एनवाईसी मिडटाउन शूटिंग: जब एक टूटी हुई ज़िंदगी ने दूसरों को तोड़ डाला
अमेरिका में एक और गोलीबारी। हैरानी की बात नहीं, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी दिल दहल गया। न्यूयॉर्क के उसी मिडटाउन में, जहां हमेशा भीड़ रहती है, 27 साल के शेन तामुरा ने जो किया, वो सिर्फ एक अपराध नहीं – एक टूटे हुए इंसान की दास्तान है। असल में देखा जाए तो ये कहानी दो मुद्दों की ओर इशारा करती है – मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी और हथियारों की आसान उपलब्धता। और दोनों ही अमेरिका के लिए बड़ी समस्या बन चुके हैं।
एक एथलीट जो खुद से हार गया
कहानी शुरू होती है एक प्रतिभाशाली एथलीट के तौर पर। शेन तामुरा। नाम सुनकर लगता है कोई सफल युवा होगा, है ना? लेकिन ज़िंदगी ने उसके साथ क्या किया… एक physical injury ने न सिर्फ उसके करियर को खत्म किया, बल्कि उसकी मानसिक हालत को भी बिगाड़ दिया। Depression? PTSD? ये सिर्फ शब्द नहीं हैं दोस्तों, ये वो दर्द है जो धीरे-धीरे इंसान को खोखला कर देता है। परिवार वाले बताते हैं कि वो treatment ले रहा था, लेकिन शायद वो काफी नहीं था। क्या हम मानसिक बीमारियों को अभी भी गंभीरता से नहीं लेते?
वो भयावह दिन: क्या हुआ था असल में?
तस्वीर ये है – मिडटाउन की व्यस्त सड़क, लोग अपने-अपने काम में। और फिर अचानक… गोलियों की आवाज़। eyewitnesses बताते हैं कि शेन ने बिना किसी वजह, बिना किसी target के गोलियां चलाईं। तीन मासूम घायल। पुलिस को जब firearm मिला तो सवाल और गहरा गया – कैसे मिला इतनी आसानी से? और सबसे हैरान करने वाली बात – पिछले साल ही तो mental health clinic में था वो, लेकिन follow-up? नहीं। सिस्टम की यही तो सबसे बड़ी फेल्योर है न?
समाज की प्रतिक्रिया: गुस्सा? दुख? या फिर वही पुरानी बहस?
घायलों के परिवार का दर्द समझा जा सकता है। लेकिन क्या हम सिर्फ दुख जताकर छोड़ देंगे? विशेषज्ञ कह रहे हैं – ये mental health services की कमी का एक और उदाहरण है। पुलिस gun control की बात कर रही है। पर सच तो ये है कि ये दोनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ईमानदारी से कहूं तो, हर बार ऐसी घटना के बाद हम बहस तो करते हैं, लेकिन फिर भूल जाते हैं। कब तक?
आगे क्या? क्या कुछ बदलेगा?
शेन के खिलाफ केस तो चलेगा, लेकिन ये legal system के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि मानसिक बीमारी और अपराध के बीच की लाइन बहुत पतली होती है। न्यूयॉर्क प्रशासन नए प्रस्तावों पर विचार कर रहा है – mental health awareness बढ़ाने के, gun control सख्त करने के। लेकिन क्या ये काफी है? सच तो ये है कि जब तक हम मानसिक स्वास्थ्य को emergency की तरह नहीं लेंगे, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं।
ये घटना हमें याद दिलाती है कि gun violence और mental health के बीच का रिश्ता कितना जटिल है। जैसे-जैसे जानकारी आएगी, हम आपको बताते रहेंगे। पर एक सवाल मन में रह जाता है – क्या हम सच में कुछ सीखते हैं इन घटनाओं से? या फिर अगली बार तक भूल जाएंगे?
Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com