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मालेगांव ब्लास्ट केस: पूर्व ATS अफसर महबूब का बड़ा खुलासा – “मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का मिला था आदेश!”

मालेगांव ब्लास्ट केस: पूर्व ATS अफसर का बयान बना बमबारी – “मोहन भागवत को गिरफ्तार करो, ऐसा आदेश मिला था!”

अरे भई, 2008 का वो मालेगांव ब्लास्ट केस फिर से चर्चा में है। और इस बार ऐसा खुलासा हुआ है कि सुनकर दिमाग घूम जाए! महाराष्ट्र ATS के पूर्व अफसर महबूब मुजावर ने तो बता दिया कि जांच के दौरान उन्हें RSS प्रमुख मोहन भागवत को पकड़ने का आदेश मिला था। है ना हैरान कर देने वाली बात? सबसे मजे की बात ये कि भागवत जी का नाम तो आरोपियों की लिस्ट में भी नहीं था। सच कहूं तो ये केस तो पहले से ही राजनीतिक गर्मागर्मी का मुद्दा रहा है, अब तो और भी मसालेदार हो गया है।

पूरा माजरा क्या है? 2008 में आखिर हुआ क्या था?

याद कीजिए 29 सितंबर 2008 का वो दिन… मालेगांव में हुए उस भीषण धमाके ने तो पूरे देश को हिला दिया था। 6 बेगुनाह मारे गए, 100 से ज्यादा घायल। बाद में तो एजेंसियों ने इसे “Hindu terror” का मामला बता दिया। साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन यहां ट्विस्ट ये कि बाद में NIA ने सबको बरी कर दिया! पर सवाल तो जांच प्रक्रिया पर उठते ही रहे। कई लोगों को लगता है कि ये पूरा केस ही राजनीति से प्रेरित था।

अब नया बम फोड़ा: पूर्व ATS अफसर ने क्या कहा?

अब जरा महबूब मुजावर साहब के हालिया इंटरव्यू पर गौर कीजिए। उनका कहना है कि उन्हें मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का मौखिक आदेश मिला था! सोचिए जरा… भागवत जी का नाम तो चार्जशीट में भी नहीं था, फिर भी गिरफ्तारी का आदेश? मुजावर साफ कह रहे हैं कि जांच पर राजनीतिक दबाव साफ दिख रहा था। और तो और, उनके मुताबिक कुछ लोगों को जानबूझकर फंसाया गया। बिल्कुल सही वक्त चुना है इस खुलासे के लिए – 2024 के चुनावों की तैयारियों के बीच!

राजनीति गरमाई: कौन क्या बोला?

इस खुलासे ने तो राजनीति की हवा ही बदल दी है। RSS और BJP वाले इसे “झूठ और भ्रम फैलाने वाला” बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस और विपक्ष तो मानो जैसे नया हथियार मिल गया हो – वो पुनर्जांच की मांग करने लगे हैं। सोशल एक्टिविस्ट्स का कहना है कि ये साबित करता है कि सच्चाई को दबाने की कोशिश हुई थी। और तो और, कुछ लोगों को लग रहा है कि ये मामला फिर से Hindu terror vs Islamic terror की बहस को जन्म दे सकता है। मजेदार बात ये कि ये सब चुनावों से ठीक पहले हो रहा है!

आगे क्या? इसका असर क्या होगा?

अब सवाल ये उठता है कि आगे क्या होगा? क्या NIA या सुप्रीम कोर्ट नई जांच का आदेश देगी? क्या मोहन भागवत और RSS की छवि पर कोई असर पड़ेगा? खासकर 2024 के चुनावों से ठीक पहले? राजनीति के जानकार तो यही कह रहे हैं कि ये मामला आने वाले दिनों में और सुर्खियां बटोरेगा। विपक्ष तो इसे सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करने से रहने वाला नहीं।

अंत में: सच कहां छुपा है?

देखिए, मालेगांव केस में ये नया खुलासा तो बिल्कुल बम की तरह गिरा है। अब ये सिर्फ एक आतंकवादी घटना नहीं रह गई है। ये तो राजनीतिक खेल, एजेंसियों पर दबाव और सच्चाई को दबाने की कहानी बन चुकी है। असली सवाल ये है कि क्या इस बार निष्पक्ष जांच होगी? या फिर ये मामला भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा? एक बात तो तय है – आने वाले दिनों में और भी कई खुलासे होने वाले हैं, जो देश की राजनीति को हिला सकते हैं। क्या आप तैयार हैं इस सच्चाई का सामना करने के लिए?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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