इटालियन कोर्ट का ऐसा फैसला जिसने UniCredit को हिला कर रख दिया!
क्या आपने सुना? इटली की एक अदालत ने UniCredit बैंक को रूस से बाहर निकलने का आदेश दे दिया है। और ये कोई सामान्य फैसला नहीं है, बल्कि BPM बैंक के टेकओवर डील की अनिवार्य शर्त बना दी गई है। हालांकि, यहाँ मजेदार बात ये है कि अदालत ने प्रधानमंत्री मेलोनी की सरकार की कुछ और शर्तों को ठुकरा दिया। ईमानदारी से कहूँ तो, ये फैसला UniCredit के CEO एंड्रिया ऑर्सेल के लिए बड़ा झटका है – वो तो रूसी बाजार में टिके रहने की पुरजोर वकालत करते आए हैं!
पूरा मामला क्या है?
देखिए, UniCredit तो इटली के टॉप बैंक्स में से एक है जो सालों से रूस में काम कर रहा था। BPM बैंक को खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही थी। लेकिन यूक्रेन-रूस वॉर के बाद तो पश्चिमी देशों का दबाव इतना बढ़ गया कि कई कंपनियों ने रूस से कदम पीछे खींच लिए। इटालियन सरकार ने भी BPM डील के लिए शर्त रखी – “पहले रूस से बाहर निकलो!”
अदालत ने क्या कहा?
अब यहाँ दिलचस्प बात ये है कि अदालत ने दो बड़े फैसले दिए:
1. UniCredit को BPM डील के लिए रूस से पूरी तरह बाहर होना ही होगा (बिना शर्त!)
2. सरकार की दूसरी शर्तें जैसे नौकरियों की गारंटी वगैरह को खारिज कर दिया
सच कहूँ तो, ये फैसला वित्तीय दुनिया में बम की तरह गिरा है। क्यों? क्योंकि अब यूरोप के दूसरे बैंक्स के लिए ये एक उदाहरण बन गया है।
किसने क्या कहा?
अब सबकी प्रतिक्रियाएं देखिए:
– UniCredit वालों ने बस इतना कहा, “हम फैसला पढ़ रहे हैं, जल्द बयान आएगा” (ठीक वैसे ही जैसे हम सब परीक्षा में फेल होने पर कहते हैं!)
– इटली के एक मंत्री जी ने इसे “देशहित” बताया
– विश्लेषकों का मानना है कि अब रूस में काम कर रहे दूसरे यूरोपीय बैंक्स की नींद उड़ गई होगी
आगे क्या होगा?
अब UniCredit के सामने दोहरी मुसीबत है:
1. रूस से बाहर निकलने की जटिल प्रक्रिया
2. पूरी BPM डील को दोबारा प्लान करना
मेरी निजी राय? ये फैसला सिर्फ UniCredit के लिए नहीं, पूरे यूरोपीय बैंकिंग सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। अब तो बस यही देखना है कि आगे का खेल कैसे खेला जाता है। आप भी नजर रखिएगा, क्योंकि ये कहानी अभी और रोचक होने वाली है!
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1. इटालियन कोर्ट ने UniCredit को लेकर क्या ऐलान किया? और ये मामला इतना गरमा-गरम क्यों है?
देखिए, इटालियन कोर्ट ने एकदम साफ कह दिया है – “भाई UniCredit, अगर तुम्हें BPM का टेकओवर पूरा करना है तो रूस से बाहर निकलो!” असल में, ये पूरा मामला UniCredit की रूसी ब्रांच को लेकर चल रहे regulatory झंझटों को सुलझाने के लिए था। सच कहूं तो अब ये देखना दिलचस्प होगा कि UniCredit इस फैसले पर कैसे रिएक्ट करती है।
2. BPM का टेकओवर UniCredit के लिए इतना खास क्यों? समझिए इस सिंपल तरीके से
अरे भई, ये तो वैसा ही है जैसे आपकी फेवरेट दुकान अचानक पास की दो दुकानें और खरीद ले! BPM का टेकओवर UniCredit को इटली में और ज्यादा बड़ा प्लेयर बना देगा। मार्केट शेयर? बढ़ेगा। कस्टमर बेस? और विस्तार होगा। सच में, ये डील उनकी ग्रोथ स्ट्रैटेजी का गेम-चेंजर है। लेकिन सवाल ये है कि क्या वो इसका फायदा उठा पाएंगे?
3. क्या रूस से बाहर निकलने पर UniCredit के कस्टमर्स को नुकसान होगा? सच्चाई जानिए
ईमानदारी से कहूं तो हां, थोड़ा-बहुत असर तो पड़ेगा ही। जब कोई बैंक किसी मार्केट से एकदम से निकलता है तो उसके कस्टमर्स और इन्वेस्टर्स में हड़कंप तो मचता ही है। पर अच्छी बात ये है कि UniCredit ने साफ कहा है कि वो इस ट्रांजिशन को स्मूद बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। Minimum inconvenience – ये उनका वादा है। लेकिन देखना ये है कि प्रैक्टिस में ये कितना काम करता है।
4. इस फैसले से ग्लोबल बैंकिंग सेक्टर पर क्या भूचाल आएगा? एक्सपर्ट व्यू
असल में, ये केस एक बड़ा मैसेज दे रहा है – “भाइयों, जियोपॉलिटिकल रिस्क और रेगुलेटरी कंप्लायंस को हल्के में मत लो!” आने वाले दिनों में दूसरे बैंक्स, खासकर वो जो कॉन्फ्लिक्ट जोन में काम कर रहे हैं, इसकेस को एक उदाहरण की तरह देखेंगे। एक तरफ तो बिजनेस का प्रेशर है, दूसरी तरफ रेगुलेटरी की पाबंदियां। बैलेंस बनाना ही असली टेस्ट होगा।
Source: Financial Times – Companies | Secondary News Source: Pulsivic.com