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“भारत का ‘सुपर शील्ड’ बनाने की रणनीति: ब्रह्मोस, S-400 से बराक-1 तक ₹67,000 करोड़ की सुरक्षा डील”

भारत का ‘सुपर शील्ड’ बनाने का प्लान: ब्रह्मोस से लेकर S-400 तक, ₹67,000 करोड़ की सुरक्षा डील पर क्या है खास?

अब सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिस पर चर्चा होनी ही थी। देखिए न, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हालिया बैठक में ₹67,000 करोड़ से ज़्यादा की रक्षा डीलों को हरी झंडी मिल गई। ये कोई छोटी-मोटी खरीदारी नहीं है, बल्कि देश को एक मज़बूत ‘सुपर शील्ड’ देने की पूरी रणनीति है। और इसमें शामिल हैं ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम का अपग्रेड वर्जन, S-400 एयर डिफेंस, लॉन्ग रेंज ड्रोन और कुछ बेहद एडवांस्ड रडार सिस्टम। एकदम ज़बरदस्त कॉम्बिनेशन, है न?

पर सवाल यह है कि इतने बड़े निवेश की ज़रूरत क्यों पड़ी? असल में, पिछले कुछ सालों में चीन और पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर जो हलचल बढ़ी है, उसे देखते हुए ये कदम तो उठाने ही थे। 2020 की गलवान घटना के बाद से तो भारत ने सीमा सुरक्षा को लेकर अपनी रफ्तार और बढ़ा दी है। S-400 डील तो पहले से ही चल रही थी, अब उसे और बड़ा किया जा रहा है। सच कहूँ तो, ये सब देखकर लगता है कि अब हम पूरी तरह से सीरियस मोड में आ गए हैं।

अब ज़रा इस पूरे प्लान के मुख्य हिस्सों पर नज़र डालते हैं। पहला है ब्रह्मोस मिसाइल्स – जो पहले से ही काफ़ी खतरनाक थीं, अब उनकी रेंज 400 किमी से भी ज़्यादा की होगी। दूसरा बड़ा टुकड़ा है S-400 सिस्टम, जिसकी अतिरिक्त यूनिट्स मंगाई जा रही हैं। तीसरा और दिलचस्प हिस्सा है इसराइल का बराक-1 मिसाइल सिस्टम, जो नेवी को और ताकतवर बनाएगा। और हाँ, ड्रोन्स और एडवांस्ड रडार सिस्टम्स तो हैं ही – देसी और विदेशी टेक्नोलॉजी का एक बेहतरीन मिश्रण।

अब जब इतने बड़े फैसले की बात हो रही है, तो प्रतिक्रियाएँ भी मिली-जुली ही आनी थीं। एक तरफ रक्षा विशेषज्ञ इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए बड़ा बूस्ट बता रहे हैं, वहीं विपक्ष के कुछ नेताओं का कहना है कि इतने पैसे का कुछ हिस्सा सामाजिक विकास पर भी खर्च होना चाहिए। पर सेना की राय साफ़ है – ये डील भारत को एक ऐसी सुरक्षा ढाल देगी जिसे भेद पाना मुश्किल होगा।

अब आगे की बात करें तो इसके कई निहितार्थ हो सकते हैं। पहला तो यही कि रक्षा बजट और बढ़ सकता है – जिस पर अर्थशास्त्रियों की नज़र बनी हुई है। दूसरा, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशीकरण पर ज़ोर दिया जाएगा ताकि हम विदेशों पर कम निर्भर रहें। और तीसरा, थोड़ा सेंसिटिव पहलू – पाकिस्तान और चीन इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

सच तो यह है कि यह सिर्फ़ हथियारों की खरीदारी नहीं, बल्कि भारत के रणनीतिक इरादों का स्पष्ट संकेत है। अगले कुछ सालों में इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन ही बताएगा कि यह प्लान कितना कारगर साबित होता है। पर एक बात तय है – अब हमारी सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत होने वाली है। और यह तो बस शुरुआत है!

भारत का ‘सुपर शील्ड’ – ब्रह्मोस से S-400 तक: जानिए सबकुछ सरल भाषा में!

1. भारत का ‘सुपर शील्ड’ आखिर है क्या? और हमें इसकी चर्चा क्यों करनी चाहिए?

देखिए, ये ‘सुपर शील्ड’ कोई साइंस फिक्शन वाली चीज़ नहीं है। असल में ये हमारे देश का advanced missile defense system है जिसमें ब्रह्मोस, S-400 और बराक-8 जैसे हथियार शामिल हैं। मतलब साफ है – दुश्मन की मिसाइलों और हवाई हमलों से बचने का पूरा इंतज़ाम! ₹67,000 करोड़ की इस डील के बारे में सुनकर आप सोच रहे होंगे – “क्या ये सच में ज़रूरी है?” मेरा जवाब है – हाँ, उतना ही ज़रूरी जितना आपके घर का मेन गेट!

2. S-400 और ब्रह्मोस – दोनों में फर्क क्या है? समझिए आसान भाषा में

अब यहाँ थोड़ा टेक्निकल चीज़ आता है, लेकिन घबराइए मत! S-400 वो बॉडीगार्ड है जो 400 km दूर से ही दुश्मन के aircrafts और मिसाइलों को सूंघ लेता है। वहीं ब्रह्मोस? अरे भाई, ये तो वो जबरदस्त मिसाइल है जो 450 km तक मार कर सकती है – चाहे जमीन से छोड़ो, समुद्र से या हवा से! एक तरफ S-400 शील्ड की तरह काम करता है, तो दूसरी तरफ ब्रह्मोस तलवार की तरह। समझ गए न?

3. बराक-8: वो अनसुना हीरो जिसके बारे में कम लोग जानते हैं

ईमानदारी से कहूँ तो, बराक-8 पर बात कम होती है। पर ये Israel के साथ हमारी joint venture है – एक surface-to-air missile system जो नौसेना और थलसेना दोनों के काम आता है। ड्रोन्स, cruise missiles – ये सबकी छुट्टी कर देता है। कुल मिलाकर, ये हमारी सुरक्षा की लेयर्ड केक की एक और लेयर है। और हम सभी जानते हैं – जितनी ज्यादा लेयर्स, उतना बेहतर केक!

4. सबसे बड़ा सवाल: क्या ये सिस्टम चीन-पाकिस्तान को रोक पाएंगे?

तो अब सवाल यह उठता है – क्या ये सच में काम करेगा? देखिए, सीधी बात है – जब आपके पास S-400 और ब्रह्मोस जैसे सिस्टम होंगे, तो दुश्मन को हमला करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा। psychological pressure? हाँ बिल्कुल! ये वैसा ही है जैसे आपके मोहल्ले में सबसे तगड़ा बॉडीगार्ड वाला घर कोई छेड़ने नहीं आता। हालांकि, पूरी गारंटी तो कोई नहीं दे सकता। पर एक बात पक्की है – हमारी सुरक्षा की दीवार अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। और यही तो चाहिए था न?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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