सांसद मनीष तिवारी ने कांग्रेस को लेकर क्या बोला? भारत की बात करने वालों को ही भारत नहीं सुन रहा!
अरे भई, कांग्रेस के बड़े नेता और सांसद मनीष तिवारी फिर से सुर्खियों में हैं। और इस बार? अपनी ही पार्टी पर तीर चलाते हुए! असल बात ये है कि संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बोलने का मौका नहीं मिला तो तिवारी जी ने X (पहले वाला Twitter) पर एक ऐसा पोस्ट किया जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। सच कहूं तो, ये कोई नई बात नहीं – कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े तो अब खुले राज़ हैं।
ऑपरेशन सिंदूर: पूरा माजरा क्या है?
देखिए न, सारा विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय सेना की एक गोपनीय योजना लीक हुई। विपक्ष को लगा कि ये सरकार पर हमला बोलने का सुनहरा मौका है। पर यहाँ मजा तब हुआ जब कांग्रेस ने तो संसद में मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन अपने ही वरिष्ठ नेताओं को बोलने नहीं दिया! अजीब बात है न?
तिवारी जी तो लंबे समय से पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते आ रहे हैं। उनका मानना है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी को और सख्त रुख अपनाना चाहिए। पर सुनता कौन है? पहले भी वो नेतृत्व से असहमत हो चुके हैं, लेकिन इस बार तो सीधे social media पर आ गए। बस, फिर क्या था – आग में घी डालने जैसा हो गया!
वाह! तिवारी का वो ट्वीट जिसने मचाई खलबली
संसद में बोलने का मौका न मिला तो तिवारी जी ने X पर एक cryptic मैसेज डाला: “जब देश की बात हो, तो पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सोचना चाहिए।” सीधी सी बात है – निशाना साफ कांग्रेस नेतृत्व पर था!
अब पार्टी में दो गुट बन गए। एक तरफ वो जो इसे ‘अनुशासनहीनता’ बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि तिवारी सही सवाल उठा रहे हैं। मतलब साफ है – अंदरूनी टकराव खुलकर सामने आ गया।
राजनीति गरमाई, पर कांग्रेस चुप क्यों?
दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। हालांकि, कुछ नेताओं ने (बिना नाम बताए) कहा कि “ऐसे मामले सार्वजनिक मंच पर नहीं उठाने चाहिए।” वहीं BJP ने तो मौका ही देख लिया – उनका कहना है कि “ये कांग्रेस की बिगड़ती हालत को दिखाता है।”
social media पर तो मामला गर्म है ही। कुछ लोग तिवारी को सच्चा देशभक्त बता रहे हैं, तो कुछ उनपर विवाद पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं। political experts कह रहे हैं कि ये कांग्रेस में चल रही गुटबाजी का एक और उदाहरण है।
अब आगे क्या? क्या होगा तिवारी का?
अब सवाल ये है कि कांग्रेस आगे क्या करेगी? दिल्ली की सियासी गपशप ये कह रही है कि शायद तिवारी के खिलाफ कार्रवाई हो। पर एक बड़ा सवाल ये भी है – क्या ये सब आने वाले चुनावों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगा?
मेरी निजी राय? ये पूरा मामला उस बड़े सवाल को फिर से उठाता है जो हमारी राजनीति में सालों से है – क्या पार्टी लाइन देश के हित से ऊपर होनी चाहिए? तिवारी ने जिस तरह ये सवाल उठाया है, वो आने वाले दिनों में ज़रूर चर्चा में रहेगा। और हम? हम तो बस तमाशा देखने वाले हैं!
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अरे भाई, राजनीति में तो रोज कुछ न कुछ होता रहता है। लेकिन जब कोई पुराना घोड़ा नई रफ्तार से दौड़े, तो बात बन जाती है। सांसद मनीष तिवारी का कांग्रेस पर हमला कुछ ऐसा ही है। तो चलिए, बिना समय गंवाए समझते हैं पूरा माजरा…
1. सांसद मनीष तिवारी ने कांग्रेस को लेकर क्या उल्टा-सीधा बोल दिया?
देखिए, तिवारी साहब ने तो जैसे कांग्रेस पर पूरी की पूरी थाली उलट दी है! उनका कहना है कि पार्टी “देश की आवाज़ सुनने को तैयार ही नहीं” – यानी जनता की बात एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देती है। और तो और, leadership से लेकर policies तक पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। बात-बात में ignore करने का आरोप… सच कहूं तो काफी सख्त टिप्पणी है।
2. भईया, ये मनीष तिवारी आखिर कांग्रेस के साथ किस रिश्ते में थे?
असल में कहानी ये है कि तिवारी जी कभी खुद कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार होते थे। Senior leader का दर्जा, सब कुछ था। लेकिन जैसे बॉलीवुड की फिल्मों में होता है – एक दिन सब छोड़कर चले गए। अब? अब तो BJP के ticket पर सांसद हैं। राजनीति में यारी-दुश्मनी सब चलता रहता है, है न?
3. सुनो, कांग्रेस वालों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ऑफिशियली तो कांग्रेस ने अभी तक मुंह नहीं खोला है। लेकिन social media पर कुछ नेताओं ने जरूर जमकर जवाब दिया है। “बेबुनियाद”, “पुराने राग” जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। मजे की बात ये कि ये सारी बहस ट्विटर और फेसबुक पर हो रही है – आजकल की राजनीति का असली मैदान!
4. यार, इतना बवाल क्यों? आखिर इस विवाद में ऐसा क्या खास है?
अच्छा सवाल पूछा! दरअसल ये कोई आम झगड़ा नहीं है। सोचिए – जो लोग कभी पार्टी के अंदरूनी हलकों में थे, वही अब खुलेआम criticism कर रहे हैं। ये तो वैसा ही है जैसे कोई पुराना शेफ अपने ही रेस्तरां के खाने को बेस्वाद बताए! Image पर असर तो पड़ेगा ही… और future की बात? वो तो अभी देखना बाकी है।
फिलहाल तो यही कहा जा सकता है – राजनीति में कुछ भी fixed नहीं होता। आज जो बातें हो रही हैं, कल को उनका कोई और ही मतलब निकाला जाएगा। क्या पता, अगले हफ्ते कुछ नया सामने आ जाए! है न?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com