राजस्थान में जगुआर क्रैश: पायलट की चूक या मशीन ने धोखा दिया?
गुरुवार की सुबह राजस्थान के चूरू में जो हुआ, वो सुनकर दिल दहल जाता है। एक जगुआर फाइटर प्लेन – जिस पर हमारे दो बहादुर पायलट सवार थे – प्रशिक्षण उड़ान के दौरान धराशायी हो गया। दोनों वीरों की मौत… सच कहूँ तो, ये खबर पढ़ते ही गुस्सा आता है। अभी तक की रिपोर्ट्स क्या कहती हैं? शायद तकनीकी खामी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर क्यों? वायुसेना ने जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बैठा दी है – पर क्या सच सामने आ पाएगा?
जगुआर: बूढ़ा शेर या जंग का खिलौना?
देखिए, जगुआर हमारी वायुसेना का वो पुराना घोड़ा है जिसे बार-बार नए जूते पहनाए जाते हैं। ब्रिटिश डिजाइन, 1970s का मॉडल – पर हम आज भी इसपर भरोसा करते हैं। Upgrade? हुए हैं बहुत। लेकिन सच तो ये है कि पिछले कुछ सालों में ये विमान कितनी बार दुर्घटनाग्रस्त हुआ है? गिनती भूल गए होंगे आप। विशेषज्ञ कहते हैं उम्र और पुरानी तकनीक दोषी है। मगर फिर सवाल – क्या हम अपने पायलटों को पुरानी मशीनों में मरने भेज रहे हैं?
क्रैश के नए खुलासे: क्या ब्लैक बॉक्स बताएगा सच?
अब जरा ताजा जानकारी पर आते हैं। दोनों पायलट्स ने इजेक्शन सीट एक्टिवेट करने की कोशिश की – मगर नाकाम रहे। है ना हैरान कर देने वाली बात? वायुसेना का कहना है ब्लैक बॉक्स मिल गया है। उम्मीद है ये रहस्य खोलेगा। स्थानीय गाँव वालों ने आग की लपटें देखी थीं… तो क्या ये मशीन की खराबी थी? या फिर रखरखाव में लापरवाही? ईमानदारी से कहूँ तो, हर बार ‘तकनीकी खामी’ बताकर पल्ला झाड़ लेने से काम नहीं चलेगा।
किसने क्या कहा? – प्रतिक्रियाओं का अंबार
वायुसेना प्रमुख ने कहा – “दुखद घटना”। शोक जताया। मगर असली सवाल तो जांच के बाद ही सुलझेगा। वहीं रक्षा विशेषज्ञों ने सीधा निशाना साधा – “जगुआर अब पुराना पड़ गया है, नए विमानों में निवेश करो!” मृतक पायलट के परिवार की बात सुनिए – “हमें न्याय चाहिए। अगर मशीन खराब थी, तो जिम्मेदारों को सजा मिले।” सच कहूँ? ये आवाज़ हर बार उठती है… और हर बार दबा दी जाती है।
आगे की राह: पुराने को बदलो या पैचवर्क जारी रखो?
अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं। अगर तकनीकी खामी निकली, तो जगुआर फ्लीट की जाँच होगी। पर सच तो ये है कि हमें TEJAS जैसे नए विमानों पर दांव लगाना ही होगा। विशेषज्ञ ठीक ही कहते हैं – आधुनिकीकरण जरूरी है। लेकिन सवाल ये भी है कि क्या सिर्फ नए विमान खरीद लेने से समस्या हल हो जाएगी? रखरखाव, ट्रेनिंग और जवाबदेही का क्या?
आखिर में बस इतना – ये घटना कोई पहली नहीं है। शायद आखिरी भी न हो। जब तक हम सिस्टम में सुधार नहीं करते, हमारे बहादुर पायलट इसी तरह मौत से जूझते रहेंगे। जांच रिपोर्ट सिर्फ एक घटना का कारण नहीं बताएगी, बल्कि ये तय करेगी कि हमारी वायुसेना की सुरक्षा संस्कृति कितनी गंभीर है। या फिर… हम फिर से ‘भूल जाएंगे’ अगली दुर्घटना तक?
यह भी पढ़ें:
- Air India Historic Turn Future Of Indian Aviation
- Kargil War Indian Air Force Destroyed Pakistani Bunkers
- Indian Air Force
Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com