भारत का शिपबिल्डिंग प्लान: क्या यह हमें वैश्विक हब बना पाएगा?
अब तो सरकार ने ठान ली है – भारत को शिपबिल्डिंग का ग्लोबल हब बनाना है! और इसी मकसद से पोर्ट्स मिनिस्ट्री ने हाल ही में बड़ा ऐलान किया है। देखिए न, 5 बिल्कुल नए ग्रीनफील्ड और 3 मौजूदा ब्राउनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर्स बनाए जाएंगे। सच कहूं तो, ये खबर काफी एक्साइटिंग है क्योंकि जमीन और सभी कानूनी मंजूरियां पहले से ही क्लियर हैं। मतलब अब बस काम शुरू होने का इंतज़ार है!
पर सवाल यह है कि ये प्लान इतना जरूरी क्यों है? दरअसल, हमारा देश अभी ग्लोबल शिपबिल्डिंग में सिर्फ 0.6% हिस्सेदारी रखता है। यानी नाममात्र! जबकि चीन और साउथ कोरिया जैसे देशों ने इस फील्ड में कब्जा जमा रखा है। ऐसे में, ये मूव भारत के लिए गेम-चेंजिंग साबित हो सकता है। नौकरियां बढ़ेंगी, तटीय इलाकों की इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा, और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना भी पूरा होगा।
अब बात करते हैं लोकेशन की। गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश – यानी हमारे सबसे अहम तटीय राज्यों को चुना गया है। इनमें से 5 जगहों पर तो बिल्कुल नए क्लस्टर्स बनेंगे, वहीं 3 मौजूदा फैसिलिटीज को अपग्रेड किया जाएगा। और हां, प्राइवेट सेक्टर को आकर्षित करने के लिए सरकार सब्सिडी और टैक्स बेनिफिट्स भी दे रही है। स्मार्ट मूव है, है न?
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया? ज्यादातर लोग तो इसे लेकर काफी पॉजिटिव हैं। कई कंपनियां तो इसे “हिस्टोरिक डिसीजन” बता रही हैं। लेकिन…हमेशा एक लेकिन तो होता ही है! कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और स्किल्ड लेबर की किल्लत बड़ी चुनौतियां हो सकती हैं। और विपक्ष वालों ने तो EIA (पर्यावरणीय प्रभाव आकलन) को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगले 6 महीनों में टेंडर प्रोसेस शुरू होने वाली है। लक्ष्य है कि अगले 5 सालों में हमारी ग्लोबल शिपबिल्डिंग क्षमता 0.6% से बढ़कर 2% हो जाए। और रोजगार? लगभग 50,000 डायरेक्ट और इनडायरेक्ट जॉब्स का अनुमान है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो सचमुच…यह भारत को नया आयाम दे सकता है। क्या पता, अगले दशक तक हम चीन को टक्कर देने लगें!
फिलहाल तो यही कहूंगा – दिलचस्प टाइम्स आने वाले हैं। देखते हैं यह योजना कितनी सफल हो पाती है। आपको क्या लगता है? कमेंट में जरूर बताइएगा!
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भारत का यह बड़ा-सा शिपबिल्डिंग प्लान… देखिए, यह कोई छोटी बात नहीं है। असल में, यह हमारी maritime क्षमताओं को कितना आगे ले जाएगा, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। 5 Greenfield और 3 Brownfield सुविधाएं! सुनने में तो बस नंबर्स लगते हैं, लेकिन सोचिए – इसका मतलब है हजारों नौकरियां, नए कौशल, और वो भी हमारे यहाँ।
अब सवाल यह है कि क्या भारत global shipbuilding में अपनी धाक जमा पाएगा? मेरा मानना है हाँ, बिल्कुल। ‘Make in India’ सिर्फ एक नारा नहीं रह गया है – यह योजना उसे हकीकत बना रही है। और आत्मनिर्भरता? वो तो बोनस है।
एक तरफ तो यह हमारी economy को boost देगा, दूसरी तरफ… ईमानदारी से कहूँ तो, यह हमारे लिए गर्व की बात है। जब तकनीक और रोजगार साथ-साथ चलें, तब क्या कहने! सच में।
Source: Livemint – Industry | Secondary News Source: Pulsivic.com