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“ओवैसी की पार्टी भारत के लिए खतरा? SC में वकील विष्णु शंकर ने दी चौंकाने वाली चेतावनी!”

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ओवैसी की पार्टी: सच में खतरा या सिर्फ राजनीति का खेल? SC में हंगामेदार सुनवाई!

आज सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा केस चला जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया। वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर ने तो जैसे बम फोड़ दिया – उन्होंने ओवैसी की पार्टी AIMIM को सीधे “भारत के लिए खतरा” बता डाला! मान्यता रद्द करने की मांग की, लेकिन यहाँ तो कोर्ट ने साफ मना कर दिया। पर सच कहूँ तो, अब यह केस कोर्ट से निकलकर टीवी डिबेट्स और सोशल मीडिया की आग में भुनने लगा है।

AIMIM का सफर: क्या है असली कहानी?

देखिए, AIMIM कोई नई पार्टी तो है नहीं। 1927 से चल रही है यह पार्टी, मुख्यतः हैदराबाद और तेलंगाना में जड़ें जमाए हुए। ओवैसी साहब तो जैसे इसके चेहरे बन चुके हैं – उनके हर बयान पर मीडिया झपट्टा मारता है। पर सवाल यह है कि क्या यह सच में सांप्रदायिक एजेंडा चलाती है? कुछ लोग तो यही मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके समर्थकों की भी कमी नहीं। बातचीत होती रहती है, बहसें गर्म होती रहती हैं… पर फैसला कौन करेगा?

कोर्ट रूम का ड्रामा: क्या हुआ असल में?

विष्णु शंकर जी ने कोर्ट में क्या रखा? उनकी दलील थी कि AIMIM का संविधान और नीतियाँ देश की एकता के लिए ठीक नहीं। मान्यता रद्द करो! लेकिन यहाँ कोर्ट ने बड़ा दिलचस्प मोड़ लिया – “भई यह तो Election Commission का काम है, हमारा नहीं।” सीधा पास! पर हैरानी की बात यह कि इस एक फैसले ने पूरे देश में बहस छेड़ दी। ट्विटर पर तो #AIMIM ट्रेंड करने लगा। क्या आपने भी कोई ट्वीट देखा?

रिएक्शन का तूफान: कौन क्या बोला?

AIMIM वालों ने तो इसे “शुद्ध राजनीति” बता डाला। विपक्ष? अरे वह तो हमेशा की तरह बँटा हुआ है! कुछ नेताओं ने शंकर जी का साथ दिया, तो कुछ चिल्लाने लगे “लोकतंत्र पर हमला!” सोशल मीडिया पर? वहाँ तो जैसे मच्छरों का झुंड भिनभिना रहा है – हर कोई अपनी राय थोपने में लगा हुआ। किसी ने #BanAIMIM चलाया तो कोई #DemocracyInDanger लिख रहा है। मजे की बात यह कि दोनों तरफ के लोग खुद को सही साबित करने में जुटे हैं!

अब आगे क्या? 3 संभावित रास्ते

अब यह मामला Election Commission के पास जाएगा – यह तो तय है। पर तीन चीजें हो सकती हैं:
1. कुछ नहीं होगा, सब ठंडा पड़ जाएगा (जैसा अक्सर होता है)
2. AIMIM पर कार्रवाई होगी, जिससे मुस्लिम वोटिंग पैटर्न हिल सकता है
3. पार्टी फिर कोर्ट चली जाएगी, और यह सिलसिला चलता रहेगा

असल में? कोई नहीं जानता। पर इतना तो तय है कि अगले कुछ दिनों में टीवी डिबेट्स का रेटिंग ग्राफ तो जरूर ऊपर जाएगा!

मेरी निजी राय: सवाल बड़े, जवाब छोटे

ईमानदारी से कहूँ तो, यह सिर्फ AIMIM का मामला नहीं रहा। यह तो उस बड़े सवाल की शुरुआत है जो हमें अक्सर परेशान करता है – कितनी आजादी हो राजनीतिक दलों को? कहाँ खत्म होती है अभिव्यक्ति और कहाँ शुरू होता है देशद्रोह? मैं नहीं जानता AIMIM सही है या गलत, पर इतना जरूर जानता हूँ कि यह बहस अभी लंबी चलेगी। और हाँ, अगले चुनावों में इसका असर जरूर दिखेगा। आपको क्या लगता है?

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1. AIMIM क्या है और क्यों है यह इतना चर्चा में?

देखिए, Asaduddin Owaisi की यह पार्टी, जिसे हम AIMIM (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के नाम से जानते हैं, अक्सर सुर्खियों में रहती है। सच कहूं तो, यह पार्टी मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को उठाती है, लेकिन यहीं से शुरू होता है विवाद। क्यों? क्योंकि कई लोगों को लगता है कि यह ‘divide and rule’ वाली राजनीति कर रही है। Supreme Court के वकील विष्णु शंकर तो इसे देश के लिए खतरा तक बता चुके हैं। पर सवाल यह है कि क्या सच में ऐसा है?

2. Supreme Court में क्या हुआ था? विष्णु शंकर ने क्या कहा?

असल में बात यह हुई कि विष्णु शंकर ने Supreme Court में एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने साफ-साफ कहा कि Owaisi की पार्टी का एजेंडा देश की एकता के लिए अच्छा नहीं है। उनकी चिंता यह थी कि यह secular fabric को कमजोर कर सकता है। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ दिया। लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ एक वकील की राय को इतना वजन देना चाहिए?

3. सच क्या है? क्या AIMIM वाकई में खतरनाक है?

ईमानदारी से कहूं तो, यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आपके नजरिए पर निर्भर करता है। एक तरफ तो वे लोग हैं जो मानते हैं कि AIMIM सिर्फ और सिर्फ communal politics करती है। दूसरी तरफ, पार्टी के supporters का कहना है कि वह तो बस अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई लड़ रही है। अब तक न तो सरकार और न ही judiciary ने इस पर कोई ठोस फैसला दिया है। तो फिर किसकी बात मानें? यही तो है असली मुश्किल।

4. AIMIM की राजनीति में क्या भूमिका है? कितनी ताकतवर है यह पार्टी?

अगर numbers की बात करें तो AIMIM की मुख्य पकड़ Telangana और Maharashtra तक ही सीमित है। National level पर उसका कोई खास दबदबा नहीं है, यह सच है। लेकिन! यहां एक बड़ा ‘लेकिन’ है। इसकी हर एक गतिविधि, हर भाषण, हर rally मीडिया में तूफान ला देती है। क्या यही है इसकी असली ताकत? शायद। क्योंकि राजनीति में कभी-कभी सिर्फ सीटें ही नहीं, बल्कि headlines भी मायने रखते हैं।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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