पाकिस्तान UNSC का चेयरमैन बना? भारत ने क्यों दिया ऐसा जवाब जिसने सबको चौंका दिया!
अरे भाई, सुनो तो सही! UNSC की कमान अब पाकिस्तान के हाथ में है। सुनकर अजीब लगता है न? वो देश जिसे हम और दुनिया का बड़ा हिस्सा आतंकवाद का अड्डा मानते हैं, वो अब अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की बैठकों की अगुवाई करेगा। ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने चोर को ही थानेदार बना दिया हो! और तो और, पाकिस्तान अब इस पद का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दा उठाने के लिए करना चाहता है। भारत ने तो जैसे तुरंत पलटवार किया है – सीधे UNSC में पाकिस्तान के आतंकी कनेक्शन्स का पूरा चिट्ठा खोल दिया।
पाकिस्तान का UNSC सफर: आठवीं बार, लेकिन इस बार क्यों है ज्यादा मुश्किल?
देखिए, पाकिस्तान को ये मौका पहली बार नहीं मिला। अस्थायी सदस्य के तौर पर ये उनका आठवां टर्म है। लेकिन इस बार का गेम पूरी तरह अलग है। क्यों? क्योंकि पिछले कुछ सालों से भारत-पाक तनाव आसमान छू रहा है। भारत तो खुलकर पाकिस्तान को “आतंकिस्तान” तक कह चुका है। और दूसरी तरफ, पाकिस्तान हर मौके पर कश्मीर का राग अलापता रहता है। मजे की बात ये कि भारत हर बार इसे अपना अंदरूनी मामला बताकर ठुकरा देता है। पर इस बार… इस बार मैच और भी दिलचस्प हो गया है!
भारत का जवाब: सबूतों की बौछार, लेकिन क्या दुनिया सुन रही है?
अब यहां मजा आ गया! जैसे ही पाकिस्तान ने UNSC की कुर्सी संभाली, भारत ने अपना दस्तावेजी हमला शुरू कर दिया। Lashkar-e-Taiba, Jaish-e-Mohammed – इन आतंकी गुटों से पाकिस्तान के रिश्तों के ठोस सबूत UNSC में पेश किए। पर दुनिया की प्रतिक्रिया? हल्की-फुल्की। अमेरिका और यूरोप ने तटस्थ रुख अपनाया, जबकि चीन तो जैसे पाकिस्तान का पूरा बैकअप लेकर खड़ा हो गया। सच कहूं तो, ये पूरा मामला अब सिर्फ भारत-पाक नहीं, बल्कि बड़ी शक्तियों के बीच का खेल बनता जा रहा है।
दोनों तरफ के तर्क: कौन सही, कौन गलत?
भारत का कहना है – “जिस देश ने आतंकवाद को पाला-पोसा, उसे UNSC जैसे संवेदनशील मंच की कमान मिलना खतरनाक है।” वहीं पाकिस्तान का दावा – “हम शांति के लिए काम करेंगे और कश्मीर मुद्दा उठाना हमारा अधिकार है।” सच तो ये है कि दोनों अपनी-अपनी राग अलाप रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि ये तनाव UNSC में और बढ़ सकता है। एक तरफ तो… पर दूसरी तरफ…
आगे क्या? 5 संभावनाएं जो आपको जाननी चाहिए
अब सवाल ये उठता है कि आगे क्या होगा? पाकिस्तान कश्मीर मुद्दा उठाएगा जरूर, पर क्या वो कुछ हासिल कर पाएगा? मुश्किल लगता है। भारत का राजनयिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग उसे रोक सकता है। पर एक बात तय है – भारत पाकिस्तान के आतंकी रिश्तों को लगातार उजागर करता रहेगा। और हां, द्विपक्षीय वार्ता? उसकी तो लगभग बलि ही चढ़ चुकी है। ये पूरा मामला तो अब एक लंबी राजनयिक जंग का रूप ले चुका है। देखते हैं, अगला पासा कौन फेंकता है!
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पाकिस्तान UNSC का अध्यक्ष बना – क्या यह सच में बड़ी खबर है या सिर्फ एक फॉर्मैलिटी?
अरे भाई, आजकल तो हर दूसरे दिन कोई न कोई बड़ी खबर सुनने को मिलती है। लेकिन ये पाकिस्तान का UNSC अध्यक्ष बनना… असल में बात क्या है? चलो समझते हैं, पर पहले एक चाय का घूंट तो ले लो!
1. अच्छा, ये पाकिस्तान UNSC का बॉस कैसे बन गया?
देखो, ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। असल में UNSC में हर महीने नया अध्यक्ष चुना जाता है – बिल्कुल हमारे सोसाइटी के सेक्रेटरी पद की तरह जहां हर साल बारी-बारी से कोई न कोई बन जाता है। इस बार पाकिस्तान की बारी आ गई, बस। हालांकि… क्या वो इस पद का सही इस्तेमाल कर पाएगा? यह सवाल तो बना ही रहता है।
2. भारत ने तो जमकर पोल खोली – क्या बोला हमारा देश?
अब यहां मजा आता है! भारत ने सीधे-सीधे कह दिया – “भाई, तुम आतंकवादियों को पनाह देते हो और अब चेयरमैन बन गए?” हमारे दूत ने UNSC में कई सबूत पेश किए, recent attacks का जिक्र किया। सच कहूं तो, ये वही पुरानी कहानी है – जैसे चोर को चौकीदार बना दिया जाए!
3. क्या हमें डरना चाहिए पाकिस्तान के चेयरमैन बनने से?
ईमानदारी से? थोड़ा तो चिंता की बात है। जैसे कि अगर आपके दफ्तर में वही शख्स प्रोजेक्ट लीडर बन जाए जिस पर आपको भरोसा नहीं… लेकिन यहां एक silver lining भी है। UNSC में permanent members की ताकत ज्यादा होती है, तो पाकिस्तान ज्यादा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। फिर भी, नजर तो रखनी ही पड़ेगी ना?
4. भारत की भूमिका? हम कहां खड़े हैं इस पूरे मामले में?
अरे, हम तो non-permanent member हैं लेकिन हमारी आवाज कमजोर नहीं है! आतंकवाद के मुद्दे पर तो हमने हमेशा स्पष्ट रुख अपनाया है। जैसे कि पिछले कुछ सालों में देखा होगा – हम सबूतों के साथ आगे आते हैं, सच को expose करते हैं। और यही हमारी ताकत है। UNSC में हमारी उपस्थिति ही एक तरह का संतुलन बनाए रखती है, है ना?
तो ये थी पूरी कहानी संक्षेप में। क्या सोचते हैं आप? क्या पाकिस्तान इस मौके का सही इस्तेमाल कर पाएगा, या फिर वही पुरानी रिकॉर्ड बजेगी? कमेंट में बताइएगा जरूर!
Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com
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