पाकिस्तान की नींद उड़ा देगा ये सावलकोट प्रोजेक्ट! मोदी सरकार का बड़ा दांव
अरे भाई, क्या बात है! मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट के सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। सच कहूं तो ये सिर्फ बिजली का मामला नहीं है…ये तो एक तरह से पाकिस्तान को सीधा चुनौती है। वो भी पानी के मोर्चे पर! अब सोचिए, जिस पानी को लेकर पाकिस्तान हमेशा रोता रहता है, उसी पर भारत अब पूरी तरह कंट्रोल करने जा रहा है।
ये सिंधु जल समझौता वाला मामला क्या है?
देखिए, 1960 का वो सिंधु जल समझौता तो आपने सुना ही होगा। नहीं सुना? कोई बात नहीं, समझाता हूँ। असल में ये समझौता भारत-पाक के बीच हुआ था जिसमें चिनाब जैसी नदियों का पानी पाकिस्तान को मिलता है। लेकिन यहाँ ट्विस्ट ये है कि भारत को बिजली बनाने का पूरा हक है। और हमने इसका पूरा फायदा उठाया भी – किशनगंगा, रातले जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ। पाकिस्तान ने विरोध किया था न? लेकिन अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने उनकी एक न सुनी। अब ये सावलकोट प्रोजेक्ट तो गेम चेंजर साबित हो सकता है।
पाकिस्तान क्यों है परेशान?
सीधी सी बात है भाई – 1,856 मेगावाट! यानी जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब तक की बिजली की जरूरतें पूरी। लेकिन पाकिस्तान वालों को लगता है कि उनके किसानों को पानी नहीं मिलेगा। सच्चाई? भारत सिर्फ पानी का बहाव रोककर बिजली बनाएगा, पानी तो उन्हें मिलता रहेगा। पर सुनने को तैयार कौन है? पाकिस्तान तो बस “समझौता उल्लंघन” का राग अलाप रहा है।
दोनों तरफ की राजनीति
भारतीय नेताओं का कहना साफ है – “हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा चाहिए”। वहीं पाकिस्तानी मीडिया तो मानो प्रलय का दृश्य बता रही है। एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं? सच तो ये है कि ये प्रोजेक्ट भारत के लिए जरूरी है, लेकिन हां…रिश्तों में तनाव बढ़ेगा जरूर।
अब आगे क्या?
अब देखना ये है कि पाकिस्तान क्या करता है। विश्व बैंक में शिकायत? कोर्ट का दरवाजा खटखटाना? वैसे भारत तो अपने काम में लगा हुआ है – जल्द से जल्द प्रोजेक्ट पूरा करने की फिराक में। एक बात तो तय है…ये मामला अभी और सुर्खियाँ बटोरेगा।
आखिरी बात: सावलकोट प्रोजेक्ट भारत की ताकत बढ़ाने वाला कदम है। पाकिस्तान को परेशानी होगी? जरूर। लेकिन क्या वो कुछ कर पाएगा? वक्त बताएगा। फिलहाल तो ये मामला बिल्कुल उस कहावत जैसा है – “हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार!”
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

