अनाथ पारसी बच्चे से बंबई के बादशाह तक: जमशेदजी जीजाभाई की कहानी जो दिल छू लेती है
सोचिए, 19वीं सदी का भारत… जब कोई अनाथ बच्चा न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ा होता है बल्कि पूरे शहर की किस्मत बदल देता है। जमशेदजी जीजाभाई की कहानी सिर्फ एक business success story नहीं है, बल्कि वो सबक है जो हमें सिखाता है कि असली दौलत क्या होती है। आज भी मुंबई में उनके बनवाए JJ Hospital, art school और orphanage उनकी याद दिलाते हैं – पर सवाल यह है कि क्या हम उनके सबक सीख पा रहे हैं?
शुरुआत: जब जिंदगी ने दिया था झटका
1783… एक गरीब पारसी परिवार में जन्म। माता-पिता का 12 साल की उम्र में साया उठ जाना। फिर अनाथालय का सफर। लेकिन है ना अजीब बात? कुछ लोग मुसीबतों को मौका बना लेते हैं। जमशेदजी ने अनाथालय में ही वो हुनर सीख लिया जो आगे चलकर उनका हथियार बना – जिद और जुनून। 1799 में मुंबई आकर चाचा की छोटी सी दुकान में काम शुरू किया। पर क्या कोई सोच सकता था कि यहीं से शुरू होगी एक empire की कहानी?
व्यापार: जब मौका मिला तो छीन लिया पूरा खेल
पहले opium, फिर cotton… देखा जाए तो उस जमाने में ये risky business थे। लेकिन जमशेदजी ने तो मानो खेल ही बदल दिया! उनकी सबसे बड़ी ताकत थी – ईमानदारी और समझदारी। China से Britain तक trade relations बनाने वाले शायद वो पहले भारतीय businessmen में से थे। और फिर? फिर तो बंबई के सबसे अमीर लोगों में नाम आने लगा। पर यहाँ दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने पैसे को सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि…
दान: जब दौलत बनी समाज की मदद
1843… JJ Hospital की स्थापना। आज भी मुंबई का ये hospital गरीबों का सहारा है। Art school, orphanage – ये सब बनवाकर उन्होंने साबित कर दिया कि असली अमीर वो होता है जो दूसरों की जिंदगी बदल दे। उनका मानना था – “पैसा तभी काम आता है जब वो दूसरों के आँसू पोंछे।” सच कहूँ तो आज के business tycoons को उनसे सीखने की ज़रूरत है।
मान्यता: भारत का पहला Baronet
1857 में British सरकार ने उन्हें ‘Baronet’ का खिताब दिया। ये सिर्फ उनकी personal achievement नहीं थी, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात थी। British Raj में उन्होंने भारतीयों और अंग्रेजों के बीच सेतु का काम किया। पर सच तो ये है कि उनकी असली पहचान थी – जनता का भरोसा।
विरासत: आज भी जिंदा हैं जमशेदजी
JJ School of Art, JJ Hospital… ये सिर्फ buildings नहीं हैं, बल्कि जिंदा यादगार हैं। Modern India को उनसे सीखना चाहिए कि success और service एक साथ चल सकते हैं। Integrity, hard work और philanthropy – ये सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीने का तरीका था उनका।
अंतिम बात: क्या हम सीख पा रहे हैं?
एक अनाथ बच्चा जिसने इतिहास रच दिया… सचमुच प्रेरणादायक। पर सवाल ये है कि क्या हम सिर्फ प्रेरित होकर रह जाते हैं या कुछ करते भी हैं? Obstacles को opportunities में बदलने की ये कला हमें सीखनी चाहिए।
आपकी बात
बताइए न, जमशेदजी की कहानी का कौन सा हिस्सा आपको सबसे ज़्यादा छू गया? क्या आज के दौर में उनके सिद्धांत practical हैं? Comments में लिखिए – और हाँ, अगर आपको ऐसी ही किसी और forgotten hero की कहानी जाननी है तो बताइएगा ज़रूर। आखिरकार, ये कहानियाँ ही तो हमें बेहतर इंसान बनाती हैं। है ना?
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1. ये कहानी किसकी है और क्यों खास है?
सुनिए, ये कहानी तो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन असलियत में हुई थी। एक अनाथ पारसी बच्चा, जिसके पास कुछ नहीं था… और फिर? वही बच्चा बंबई (हां, तब मुंबई को बंबई ही कहते थे) के बड़े सेठों में गिना जाने लगा। है न कमाल की बात? मगर यहां सिर्फ रैग्स टू रिचेज वाली बात नहीं है – असली मसला है हौसले और इमानदारी की जीत का।
2. भईया, इन्होंने आखिर कौनसा धंधा शुरू किया था?
देखिए न, उस ज़माने में textile industry तो जैसे गोल्डमाइन थी। इन्होंने भी यही चुना, लेकिन सीधे बड़े पैमाने पर नहीं। छोटा सा स्टार्ट किया, quality पर ध्यान दिया… और सबसे बड़ी बात? कभी ग्राहकों के साथ धोखा नहीं किया। सच कहूं तो आज के दौर में ये बात थोड़ी अजीब लगती है न? पर तब यही तो असली मंत्र था सफलता का!
3. इस कहानी से हम क्या सीख सकते हैं?
अरे भाई, सीख तो ढेर सारी हैं! मसलन:
– जब लाइफ आपको नीचे गिराए, तो बस धूल झाड़कर फिर से खड़े हो जाइए
– ईमानदारी से कमाए दस रुपये, बेईमानी के सौ से बेहतर
– मौके खुद नहीं आते… उन्हें चुनना पड़ता है
पर सबसे बड़ी सीख? सफलता रातोंरात नहीं मिलती। धीरे-धीरे, कदम दर कदम…
4. क्या इनका नाम और कंपनी के बारे में पता है?
यहां तो specific details नहीं दी गईं, लेकिन एक दिलचस्प बात – 19वीं-20वीं सदी में मुंबई के ज्यादातर बड़े textile और shipping के धंधे पारसी समुदाय के हाथ में थे। टाटा, गोदरेज जैसे नाम तो आप जानते ही होंगे। शायद ये कहानी भी उन्हीं में से किसी की हो! क्या पता?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com