झारखंड-बंगाल ‘एलिफेंट कॉरिडोर’: कहानी एक ऐसे रास्ते की जो हाथियों के लिए जानलेवा क्यों हो गया?
सोचिए, एक ऐसा रास्ता जो सदियों से हाथियों का अपना घर था, आज उन्हीं के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। झारखंड के कोल्हान और पश्चिम बंगाल के बीच फैला यह ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ अब किसी डरावनी कहानी जैसा लगता है। पिछले डेढ़ महीने में सात हाथियों की मौत! और वो भी कैसे – ट्रेन के नीचे कुचले जाने से लेकर बिजली के झटके तक। सबसे हैरान करने वाली बात? वन विभाग ने तो पहले ही चेतावनी दे दी थी, लेकिन सुनता कौन है भाई!
जब प्रकृति का रास्ता बन जाए खतरा
असल में देखा जाए तो यह कॉरिडोर हाथियों की उस पुरानी आदत का नतीजा है जब वे झुंड में घूमा करते थे। झारखंड से पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक का यह सफर उनके DNA में शामिल है। लेकिन हम इंसानों ने तो कमाल ही कर दिया! एक तरफ रेलवे लाइनें बिछ गईं, दूसरी तरफ बिजली के खुले तारों का जाल। और तो और, शिकारियों ने तो बारूदी सुरंगें तक बिछा दीं। सच कहूं तो यह कोई नई समस्या भी नहीं – पिछले 10 साल में यहां दर्जनों हाथी मारे जा चुके हैं। पर सुधार? वो तो दूर की बात रही।
हालिया घटनाएं: दिल दहला देने वाली
पिछले कुछ दिनों में जो हुआ, उस पर यकीन करना मुश्किल है। सात हाथी! एक नहीं, दो नहीं – सात! कुछ ट्रेन से कटे, कुछ बिजली के झटके से मरे, तो कुछ बारूदी सुरंगों के शिकार। वन विभाग वालों का कहना है कि उन्होंने कितनी बार रेलवे को चेतावनी दी। ट्रेन की स्पीड कम करने को कहा, तारों को सुरक्षित करने को कहा। लेकिन जैसे हमारे देश में होता आया है – नोटिस तभी लिया जाता है जब हादसा हो जाता है। अब जांच टीम बैठी है, पर क्या फायदा जब नुकसान हो चुका?
लोग क्या कह रहे हैं?
इन घटनाओं ने सबको झकझोर कर रख दिया है। वन अधिकारी बेबसी से हाथ मल रहे हैं – “हमने तो कह दिया था!” पर्यावरणविदों की चिंता और गहरी है। उनका कहना है कि अगर यही हाल रहा तो हाथियों की संख्या और गिरेगी। और स्थानीय लोग? उनकी फिक्र अलग है। डर है कि गुस्साए हाथी अब गांवों की तरफ आएंगे। फिर क्या होगा? मानव-हाथी झगड़े और बढ़ेंगे।
अब क्या हो सकता है?
अब तो नींद से जागने का वक्त आ गया है। वन विभाग ने रेलवे के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। कुछ तकनीकी समाधान भी सुझाए जा रहे हैं – स्पीड ब्रेकर, अंडरपास, सुरक्षित तार। साथ ही लोगों को समझाने की कोशिश भी चल रही है कि हाथियों के साथ कैसे रहा जाए।
सच तो यह है कि यह कॉरिडोर अब एक चेतावनी बन चुका है। हाथी सिर्फ जानवर नहीं, हमारे ecosystem का हिस्सा हैं, हमारी संस्कृति का प्रतीक हैं। अगर अभी नहीं संभले, तो वो दिन दूर नहीं जब यह रास्ता सच में मौत का गलियारा बन जाएगा। और फिर? फिर तो पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा।
यह भी पढ़ें:
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com