“इजरायल-ईरान जंग: ‘करो लेकिन मरो मत’ का नया युद्ध डॉक्ट्रिन कैसे बदल रहा है आधुनिक लड़ाई?”

इजरायल-ईरान जंग: ‘करो पर मत मरो’ वाली नई रणनीति ने कैसे पलट दिए युद्ध के नियम?

युद्ध… हमेशा से ही वो जंग होती आई है जहां बैठे-ठाले लोग फैसले लेते हैं और मरते वो हैं जिनकी कोई सुनने वाला नहीं। सच कहूं तो, ये दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बुरा मजाक है। लेकिन अब? अब इजरायल जैसे देशों ने इस पुराने खेल के नियम ही बदल दिए हैं। हाल में इजरायल और ईरान के बीच जो तनाव बढ़ा, उसने एक नई युद्ध नीति को जन्म दिया है – “करो पर मत मरो”। सुनने में अजीब लगता है न? पर असल में ये आधुनिक युद्ध का वो नया फंडा है जो पुराने तरीकों को चुनौती दे रहा है।

पहले समझिए – ये दुश्मनी कहां से शुरू हुई?

इजरायल और ईरान? भाई, ये कोई नई लड़ाई थोड़े ही है! दोनों के बीच की दुश्मनी तो वैसी ही है जैसे दो पड़ोसी जिनके बीच सालों से पानी की टंकी को लेकर झगड़ा चल रहा हो। धर्म, राजनीति, क्षेत्रीय दावेदारी – सब कुछ मिला हुआ है इसमें। ईरान परमाणु बम बनाना चाहता है, इजरायल उसे रोकना चाहता है। सीधी सी बात है। ईरान हमास और हिज़बुल्लाह जैसे ग्रुप्स के जरिए इजरायल को परेशान करता रहा, वहीं इजरायल ने हमेशा अपनी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा। पर पिछले कुछ सालों में ये लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है – अब ड्रोन, साइबर अटैक और छुपकर किए जाने वाले ऑपरेशन चल रहे हैं।

हाल की घटनाएं: जब टेक्नोलॉजी ने ली लड़ाई की कमान

कुछ दिन पहले की ही बात है – इजरायल ने ईरान के परमाणु प्लांट्स और मिलिट्री बेस पर AI वाले ड्रोन और पिनपॉइंट मिसाइलों से हमला किया। सबसे खास बात? नुकसान तो ईरान को हुआ, पर इजरायल के अपने लोग सुरक्षित रहे। यही तो है इस नई रणनीति की खूबसूरती! ईरान ने जवाब में इजरायल पर रॉकेट दागे, मगर इजरायल का आयरन डोम सिस्टम ने ज्यादातर को हवा में ही मार गिराया। अमेरिका और यूरोप वाले बीच-बचाव करने में लगे हैं, पर तनाव अभी भी कायम है। सच कहूं तो, ये पूरा मामला किसी साइंस फिक्शन मूवी जैसा लगता है!

दुनिया क्या कह रही है? नेताओं से लेकर एक्सपर्ट्स तक

इजरायल के PM नेतन्याहू तो मानो इस नई रणनीति के चैंपियन बन गए हैं – उनका कहना है, “हम दुश्मन को मारेंगे, पर अपने सैनिकों को बचाएंगे।” वहीं ईरान के राष्ट्रपति रईसी गुस्से में हैं – “हर एक्ट का रिएक्शन होगा!” UN वाले हाथ मल रहे हैं और शांति की दुहाई दे रहे हैं। पर सच तो ये है कि मिलिट्री एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि ये नया तरीका भविष्य के युद्धों को “कम खून वाली लड़ाई” में बदल देगा। अब जीत का फैसला तोपों से नहीं, टेक्नोलॉजी से होगा।

आगे क्या? युद्ध की तस्वीर ही बदल जाएगी?

अगर ये नई रणनीति चल निकली, तो भविष्य में युद्ध का मतलब ही बदल जाएगा। ड्रोन, साइबर वॉर और AI होंगे मुख्य हथियार। सेनाओं में सैनिकों की जगह टेक्नीशियन्स की डिमांड बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा – अमेरिका, चीन, रूस सब अपने-अपने हित साधने में लग जाएंगे। सवाल ये है कि क्या ये नया तरीका शांति लाएगा या और मुसीबत खड़ी करेगा? क्योंकि अगर तनाव बढ़ा, तो पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

तो देखा आपने? इजरायल-ईरान का ये संघर्ष सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रहा। ये तो युद्ध की परिभाषा ही बदल रहा है। “करो पर मत मरो” वाला ये फंडा आने वाले समय में पूरी तरह से बदल देगा कि हम युद्ध को कैसे देखते हैं। और हां, एक बात तो तय है – अब युद्ध के मैदान में टेक्नोलॉजी की दखलंदाजी बढ़ने वाली है। बस, देखना ये है कि ये बदलाव अच्छा साबित होगा या नहीं…

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Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

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