महाभारत: गांधारी ने शकुनि और कृष्ण को श्राप क्यों दिया? असल कहानी क्या है?
देखिए, महाभारत की कहानी तो वैसे भी बहुत गहरी है। लेकिन गांधारी का किरदार… उफ्फ! क्या बताऊँ, एक माँ का दर्द, उसका गुस्सा, और फिर वो श्राप – सब कुछ इतना real लगता है कि लगता है हमारे आसपास ही कोई घटना हो रही हो। सोचिए, जब युद्ध खत्म हुआ और सारे कौरव मारे गए, तो गांधारी ने क्या महसूस किया होगा? और फिर उसने शकुनि और कृष्ण को श्राप क्यों दिया? चलिए, इसी सवाल का जवाब ढूँढते हैं।
गांधारी कौन थीं? सच्चाई जो शायद आप नहीं जानते
असल में गांधारी की कहानी बहुत दिलचस्प है। वो गांधार की राजकुमारी थीं, जिनकी शादी हस्तिनापुर के अंधे राजकुमार धृतराष्ट्र से हुई। और यहाँ से शुरू होता है उनका त्याग – पति के अंधेपन के साथ खड़े होने के लिए खुद आँखों पर पट्टी बाँध ली! कल्पना कीजिए, पूरी जिंदगी… बिना देखे। सौ बेटों की माँ होकर भी वो कभी उनके गलत कामों का साथ नहीं देतीं। क्या आज के ज़माने में ऐसा संभव है?
वो पल जब टूटा एक माँ का दिल
युद्ध के बाद का वो scene… बस सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। गांधारी के सारे बेटे मारे गए, पूरा परिवार तबाह। और फिर जब कृष्ण सांत्वना देने आए, तो? दुःख गुस्से में बदल गया। गांधारी ने सीधा आरोप लगाया – “कृष्ण, तुम रोक सकते थे ये सब!” सच कहूँ तो, क्या वाकई कृष्ण जिम्मेदार थे? या फिर ये सिर्फ एक माँ का दर्द था?
शकुनि को श्राप – क्या सही था?
अब शकुनि की बात करें तो… यार, ये तो पूरा villain ही था न? गांधारी का भाई होकर भी उसने क्या-क्या नहीं किया। पांडवों के साथ जुआ खेलवाया, द्रौपदी का चीरहरण होने दिया। गांधारी को लगा कि उसके बेटों की मौत की जड़ तो शकुनि ही है। पर सवाल ये है कि क्या सच में सिर्फ शकुनि ही दोषी था? या फिर पूरी कुरु राजनीति ही खोखली हो चुकी थी?
कृष्ण को श्राप – एक माँ का गुस्सा या भविष्यवाणी?
कृष्ण के मामले में तो गांधारी का गुस्सा और भी दिलचस्प हो जाता है। उन्होंने कहा – “जैसे मेरे कौरवों का अंत हुआ, वैसे ही तुम्हारे यादवों का भी होगा।” और देखिए न, ये बात सच साबित हुई! लेकिन क्या ये सच में श्राप था? या फिर कृष्ण को पहले से ही पता था कि यादवों का अंत होना है? कभी-कभी लगता है गांधारी ने सिर्फ वही कहा जो होना था।
क्या सच में पूरे हुए श्राप?
महाभारत पढ़ने वाले जानते हैं – शकुनि की मौत हो गई, यादव आपस में ही लड़कर मर गए। लेकिन यहाँ सबक ये है कि गुस्से में लिया गया कोई भी फैसला बाद में पछतावा देता है। वैसे देखा जाए तो धर्म की जीत तो हुई, लेकिन क्या कीमत चुकानी पड़ी? पूरा एक युग ही खत्म हो गया।
आखिरी बात
गांधारी की कहानी सिर्फ एक चरित्र नहीं, एक सबक है। एक माँ का दर्द, एक पत्नी का त्याग, और फिर वो श्राप… सब मिलाकर हमें यही सिखाता है कि भावनाओं पर काबू रखना कितना ज़रूरी है। क्या आपको नहीं लगता कि अगर गांधारी ने श्राप न दिया होता, तो कहानी कुछ और होती?
लोग अक्सर पूछते हैं (FAQ)
1. गांधारी ने आँखों पर पट्टी क्यों बाँधी? सच्ची वजह क्या थी?
देखिए, ये प्यार था या कर्तव्य? गांधारी ने अपने अंधे पति के साथ एकरूप होने के लिए ऐसा किया। आज के ज़माने में ये बात थोड़ी अजीब लगती है, लेकिन तब के समय में ये बहुत बड़ा त्याग माना जाता था।
2. क्या सच में गांधारी के श्राप से यादव मरे?
ये तो chicken and egg जैसा सवाल है। श्राप ने गति ज़रूर दी, लेकिन असल में तो यादव खुद ही लड़कर मरे। कहने का मतलब, श्राप बहाना था या असली वजह?
3. शकुनि इतना बुरा क्यों था?
असल में शकुनि के पीछे भी एक दर्द भरी कहानी है। पांडवों ने उसके परिवार को मारा था। बदले की ये आग उसने पूरे कुरुवंश को जलाकर रख दी। सही था? बिल्कुल नहीं। लेकिन समझ तो आता है न?
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com
