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“SCO मीटिंग में भारत ने संयुक्त बयान पर क्यों नहीं किया साइन? जयशंकर ने बताई बड़ी वजह”

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SCO मीटिंग में भारत ने संयुक्त बयान पर साइन क्यों नहीं किया? जयशंकर ने बताई असली वजह

अरे भाई, क्या आपने SCO वाली खबर देखी? हाल ही में हुई इस बैठक में भारत ने एक बड़ा फैसला लिया – संयुक्त बयान पर साइन करने से मना कर दिया! और देखिए न, ये मामला तुरंत ही चर्चा में आ गया। जयशंकर जी ने तो साफ-साफ बता दिया कि हमारा देश किसी के दबाव में नहीं आएगा। सच कहूँ तो, ये भारत की विदेश नीति की ताकत दिखाता है।

अब SCO है क्या? ये एक बड़ा क्षेत्रीय संगठन है जहाँ चीन, रूस, पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भारत भी शामिल है। आमतौर पर तो सभी देश मिलकर एक बयान पर सहमत होते हैं, लेकिन इस बार? नहीं! भारत ने साफ कह दिया कि हमें ये मंजूर नहीं। और ये कोई अचानक वाली बात नहीं – पिछले कुछ सालों से भारत अपनी बात रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

असल में मामला क्या है? जयशंकर जी ने बताया कि बयान में भारत की चिंताओं को सही तरीके से नहीं दिखाया गया। खासकर दो मुद्दे: एक तो CPEC (जो PoK से गुजरता है – यानी हमारे कश्मीर पर पाकिस्तान का कब्जा वाला इलाका), और दूसरा आतंकवाद पर सख्त रुख। भारत कह रहा है कि SCO को आतंकवाद के खिलाफ और मजबूती से खड़ा होना चाहिए। लेकिन बयान में ये बातें कहाँ? गायब!

अब सवाल यह है कि दूसरे देशों ने क्या कहा? चीन-पाकिस्तान तो नाराज हुए ही, लेकिन खुलकर कुछ बोलने से बचते रहे। रूस ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। हमारे एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं? वो तो पूरी तरह सपोर्ट कर रहे हैं! क्योंकि ये फैसला दिखाता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। एकदम सही बात है, है न?

तो आगे क्या होगा? विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत की मजबूत छवि और स्थापित होगी। हाँ, SCO में तनाव बढ़ा है, लेकिन भारत दूसरे देशों के साथ अलग से रिश्ते बनाए रखेगा। और आने वाली मीटिंग्स में? हम अपनी बात और जोर से रखेंगे। क्योंकि जब बात राष्ट्रीय हित की हो, तो समझौता कोई विकल्प नहीं।

सीधी बात – ये फैसला भारत की ‘Nation First’ नीति को दिखाता है। SCO जैसे बड़े मंच पर भी हम अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। और सबसे अच्छी बात? बिना किसी दबाव में आए। जयशंकर जी ने साबित कर दिया कि भारत अब वो नहीं जो पहले था। सच कहूँ तो, गर्व होता है ऐसे फैसलों पर!

देखिए, SCO मीटिंग में भारत का संयुक्त बयान पर दस्तख़त न करना कोई आम बात नहीं है। है न? यह हमारी विदेश नीति की उस अडिगता को दिखाता है जो सिद्धांतों पर चलती है – चाहे कोई भी दबाव क्यों न हो।

अब जयशंकर जी की बात करें तो… उन्होंने China और Pakistan के मामले में भारत का स्टैंड जिस अंदाज़ में पेश किया, वह साफ़ कहता है कि हम राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करने वाले। International मंचों पर सच बोलने का यह तरीका वाकई सराहनीय है।

और सबसे बड़ी बात? यह फैसला सिर्फ़ हमारी स्वतंत्र नीति को ही नहीं दिखाता… बल्कि एक बड़ा मैसेज देता है। कौन सा? वही जो हम हमेशा से कहते आए हैं – भारत अब वह पुराना भारत नहीं रहा जो दबाव में झुक जाए।

सच कहूं तो, यह पूरा प्रकरण थोड़ा ‘mic drop’ मोमेंट जैसा लगा। आपको नहीं लगा?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

SCO मीटिंग में भारत ने joint statement पर दस्तख़त क्यों नहीं किए? समझिए पूरा मामला

असल में बात ये है कि भारत ने SCO की इस बैठक में संयुक्त बयान पर इसलिए हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि… थोड़ा सा दिक्कत था। देखिए न, जयशंकर जी ने साफ़ कहा – जब दस्तावेज़ में आपकी मूलभूत स्थिति ही सही से न दर्शाई गई हो, तो साइन करने का क्या मतलब? वो भी तब, जब यह हमारे national interests के खिलाफ जाता हो। सीधी सी बात है न?

CPEC वाला मसला: जयशंकर ने SCO में क्या कहा?

अब यहाँ दिलचस्प बात ये है कि joint statement में CPEC (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) का ज़िक्र था। और भईया, ये तो सीधे-सीधे हमारी संप्रभुता (sovereignty) पर चोट करता है! क्यों? क्योंकि ये कॉरिडोर तो PoK यानी पाक-अधिकृत कश्मीर से होकर गुज़रता है। जयशंकर जी ने इसे लेकर स्टैंड लिया – और सही किया। आखिरकार, territorial integrity के मामले में कोई समझौता होता है क्या?

क्या SCO के दूसरे देश नाराज़ होंगे? एक जटिल सवाल

अब सवाल ये उठता है कि क्या इससे रिश्तों में तनाव आएगा? देखिए, हमारा स्टैंड तो साफ़ है – principles पर कोई समझौता नहीं। हाँ, कुछ SCO member countries को ये अच्छा नहीं लगा होगा। पर याद रखिए, diplomacy में कभी-कभी tough decisions लेने पड़ते हैं। और भारत ने यहाँ साबित कर दिया कि वो अपने हितों के आगे झुकने वाला नहीं। थोड़ा सख़्त, पर ज़रूरी कदम।

भारत की विदेश नीति का नया अध्याय: क्या संदेश गया?

इस पूरे episode से एक बात तो साफ़ है – भारत अब foreign policy में ‘maybe’ या ‘but’ वाली भाषा नहीं बोलता। स्पष्टवादिता और दृढ़ता… ये नई दिल्ली की नई भाषा है। चाहे SCO हो या UN, हमारी बात साफ़ – national interests सर्वोपरि। और सच कहूँ तो? यही तो एक बड़ी शक्ति का संकेत है। जमकर दबाव डालो, पर हम झुकेंगे नहीं। बस!

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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