पड़ोसियों ने नशे में धुत करके महिला की इज्ज़त लूटी… और फिर वो वीडियो वाला काला धंधा!
बांग्लादेश में एक हिंदू महिला के साथ जो हुआ, सुनकर दिल दहल जाता है। सच कहूँ तो ये केस सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत पर एक बड़ा सवालिया निशान है। पड़ोसियों ने उसे नशीला पेय पिलाया, बेहोश किया… और फिर? जो हुआ वो सोचकर ही रूह काँप जाती है। सामूहिक बलात्कार के बाद उसका अश्लील वीडियो बनाकर 8 लाख टका (लगभग 6 लाख भारतीय रुपये) की ब्लैकमेलिंग! हैरानी की बात तो ये है कि ये सब सिर्फ 35,000 टका के कर्ज़े को लेकर हुआ। क्या हमारे समाज में इंसान की कीमत अब इतनी कम रह गई है?
कहानी वो कर्ज़ की, अंजाम वो जिसकी कोई कल्पना भी न कर पाए
पीड़िता का परिवार गरीबी से जूझ रहा था – ऐसी गरीबी जहाँ रोटी के लाले पड़ जाते हैं। मजबूरी में उन्होंने पड़ोसियों से 35,000 टका उधार लिए। पर जब वापस नहीं दे पाए, तो धमकियाँ शुरू हो गईं। लेकिन किसने सोचा था कि ये धमकियाँ इतनी भयानक हिंसा में बदल जाएँगी? एक दिन तो जैसे नर्क टूट पड़ा – नशा, बेहोशी, और फिर वो जघन्य अपराध। सच कहूँ तो ये सिर्फ बलात्कार नहीं, बल्कि इंसानियत का कत्ल था। और फिर? वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का धंधा! क्या यही है हमारा समाज?
अब तक क्या हुआ? पुलिस एक्शन और सोशल मीडिया का तूफान
ख़बर सुनकर पुलिस ने कुछ आरोपियों को पकड़ा है। पर सवाल ये है कि क्या ये काफी है? पीड़िता का परिवार तो जैसे टूट चुका है – मीडिया के सामने आकर वो सिर्फ न्याय की गुहार कर रहे हैं। और सोशल मीडिया? वहाँ तो आग लगी हुई है। लोग सड़कों पर उतरने की बात कर रहे हैं। प्रशासन ने त्वरित न्याय का वादा किया है… पर हम सब जानते हैं न कि अक्सर ये वादे कहाँ तक पूरे होते हैं?
वो दर्द भरी आवाज़: “हमें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि…”
पीड़िता के पिता की आवाज़ काँप रही थी जब उन्होंने कहा: “हम गरीब हैं… हिंदू हैं… इसलिए हमारे साथ ये सब हो सका।” स्थानीय नेताओं ने भी इसकी निंदा की है, पर क्या सिर्फ निंदा करने से काम चलेगा? मानवाधिकार संगठनों ने तो सीधा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं? खासकर हिंदू समुदाय?
आखिर क्या मिलेगा इंसाफ? या फिर ये केस भी ‘फाइल’ हो जाएगा?
पुलिस कह रही है कि जल्द सभी आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। पर हम भारत में रहने वाले जानते हैं न कि अक्सर ऐसे मामलों में क्या होता है? शुरुआत में तो बहुत हल्ला होता है, फिर धीरे-धीरे सब शांत… और फिर? केस फाइलों में दब जाता है। लेकिन इस बार सोशल मीडिया का दबाव अलग है। शायद… बस शायद ही इस बार पीड़िता को इंसाफ मिल पाए।
एक बात तो तय है – ये घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक नैतिक विफलता है। जब तक गरीबों, अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा होता रहेगा… तब तक हम सभ्य समाज होने का दावा कैसे कर सकते हैं? सोचने वाली बात है…
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ये घटना सिर्फ़ एक और ख़बर नहीं है, बल्कि हमारे सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर देती है – क्या हमारे समाज में महिलाएं वाकई सुरक्षित हैं? और देखा जाए तो, ये सिर्फ़ फ़िज़िकल सेफ्टी का मसला नहीं है। आजकल तो डिजिटल दुनिया में भी ख़तरा कम नहीं। Facebook, WhatsApp पर ठगी से लेकर online harassment तक – स्थिति गंभीर है।
अब सवाल ये है कि हम क्या कर सकते हैं? सबसे पहले तो, पीड़िता को न्याय मिलना ही चाहिए। पर सिर्फ़ इतना काफ़ी नहीं। ऐसे मामलों में सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए, वरना ये लोग बार-बार ऐसी हरकतें करते रहेंगे। एक तरह से ये हम सभी की ज़िम्मेदारी है – अगर कुछ ग़लत होता देखें, तो चुप न बैठें।
सच कहूँ तो, छोटी-छोटी सावधानियाँ भी बड़ा फ़र्क़ ला सकती हैं। थोड़ा alert रहें, अपने आस-पास हो रही किसी भी शक़ की बात को ignore न करें। और हाँ, अगर कुछ ग़लत लगे तो पुलिस को inform करने में देर न करें। #JusticeForHer तभी सच हो पाएगा जब हम सभी मिलकर इसके लिए कुछ करेंगे।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com
