महागठबंधन की बैठक: सहनी का गायब होना और चाय की दुकानों पर चर्चा!
अरे भई, बिहार की राजनीति में तो मसाला कभी खत्म ही नहीं होता! 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और वामदल वगैरह) की बैठक हुई, और सच कहूं तो ये बैठक उतनी ही दिलचस्प रही जितनी कि पटना की गर्मियों में लस्सी। तेजस्वी यादव ने राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान का ऐलान तो कर दिया, लेकिन असली चर्चा तो HAM के मुकेश सहनी के नदारद होने को लेकर है। क्या आपको नहीं लगता कि ये कोई साधारण बात नहीं है?
पिछली हार और अब की तैयारी: क्या सबक सीखा?
2020 में NDA के हाथों मिली हार के बाद तो महागठबंधन को झटका लगा था ना? अब 2025 में फिर से मौका है, लेकिन देखिए ना – एक तरफ तो साथ खड़े होने की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सहनी जी NDA के साथ गप्पें मारते नजर आ रहे हैं। अब आप ही बताइए, जब दोस्त ही साथ न दे तो गठबंधन कैसे चलेगा? सच्चाई ये है कि बिहार की राजनीति में आजकल कोई भरोसे का नहीं!
बैठक के फैसले: यात्रा तो ठीक, पर सीटें?
बैठक में तेजस्वी की यात्रा का ऐलान तो हुआ – अच्छी बात है। जनता से मिलेंगे, समस्याएं सुनेंगे, वोट मांगेंगे… सब चलता है। लेकिन असली मसला तो सीट बंटवारे का है ना? कांग्रेस वालों ने तो जैसे हाथ फैला दिए हैं – “हमें ज्यादा सीट चाहिए!” RJD वाले भला कैसे मान जाएंगे? और फिर सहनी जी का ये नखरा… सच कहूं तो ये सब मिलकर एक बढ़िया पोलिटिकल ड्रामा बना रहे हैं।
नेताओं के बयान: किसने क्या कहा?
तेजस्वी यादव तो अपनी पुरानी रट लगा रहे हैं – “हम एकजुट हैं, बदलाव लाएंगे।” पर भईया, सहनी जी से बातचीत जारी है वाली लाइन तो बहुत पुरानी हो चुकी! कांग्रेस वाले तो सीधे धमकी दे रहे हैं – “सीट नहीं मिली तो हम…” विश्लेषकों की राय? सरल शब्दों में कहें तो – “यार, सहनी का NDA में जाना तो गठबंधन के लिए बुरी खबर होगी। बिल्कुल बुरी।”
अब आगे क्या? चाय की दुकान से विश्लेषण!
अब तो पूरा बिहार सहनी जी के अगले कदम का इंतज़ार कर रहा है। NDA में जाएंगे या नहीं? ये सवाल हर चाय की दुकान पर चर्चा का विषय बना हुआ है। और RJD-कांग्रेस का झगड़ा? वो तो लगता है बढ़ेगा ही। असली सवाल ये है कि तेजस्वी की यह यात्रा और ये सारे दावे-प्रतिदावे आखिरकार जनता को कितना प्रभावित कर पाएंगे। क्योंकि अंततः तो वोट बैंक ही राज करता है ना?
तो क्या होगा अगला? बैठक तो हुई, रणनीति बनी, लेकिन सहनी का गायब होना और कांग्रेस का रुख… ये सब मिलाकर एक नया संकट खड़ा कर दिया है। अब देखना है कि ये राजनीतिक शतरंज का खेल किसके पक्ष में होता है। एक बात तो तय है – बिहार की राजनीति में अगले कुछ महीने बड़े मजेदार होने वाले हैं!
यह भी पढ़ें:
- Indian Politics News
- Indian Political News
- Aimim Grand Alliance Offer Rjd Rejection Bihar Election Politics
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com
