MTA की सबवे लाइन का आधुनिकीकरण: बजट बढ़ा, समय बीता, और तकनीक भी पुरानी हो गई!
अरे भाई, न्यूयॉर्क की Metropolitan Transportation Authority (MTA) वालों का तो क्या ही कहना! उनकी सबवे लाइन के आधुनिकीकरण वाले प्रोजेक्ट पर जो हालात बने हुए हैं, सुनकर आपका भी सिर हिल जाएगा। एक स्वतंत्र रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि यह प्रोजेक्ट अपने बजट से 77 मिलियन डॉलर (यानी लगभग 640 करोड़ रुपये!) ज्यादा खर्च कर चुका है। और हां, समयसीमा? वो तो कब की फ्लाइट पकड़ चुकी है। सबसे मजेदार बात? जिस नई टेक्नोलॉजी को लगाने का प्रयास हो रहा है, वो तो खुद ही पुरानी होती जा रही है। अब बताइए, ये कैसी आधुनिकता?
कहानी शुरू से: एक सपना जो बन गया सिरदर्द
देखिए, कहानी तो काफी पुरानी है। MTA ने सालों पहले यह प्रोजेक्ट शुरू किया था – वादा था सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद सबवे सिस्टम का। प्लान था पुराने सिग्नल सिस्टम को हटाकर Communication-Based Train Control (CBTC) जैसी मॉडर्न टेक्नोलॉजी लगाने का। लेकिन…हमेशा की तरह एक ‘लेकिन’ तो आना ही था। नौकरशाही की जटिलताएं, तकनीकी दिक्कतें और बढ़ती लागत ने मिलकर इस प्रोजेक्ट को बुरी तरह धीमा कर दिया। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि शुरुआत में ही प्लानिंग में कमियां थीं। पर सुधार? वो तो दूर की कौड़ी रह गई।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले पॉइंट्स: पढ़कर रह जाएंगे दंग
अब इस रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो सच में चिंताजनक हैं। पहला और सबसे बड़ा मुद्दा – पैसा! 77 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च…ये तो सीधे करदाताओं की जेब पर वार है। दूसरा – समय की बर्बादी। प्रोजेक्ट तो इतना पीछे है कि शायद अब तक पूरा हो जाना चाहिए था। और तीसरा, सबसे विडंबनापूर्ण – जिस टेक्नोलॉजी को लागू करने में इतना समय और पैसा लग रहा है, वो खुद ही obsolete हो रही है। यानी जब तक यह सिस्टम चलेगा, तब तक दुनिया आगे निकल चुकी होगी। क्या आपको नहीं लगता कि ये सब सुनकर कोई भी परेशान हो जाए?
प्रतिक्रियाओं का दौर: MTA बोली ‘समीक्षा कर रहे हैं’, जनता बोली ‘बहुत हो चुका!’
इस रिपोर्ट के बाद तो हर तरफ प्रतिक्रियाओं का तूफान आ गया है। MTA के प्रवक्ता का कहना है कि वे “मामले को गंभीरता से ले रहे हैं”। अरे भई, अब तक तो ले ही लेना चाहिए था! वहीं यात्री संघों ने तो जमकर आग उगल दी है। एक प्रतिनिधि का कहना है, “इस तरह की लगातार लापरवाही से जनता का भरोसा टूट रहा है।” और सही भी तो कह रहे हैं। नगर नियंत्रक ने भी जांच की घोषणा कर दी है। शायद अब कुछ एक्शन होगा?
आगे क्या? अब तो बस यही सवाल बचा है
तो अब सवाल यह है कि आगे का रास्ता क्या होगा? विश्लेषक कह रहे हैं कि MTA को नए सिरे से प्लान बनाना होगा – एक ऐसा प्लान जो वास्तविक हो, न कि हवाई किले बनाने वाला। समयसीमा और बजट दोनों पर कड़ी नजर रखनी होगी। स्वतंत्र एजेंसियां शायद और गहराई से जांच करेंगी। अगर जल्दी ही कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। और फिर? फिर तो न केवल और पैसा बर्बाद होगा, बल्कि लाखों यात्रियों को लंबे समय तक परेशानियां झेलनी पड़ेंगी। देखते हैं आगे क्या होता है…हम तो बस इतना कहेंगे – MTA, जाग जाओ भई!
Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com