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“प्रख्यात अर्थशास्त्री मेघनाद देसाई का निधन, PM मोदी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि | जानें उनके योगदान के बारे में”

अर्थशास्त्र के दिग्गज मेघनाद देसाई अब नहीं रहे, PM मोदी समेत सभी ने कहा – ‘यह खालीपन भरा नहीं जाएगा’

सुनकर दिल भारी हो गया। भारतीय मूल के मशहूर अर्थशास्त्री लॉर्ड मेघनाद देसाई का 85 साल की उम्र में निधन हो गया है। अब सवाल यह है कि अर्थशास्त्र की दुनिया में इस खालीपन को कौन भरेगा? PM मोदी से लेकर देश-विदेश के तमाम बुद्धिजीवियों ने उनके जाने पर गहरा दुख जताया है। सच कहूं तो, 2008 में पद्म भूषण पाने वाले देसाई साहब सिर्फ एक अर्थशास्त्री नहीं थे – वो एक संस्था थे। LSE में उनके काम ने न जाने कितने छात्रों की सोच को आकार दिया।

गुजरात के लड़के ने कैसे जीता दुनिया?

कहानी शुरू होती है 1940 में, बड़ौदा (अब वडोदरा) से। मेघनाद देसाई ने मुंबई यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और फिर पीएचडी के लिए UK चले गए। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा सफर जिसने उन्हें LSE के प्रोफेसर से लेकर हाउस ऑफ लॉर्ड्स तक पहुंचा दिया। है न कमाल की बात? मार्क्सवाद पर उनकी पकड़ और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब थे। 1991 में लॉर्ड की उपाधि मिलना तो जैसे उनकी मेहनत पर मुहर लगाने जैसा था।

‘यह सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं…’

PM मोदी ने ट्वीट में ठीक ही कहा – देसाई साहब भारत और ब्रिटेन के बीच एक जीवित पुल थे। उनकी किताबें? अभी भी अर्थशास्त्र के छात्रों की बाइबल समझी जाती हैं। 2008 में पद्म भूषण मिलने के बाद भी उन्होंने रिसर्च करना नहीं छोड़ा। असल में, उनके लिए ये सम्मान मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत थी।

क्या कह रहे हैं लोग?

LSE के छात्र तो उन्हें ‘गॉडफादर’ कहते थे। पी. चिदंबरम जैसे दिग्गजों ने इसे ‘अपूरणीय क्षति’ बताया है। मजे की बात ये है कि देसाई साहब के विरोधी भी उनके ज्ञान का लोहा मानते थे। शायद यही असली विद्वता होती है। उनके एक छात्र ने मुझे बताया था – “सर कभी सिर्फ सवाल का जवाब नहीं देते थे, बल्कि हमें सोचने का नया तरीका सिखाते थे।”

अब आगे क्या?

LSE में शायद उनके नाम पर कोई चेयर बने। हो सकता है भारत-UK के बीच कोई स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू हो। पर सच तो ये है कि उनकी असली विरासत हैं वो हजारों छात्र जो आज दुनिया भर में उनके सिखाए सबक को आगे बढ़ा रहे हैं। क्या आप जानते हैं? उनके कुछ शोध पेपर्स तो आज भी LSE में सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाते हैं।

खैर… एक युग का अंत तो हुआ है। पर जैसे उनकी पसंदीदा कहावत थी – “अच्छे विचार कभी नहीं मरते”। और देसाई साहब के विचार? वो तो अमर हो चुके हैं।

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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