एनवाई अपतटीय पवन परियोजना: जब मछुआरे और पर्यावरणविद एक ही मंच पर आ गए!
क्या आपने कभी सोचा था कि मछुआरे और पर्यावरणविद एक साथ खड़े हो सकते हैं? न्यूयॉर्क की यह wind energy परियोजना ऐसा ही कमाल कर दिखाया है। असल में, ये दोनों समूह अब एकजुट होकर इस परियोजना के खिलाफ लड़ रहे हैं। और वजह? उनका मानना है कि ये turbines समुद्र की ज़िंदगी और मछुआरों की रोज़ी-रोटी दोनों के लिए खतरा हैं। लॉन्ग आइलैंड के एक मछुआरा संघ के नेता ने तो बड़ा दिलचस्प बयान दिया – “हमने 10 साल पहले ही आगाह कर दिया था, पर सरकार को तब हमारी बात ‘फिशी’ लगी थी!”
क्या है पूरा माजरा?
देखिए, न्यूयॉर्क सरकार का ये प्रोजेक्ट उनकी clean energy योजना का बड़ा हिस्सा है। लक्ष्य है 2030 तक 70% renewable energy पहुँचाना। अच्छी बात है न? पर यहाँ दिक्कत ये है कि जहाँ ये wind turbines लगने हैं, वहीं पर मछुआरों का पारंपरिक काम चलता है। अब आप ही बताइए – बिजली ज़रूरी है, पर क्या लोगों की रोज़ी छीनकर?
और पर्यावरणविदों की बात सुनिए तो सिहरन होती है। उनका कहना है कि turbines की आवाज़ whales और dolphins जैसे समुद्री जीवों के लिए मौत का फरमान साबित हो सकती है। सच कहूँ तो, ये वाकई चिंता की बात है। हम climate change से लड़ने के चक्कर में कहीं समुद्र की पूरी इकोसिस्टम तो नहीं बिगाड़ रहे?
अब क्या हो रहा है?
मामला तब और गरमा गया जब मछवारों और पर्यावरण ग्रुप्स ने मिलकर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उनका आरोप है कि EIA रिपोर्ट (यानी पर्यावरण प्रभाव आकलन) में कई गड़बड़ियाँ हैं। सरकार तो अपनी रट लगाए हुए है कि सब scientific तरीके से हो रहा है। उनका दावा है कि marine life को बचाने के लिए खास measures लिए जा रहे हैं।
लेकिन यहाँ एक पेंच है। कुछ independent स्टडीज़ कह रही हैं कि turbines की low-frequency आवाज़ समुद्री जीवों को रास्ता भूलवा सकती है। ये ऐसा ही है जैसे आपको बिना GPS के अजनबी शहर में छोड़ दिया जाए। भटक जाएँगे न?
किसका सच, किसका झूठ?
एक तरफ मछुआरों का दर्द सुनिए: “हमारे बाप-दादा यही काम करते आए हैं। अब ये turbines हमारी रोज़ी और संस्कृति दोनों मिटा देंगे।” दूसरी ओर, एक marine biologist की चेतावनी: “Climate change से लड़ने के नाम पर हम समुद्र को मरने नहीं दे सकते।”
वहीं clean energy के पैरोकार कहते हैं – “कुछ tough choices तो लेने ही पड़ते हैं।” सच्चाई ये है कि दोनों पक्षों की बात में दम है। पर सवाल ये है कि balance कैसे बने? शायद middle path ही समाधान हो।
अब क्या?
सबकी नज़रें अब कोर्ट पर हैं। अगले कुछ हफ्तों में जो फैसला आएगा, वो सिर्फ न्यूयॉर्क ही नहीं, पूरे अमेरिका के लिए मिसाल कायम करेगा। अगर प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई, तो विरोध और तेज़ होगा। कुछ experts का मानना है कि design में बदलाव करके समझौता हो सकता है।
असल में, ये केस एक बड़ा सबक है – विकास और पर्यावरण के बीच तालमेल बिठाना कितना मुश्किल है। आखिरकार, सही रास्ता वही होगा जहाँ प्रगति और संरक्षण साथ-साथ चल सकें। जैसा कि कहते हैं – “बिना तबाह किए तरक्की करो।” पर क्या ये संभव है? वक्त बताएगा।
यह भी पढ़ें:
NY अपतटीय पवन परियोजना – वो सारे सवाल जो आप पूछना चाहते थे
1. ये NY वाली पवन चक्की वाली परियोजना है क्या बला? और लोग इसे लेकर इतना गरमा-गरम क्यों हो रहे हैं?
देखिए, सीधी बात ये है कि NY की ये अपतटीय पवन परियोजना एक clean energy का प्रोजेक्ट है जो समुद्र के बीच में विशालकाय wind turbines लगाकर बिजली बनाएगी। अच्छी बात है न? लेकिन…हमेशा की तरह एक ‘लेकिन’ तो होता ही है। असल मुद्दा ये है कि मछुआरे भाईयों और पर्यावरण प्रेमियों को लग रहा है कि इससे समुद्री जीवन और मछली पकड़ने का काम बर्बाद हो जाएगा। और सच कहूं तो, उनकी चिंता बिल्कुल बेबुनियाद भी नहीं है।
2. अच्छा, तो ये पवन चक्कियां मछुआरों के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती हैं?
बात ये है कि जब समुद्र के अंदर ये बड़े-बड़े turbines लगेंगे, तो मछलियों का natural habitat डिस्टर्ब होगा ही। सोचिए न, आपका घर अचानक किसी ने उखाड़ दिया तो? ठीक वैसे ही। नतीजा? मछलियां दूसरी जगह चली जाएंगी, fishing zones कम हो जाएंगे, और जिनकी रोजी-रोटी इसी पर निर्भर है, उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। सच में गंभीर मामला है।
3. पर्यावरणविदों को असल में क्या परेशान कर रहा है?
असल में उनकी चिंता और भी बड़ी है। वो कह रहे हैं कि ये turbines व्हेल, डॉल्फिन और seabirds जैसे समुद्री जीवों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। सोचिए तो, इतने बड़े पंखे (turbines) समुद्र में घूमेंगे, तो जाहिर है कुछ न कुछ असर तो पड़ेगा ही। सबसे बड़ी बात – वो इसके environmental impact assessment को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। और ईमानदारी से कहूं तो उनकी बात में दम भी है।
4. क्या कोई मध्यमार्ग निकाला जा सकता है? या फिर ये ‘या तो हम या वो’ वाली स्थिति है?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है! कुछ experts का मानना है कि अगर turbines को strategic locations पर लगाया जाए – यानी fishing zones से थोड़ा दूर, और marine life को protect करने के लिए सख्त guidelines बनाई जाएं, तो समस्या का समाधान हो सकता है। पर सबसे जरूरी बात? सभी stakeholders – यानी सरकार, कंपनियां, मछुआरे और पर्यावरणविद – मिलकर बातचीत करें। क्योंकि बिना बातचीत के तो कुछ भी possible नहीं है, है न?
Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com