“डोभाल का ‘शीशा वाला बयान’! चीन-पाकिस्तान की हालत खराब, दुनिया के मीडिया ने मानी हार”

डोभाल का ‘शीशा वाला बयान’! चीन-पाकिस्तान की हालत खराब, दुनिया के मीडिया ने मानी हार

अरे भाई, भारत की फौजी ताकत का डंका एक बार फिर बज गया है! और इस बार सीमा सुरक्षा की बात हो रही है। देखा जाए तो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने जो ‘शीशा वाला बयान’ दिया, वो तो जैसे चीन-पाकिस्तान के लिए आईना दिखाने जैसा था। सच कहूं तो, उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर बोलते हुए ऐसी बात कही कि पूरी दुनिया का ध्यान खिंच गया। असल में, ये बयान भारत की उस क्षमता को दिखाता है जहां हम सीमा पार जाकर भी आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर सकते हैं। और डोभाल साहब ने तो साफ-साफ कह दिया – पाकिस्तान में नौ आतंकी कैंपों को हमने ठिकाने लगा दिया। एकदम सटीक! अब समझ आया न कि “पहले प्रहार” की नीति का मतलब क्या होता है?

ऑपरेशन सिंदूर: पूरी कहानी

याद है न 2019 का बालाकोट एयर स्ट्राइक? वैसा ही कुछ तो है ये ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी। पर इस बार स्केल और बड़ा है। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को निशाना बनाया गया, और वो भी सर्जिकल स्ट्राइक स्टाइल में। हालांकि, पाकिस्तान और चीन तो हमेशा की तरह भारत की सीमा नीतियों पर सवाल उठाते रहते हैं। लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने साफ कह दिया – भारत का ये कदम पूरी तरह justified है। और अब डोभाल साहब के इस ताजा बयान ने तो बहस को फिर से गर्मा दिया है। सच कहूं तो, ये सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, एक मैसेज है!

क्या है खास? असली गेम-चेंजर क्या?

डोभाल साहब ने तो साफ कर दिया – अब भारत आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” पॉलिसी पर चल रहा है। मतलब साफ है – खतरा दिखा नहीं कि हमारी एक्शन शुरू। है न कमाल की बात? और सबसे मजेदार बात ये कि पाकिस्तान और चीन की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल रिएक्शन नहीं आया। शायद सदमे में हैं! पर global media तो बता रहा है – ये “सर्जिकल स्ट्राइक 2.0” है। अमेरिकी और यूरोपीय मीडिया भी मान रहा है कि ये भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का सबूत है। क्या आपको नहीं लगता कि अब गेम बदल गया है?

राजनीति में हंगामा, दुनिया क्या कह रही?

गृह मंत्री अमित शाह तो डोभाल साहब के बयान पर झूम ही रहे हैं। उनका कहना है – “अब कोई भी देश भारत को चुनौती देने की हिम्मत नहीं करेगा।” लेकिन विपक्ष? वो तो हमेशा की तरह सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने तो ट्वीट करके सीधा पूछ लिया – “क्या ये ऑपरेशन वाकई सफल रहा या सिर्फ प्रोपेगैंडा है?” वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा – भारत का आतंकवाद के खिलाफ स्टैंड पूरी तरह सही है। एक तरफ तो हमारी सरकार जीत का जश्न मना रही है, दूसरी तरफ विपक्ष सवाल कर रहा है। पर सच क्या है? शायद वक्त ही बताएगा।

आगे क्या? अब किसे डरना चाहिए?

एक्सपर्ट्स की मानें तो अब पाकिस्तान और चीन की तरफ से कोई न कोई रिएक्शन आएगा ही – चाहे वो डिप्लोमैटिक हो या मिलिट्री। और हमारी सरकार? वो तो यूएन में पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के नए सबूत पेश करने की तैयारी में है। security experts कह रहे हैं कि डोभाल का ये बयान भारत की नई “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” रणनीति का इशारा है। मतलब साफ है – खतरा पैदा होने से पहले ही उसे खत्म कर दो। थोड़ा सा जेम्स बॉन्ड स्टाइल लगता है न?

अंत में बस इतना कि डोभाल साहब के इस बयान ने न सिर्फ पाकिस्तान-चीन को चुनौती दी है, बल्कि पूरी दुनिया को बता दिया है कि अब global security में भारत एक बड़ा प्लेयर है। अब देखना ये है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्या रुख अपनाता है। और सबसे बड़ा सवाल – क्या पाकिस्तान इस हार को स्वीकार कर पाएगा? क्योंकि अब तो शीशा साफ दिख रहा है!

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डोभाल का ‘शीशा वाला बयान’ – जानिए क्या है पूरा माजरा?

डोभाल का ‘शीशा वाला बयान’ आखिर है क्या चीज़?

देखिए, ये वो viral statement है जिसने अजीत डोभाल साहब को फिर से ट्रेंड करा दिया। उन्होंने चीन और पाकिस्तान को लेकर एक ऐसी तुलना की जो शीशे की तरह साफ़ थी – और हां, थोड़ी कड़वी भी। सच कहूं तो global media भी इस पर झूम उठा। क्यों न झूमे, इतना मसालेदार बयान तो बहुत दिनों बाद सुनने को मिला!

चीन-पाक की हालत इतनी खस्ता क्यों हो गई?

अब यहां दो बातें हैं। एक तो डोभाल साहब ने जो कहा वो – कि दोनों देश अपने ही internal problems और economic crises में उलझे हुए हैं। लेकिन दूसरी और ज़्यादा दिलचस्प बात? भारत की बढ़ती global influence ने इनके foreign policy के दांत खट्टे कर दिए हैं। सोचिए, जो देश कभी हमें घेरने की कोशिश करते थे, आज खुद घिरते नज़र आ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की क्या राय है?

ओह! International media तो इस पर पागल हो गया है। कुछ ने इसे ‘भारत का डिप्लोमेटिक मास्टरस्ट्रोक’ बताया, तो कुछ ने चीन-पाक की फजीहत की रिपोर्टिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी। सच तो ये है कि analysis reports पढ़कर लगता है – भारत की image बुलंद, और पड़ोसियों की… खैर, आप समझ गए होंगे।

क्या ये बयान भारत की असल foreign policy दिखाता है?

सुनिए, एक तरफ तो डोभाल साहब अब सरकार में नहीं हैं। लेकिन ईमानदारी से कहूं? ये बयान उसी सोच को reflect करता है जो आजकल साउथ ब्लॉक में दिखती है। Strong, confident और थोड़ा सा ‘हमें किसी से डर नहीं’ वाला अंदाज़। क्या आपको नहीं लगता कि यही नई भारत की पहचान बन रही है?

Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

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