लाहौल स्पीति में बादल फटा, और फिर वही दृश्य… सड़कें मलबे में दफन!
मंगलवार का दिन, हिमाचल के लाहौल स्पीति में फिर एक बार प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया। जिस्पा के ग्रेफ कैंप के पास अचानक बादल फटा – और देखते ही देखते पूरा इलाका सिर्फ पानी और मलबे का मैदान बन गया। सड़कें? उनका तो पता ही नहीं चल रहा था। यातायात पूरी तरह ठप। अच्छी बात ये कि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों की आँखों में डर साफ देखा जा सकता है।
असल में बात ये है कि लाहौल स्पीति जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक भी। यहाँ बादल फटना और अचानक बाढ़ आना कोई नई बात नहीं। मानसून आते ही ये इलाका जैसे जाग जाता है – भूस्खलन और बाढ़ के साथ। इस बार भी मौसम विभाग ने चेतावनी दी थी, लेकिन ये तीव्रता? किसी ने सोचा भी नहीं होगा। और सबसे बड़ी मुसीबत? केलांग-दारचा-सारचू-लेह मार्ग का बंद होना। ये तो वो हाईवे है जो हिमाचल को लद्दाख से जोड़ता है। बंद हुआ तो? समझो कनेक्टिविटी गई!
घटना के बाद का नज़ारा क्या था? सोचिए – पहाड़ों से उतरता हुआ मलबा, सड़कों पर बहता पानी, और फंसे हुए वाहन। एकदम डरावना। प्रशासन ने तुरंत मार्ग बंद कर दिया। NDRF और स्थानीय टीमें मलबा साफ़ करने में जुट गईं। अभी तक किसी के घायल होने की खबर नहीं, लेकिन संचार व्यवस्था ठप होने से सही जानकारी मिलना मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय लोगों की क्या प्रतिक्रिया है? एक निवासी ने कहा – “ये तो हर साल होता है, लेकिन इस बार तो मलबे की मात्रा देखो! हम डरे हुए हैं।” सच कहूँ तो डरना लाज़मी भी है। प्रशासन का कहना है कि वे जल्द से जल्द रास्ता खोलने की कोशिश कर रहे हैं। पर सवाल ये है कि क्या ये अस्थायी समाधान है? मौसम विभाग ने तो और बारिश की चेतावनी दी ही है।
आने वाले 48 घंटे और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं। भारी बारिश का अनुमान है, जिसका मतलब – और भूस्खलन। प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा है। अगर मौसम ने साथ दिया, तो 24 घंटे में शायद मार्ग खुल जाए। पर ये समस्या तो हर साल आती है न? क्या इस बार इस पर गंभीरता से विचार होगा?
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लाहौल स्पीति प्राकृतिक आपदाओं के प्रति कितना संवेदनशील है। प्रशासन और स्थानीय लोगों की सतर्कता ही बड़ी तबाही रोक सकती है। फिलहाल सबकी निगाहें मौसम पर टिकी हैं। और राहत कार्यों पर। उम्मीद है जल्द ही स्थिति सामान्य होगी। वरना…? वरना तो हर साल यही कहानी दोहराई जाती रहेगी।
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लाहौल स्पीति में बादल फटने की तस्वीरें और वीडियो देखकर दिल दहल जाता है। सच कहूं तो, प्रकृति कब कैसा मंज़र दिखा दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। सड़कों पर बहता मलबा, टूटे हुए पुल… ये सब देखकर लगता है जैसे किसी हॉलीवुड डिजास्टर मूवी का सीन हो। #BreakingNews पर ट्रेंड कर रही ये खबर सिर्फ हैरान नहीं करती, बल्कि एक सवाल भी छोड़ जाती है – क्या हम वाकई ऐसी आपदाओं के लिए तैयार हैं?
असल में, ऐसे वक्त में दो चीज़ें सबसे ज़रूरी होती हैं – पहला, स्थानीय लोगों की मदद करना (बिना सरकारी दखल के भी काम चलता है, है न?), और दूसरा, अफवाहों से बचते हुए सही जानकारी पर भरोसा करना। हालांकि, सरकारी एजेंसियों के निर्देशों को नज़रअंदाज़ करना भी ठीक नहीं। थोड़ी सी सावधानी और एकजुटता… शायद यही इस वक्त सबसे बड़ी ज़रूरत है।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com