मेवात में तेंदुए का आतंक! 10 दिन में दूसरी बार गाय का शिकार, गांव में हड़कंप
अरे भई, नूंह के बड़का अलीमुद्दीन गांव में फिर वही हुआ जिसका डर था। तेंदुआ वापस आ गया, और इस बार उसने पशुशाला में घुसकर एक गाय को निशाना बनाया। सच कहूं तो ये कोई नई बात नहीं – पिछले 10 दिन में ये दूसरा मामला है। गांव वाले तो जैसे डर के मारे घरों में दुबके हुए हैं। प्रशासन वाले बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं, पर क्या वाकई कुछ होगा? ये सवाल सबके दिमाग में है।
देखिए, मेवात का ये संघर्ष नया नहीं है। जंगल कट रहे हैं, इंसान बढ़ रहे हैं, और जानवर? उनके पास जगह कम पड़ रही है। पिछले हफ्ते ही इसी गांव के पास एक बछड़ा तेंदुए का शिकार हुआ था। तब भी वही हुआ – ग्रामीणों ने चिल्लाना शुरू किया, अधिकारियों ने आश्वासन दिए, और फिर सब शांत। अब जब दूसरी घटना हुई है तो लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है।
ताजा वाकया कुछ यूं हुआ – रात के अंधेरे में तेंदुआ चुपके से पशुशाला में घुसा। गाय पर हमला किया। ग्रामीणों ने शोर मचाया, पत्थर फेंके, पर जानवर भाग निकला। वन विभाग वालों ने आकर पंजों के निशान देखे। अब गांव वाले एक ही बात कह रहे हैं – या तो इस तेंदुए को पकड़ो, या… खैर, आप समझ ही गए होंगे। उनकी मजबूरी भी समझ आती है – जानवर ही नहीं, इंसानी जिंदगी भी दांव पर लगी है।
अब सुनिए सबकी प्रतिक्रियाएं। गांव का एक बुजुर्ग बिलख रहा था – “हमारी रोजी-रोटी इन्हीं मवेशियों पर टिकी है। सरकार कब तक हमें मरने देगी?” वन विभाग वाले अपनी ही धुन में – “हम कोशिश कर रहे हैं, camera trap लगा रहे हैं।” एक नेता महोदय भी पहुंच गए – “संतुलन जरूरी है।” पर सवाल ये है कि ये संतुलन कब तक बिगड़ता रहेगा?
तो अब क्या? वन विभाग की योजना के मुताबिक, कैमरा ट्रैप लगेंगे, awareness campaign चलेगा। अगर तेंदुआ फिर दिखा तो उसे पकड़कर कहीं दूर छोड़ देंगे। पर क्या ये काफी है? ग्रामीणों को तो रात में नींद ही नहीं आ रही।
सच तो ये है कि ये कोई आम समस्या नहीं रही। जब तक concrete steps नहीं उठाए जाते, ये सिलसिला थमने वाला नहीं। एक तरफ ग्रामीणों की सुरक्षा, दूसरी तरफ वन्यजीवों का अस्तित्व। बड़ा मुश्किल समय है मेवात के लिए। और हां, सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा – action चाहिए। तुरंत।
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com