गायब था जो चीजों को सही दिशा में ले जाता। सच कहूँ तो, ये वही पुरानी कहानी है न – “सब अपने-अपने काम में मस्त, कोई एक दूसरे से बात ही नहीं कर रहा!”

क्या इस फेलियर ने हमारी सुरक्षा को धक्का पहुँचाया?

ईमानदारी से? नहीं। हाँ, operation पूरी तरह successful नहीं रहा, ये सच है। लेकिन ये कोई ऐसी disaster नहीं थी जिससे देश की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ा हो। असल में, हमने इन्हीं गलतियों से सीख ली। और फिर? जैसे हमारी माएँ कहती हैं न – “गिरकर संभलना आना चाहिए।” वही हुआ। Military strategies को improve किया गया।

गलतियों से सीख: भारत ने क्या बदलाव किए?

तो अब सवाल यह है कि हमने इस experience से क्या सीखा? देखिए, सबसे बड़ा सबक तो यही मिला कि intelligence agencies और armed forces को एक ही पेज पर होना चाहिए। बाद के operations में better coordination देखने को मिली। Planning और precise हो गई। मतलब साफ है – एक बार जलने के बाद हमने आग से दूरी बना ली! और यही तो होना चाहिए, है न?

कुल मिलाकर? एक learning experience था। जैसे हमारे यहाँ कहते हैं – “हर failure success की सीढ़ी होती है।” सिंदूर भी वही साबित हुआ।

Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

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