क्या मोदी सच में अमेरिका के आगे झुक गए? ‘Never Compromise’ वाली बात तो याद है ना?
अरे भई, अमेरिका वालों ने फिर से हमारे साथ खेल शुरू कर दिया है! ट्रंप साहब ने भारतीय स्टील और एल्युमिनियम पर 25% ज्यादा टैक्स लगाने का ऐलान कर दिया। सच कहूं तो, ये कोई नई बात नहीं – ये लोग तो ऐसे ही रहते हैं। लेकिन असली सवाल ये है कि क्या मोदी सरकार इस बार भी अपने ‘कभी न झुकने वाले’ रुख पर कायम रहेगी? या फिर… अबकी बार कुछ और ही देखने को मिलेगा?
पूरा माजरा समझिए: ये तनाव तो चलता ही रहता है
देखिए, भारत और अमेरिका का ये झगड़ा कोई आज कल की बात नहीं। पिछले कुछ सालों से ये टैरिफ वाली टेंशन चल रही है। पर इस बार अमेरिका ने जो किया, वो थोड़ा ज्यादा ही हो गया। हमें ‘विकासशील देश’ का दर्जा तक छीन लिया! सच बताऊं? हमने पहले भी इनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई की थी, लेकिन अबकी बार मामला गंभीर लग रहा है। क्या आपको नहीं लगता?
ताजा अपडेट: अभी क्या-क्या चल रहा है?
तो स्थिति ये है कि ट्रंप ने टैरिफ बढ़ा दिए, और हमारे यहाँ के उद्योगपति परेशान हो रहे हैं। सरकार ने अभी तक कुछ खुलकर नहीं कहा – शायद कोई चुपके से बातचीत चल रही होगी। मुझे लगता है कि शायद कोई नया deal तैयार हो रहा हो। वैसे भी, ये सब इतना आसान नहीं होता ना? एक दिन में तो कुछ नहीं होने वाला।
राजनीति वालों की राय: हर कोई अपना-अपना राग अलाप रहा
अब जैसा कि होता ही है – राजनीति वाले तो मौके की ताक में ही बैठे रहते हैं। राहुल गांधी जी तुरंत बोल पड़े कि “मोदी जी ने घुटने टेक दिए”। भाजपा वाले कह रहे हैं कि ये सब प्लान के तहत हो रहा है। और बिचारे व्यापारी? उनकी तो चिंता देखिए – छोटे-मझोले कारोबारियों की नींद हराम हो गई है। सच कहूं तो, हर कोई अपने-अपने तरीके से सही लगता है। आप किसकी बात मानेंगे?
आगे क्या होगा? क्रिस्टल बॉल में देखते हैं!
अब बड़ा सवाल ये कि आगे क्या? अगर हम भी टैरिफ बढ़ाएं, तो पूरा व्यापार युद्ध छिड़ सकता है। यूरोप और चीन वालों से दोस्ती बढ़ाने का विकल्प भी है… पर ये सब इतना आसान थोड़ी है! फिलहाल तो सभी की नजरें उन गुप्त बैठकों पर हैं जो शायद चल रही हैं। क्या पता, कोई ऐसा समझौता हो जाए जिससे सब खुश हो जाएं? वैसे मेरा मानना है कि…
आखिरी बात: ये पूरा मामला सिर्फ टैरिफ से ज्यादा बड़ा है। ये हमारी अंतरराष्ट्रीय पहचान का सवाल है। मोदी जी के लिए ये बैलेंसिंग एक्ट से कम नहीं – एक तरफ ‘Never Compromise’ वाली इमेज, दूसरी तरफ व्यावहारिक राजनीति। क्या वो इस पार पार कर पाएंगे? वक्त बताएगा। पर एक बात तो तय है – ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई!
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Source: Financial Times – Global Economy | Secondary News Source: Pulsivic.com