मालेगांव ब्लास्ट केस: साध्वी प्रज्ञा का वो बयान जिसने सबको हिला दिया!
अरे भई, कभी-कभी राजनीति में ऐसी बातें सामने आती हैं जो सुनकर दिमाग ही सुन्न हो जाता है। साध्वी प्रज्ञा का ये नया बयान तो ऐसा ही है – “मोदी-योगी का नाम लो, तुम्हें नहीं मारेंगे”। सच कहूं तो पहले तो मुझे भी यकीन नहीं हुआ। पर जब से ये खबर आई है, सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकान तक, हर जगह बस यही चर्चा है।
वो काला दिन जिसे कोई भूल नहीं पाया
2008 का मालेगांव ब्लास्ट। उस दिन का जिक्र आते ही आज भी लोगों की रूह कांप जाती है। 6 मासूमों की जान चली गई, 100 से ज्यादा घायल। है ना दिल दहला देने वाली बात? और फिर जांच में सामने आया कि ये कोई आम धमाका नहीं, बल्कि… खैर, आप समझ ही रहे होंगे। साध्वी प्रज्ञा समेत कई लोगों को पकड़ा गया। पर सच तो ये है कि आज तक ये केस पहेली बना हुआ है। कुछ रिहा हो गए, कुछ की कहानी अभी भी कोर्ट-कचहरी में फंसी है।
“मोदी-योगी का नाम लो…” – ये सुनकर क्या आपको भी झटका लगा?
मैं तो सच कहूं, जब ये बयान सामने आया तो मेरा दिमाग थोड़ा सा घूम गया। सोचिए, जेल में बैठी एक महिला ये दावा कर रही है कि उनसे कहा गया – नाम लो और छूट जाओगी! अब सवाल ये उठता है कि क्या ये सच है? या फिर ये सिर्फ सुर्खियों में आने का तरीका है? हालांकि, एक बात तो तय है – इसने राजनीति के तापमान को अचानक बढ़ा दिया है।
राजनीति गरमाई, ट्विटर तो जलने लगा!
अब देखिए न, एक तरफ कांग्रेस वाले चिल्ला रहे हैं – “इसकी जांच होनी चाहिए!” वहीं भाजपा वालों का कहना है – “ये सब झूठ है!” और ट्विटर? अरे भई, वहां तो माहौल ऐसा है जैसे दिवाली हो गई हो! हर कोई अपनी-अपनी राय थोप रहा है। मानवाधिकार वालों ने भी अपनी चिंता जताई है। पर असल सवाल तो ये है कि इन सबके बीच सच कहाँ है? क्या हम कभी जान पाएंगे?
आगे क्या? 2024 के चुनावों पर असर पड़ेगा क्या?
देखा जाए तो ये केस अब सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं रहा। ये तो राजनीति का हथियार बन चुका है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अदालत को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। और हां, 2024 के चुनावों में ये मुद्दा जरूर उछाला जाएगा – ये तो तय है।
अंत में बस इतना ही – सच क्या है, ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात तो साफ है – ये मामला अब और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है। क्या आपको नहीं लगता?
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मालेगांव ब्लास्ट केस और साध्वी प्रज्ञा का बयान – जानिए पूरी कहानी
मालेगांव ब्लास्ट केस क्या है? और साध्वी प्रज्ञा का इसमें क्या हाथ था?
याद है वो 2008 का वक्त? मालेगांव में हुए उस धमाके ने पूरे देश को हिला दिया था। 6 बेगुनाह लोगों की जान चली गई… और फिर शुरू हुई एक ऐसी कहानी जिसमें साध्वी प्रज्ञा का नाम सबसे ऊपर आया। उन पर आरोप लगा कि वो इस पूरे हमले की मास्टरमाइंड थीं। लेकिन यहाँ सच क्या है? क्योंकि आखिरकार तो उन्हें बरी ही कर दिया गया। क्या सच में सबूत नहीं थे, या फिर कुछ और ही चल रहा था?
“मोदी-योगी का नाम लो…” – साध्वी प्रज्ञा का ये बयान क्यों चर्चा में है?
अब ये बात तो आपने भी सुनी होगी। साध्वी प्रज्ञा ने दावा किया कि उनसे कहा गया – “मोदी-योगी का नाम लो, नहीं तो…”। भईया, ये सुनकर तो किसी का भी दिमाग घूम जाए! क्या सच में ऐसा हुआ था? उनका कहना है कि उन्हें फ्रेम किया जा रहा था, मीडिया ट्रायल हो रहा था। पर सवाल ये है कि अगर ऐसा था, तो फिर क्यों? किसको क्या फायदा होना था? गंभीर सवाल हैं ये…
क्या सच में साध्वी प्रज्ञा पूरी तरह बरी हो चुकी हैं?
ऑफिशियली तो हाँ। 2017 में NIA कोर्ट ने उन्हें सारे आरोपों से मुक्त कर दिया। कोर्ट का कहना था – “भई, सबूत ही कहाँ हैं?” लेकिन आप जानते हैं न, भारत में कानूनी प्रक्रियाएं कैसी होती हैं। क्या ये फैसला अंतिम है? क्या इस पर कोई और अपील हो सकती है? देखते हैं आगे क्या होता है।
आज तक का स्टेटस क्या है? क्या अब भी चल रहा है केस?
देखिए, तकनीकी रूप से तो मुख्य केस अभी भी चल ही रहा है। साध्वी प्रज्ञा और कुछ अन्य तो बरी हो चुके हैं, लेकिन NIA अभी भी बाकी आरोपियों के पीछे पड़ी हुई है। असल में ये केस इतना पेचीदा है कि… सच कहूँ तो आम आदमी के लिए समझ पाना मुश्किल है। एक तरफ तो न्याय की प्रक्रिया चल रही है, दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप। क्या कभी सच सामने आएगा? वक्त ही बताएगा।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com