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पार्क एवेन्यू हत्याकांड में मौत से बची सफाई कर्मचारी ने शूटर शेन तामुरा से की थी जान बख्शने की गुहार

पार्क एवेन्यू हत्याकांड: जब एक सफाई कर्मचारी की आँखों ने शूटर को रोक दिया

12 जून की वो सुबह… पार्क एवेन्यू वाली घटना ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। पर इस खौफनाक मामले में एक ऐसा पल भी आया जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है – सफाई कर्मचारी सेबिजे नेलोविक और शूटर शेन तामुरा के बीच वो अजीबोगरीब मुठभेड़। सोचिए, जब नेलोविक ने तामुरा से जान की भीख मांगी, तो किसी चमत्कार की तरह उसने उन्हें छोड़ दिया! ये किस्सा पूरी घटना में एक ऐसा ट्विस्ट है जिसे समझ पाना मुश्किल है।

वो दिन जब पार्क एवेन्यू खून से लाल हो गया

सब कुछ शुरू हुआ उस भीषण दोपहर को, जब शेन तामुरा ने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। eyewitnesses के मुताबिक, ये कोई प्लान्ड अटैक नहीं, बल्कि एक दीवानगी भरा कत्लेआम था। 8 मासूमों की जान चली गई, कई घायल हुए… और हाँ, पुलिस ने तामुरा को पकड़ तो लिया, पर सवाल ये है कि आखिर उसके दिमाग में क्या चल रहा था? initial reports कहती हैं वो मानसिक तौर पर बैलेंस नहीं था, मगर फिर भी – इस जगह को ही क्यों चुना? क्या कोई पुरानी दुश्मनी थी? या बस कोई random वारदात?

जब एक माँ की आँसुओं ने कातिल का दिल पिघला दिया?

पूरे कांड में सबसे रहस्यमयी पल तो वो था जब सेबिजे नेलोविक और तामुरा आमने-सामने हुए। सोचिए न, वो अपना काम कर रही थीं, अचानक गोलियों की आवाज… और फिर वो सीधे शूटर के सामने! नेलोविक ने बाद में बताया, “मैंने उसकी आँखों में देखा और बस रोते हुए कहा – मेरे बच्चे हैं, प्लीज…” और हैरानी की बात – तामुरा ने उन्हें छोड़ दिया! क्या सच में किसी पागल के अंदर भी इंसानियत बची होती है? पुलिस वाले तो इस पर खुद स्क्रैचिंग देयर हेड्स हैं।

घटना के बाद: सवालों के घेरे में

media से बात करते हुए नेलोविक की आवाज़ अब भी कांपती है – “मैं रोज़ उस पल को जीती हूँ… क्यों मैं बच गई?” पुलिस वालों का कहना है ये केस textbook definition से बिल्कुल अलग है। वहीं पीड़ित परिवारों का दर्द… उनके लिए तो ये पूरी घटना एक बुरा सपना है। पर एक राहत की बात? कम से कम नेलोविक तो बच गईं। छोटी सी खुशी, मगर खुशी तो है।

आगे क्या? न्याय की उम्मीद

अब सबकी निगाहें कोर्ट की तरफ हैं। तामुरा पर हत्या से लेकर आतंकवाद तक के charges लगे हैं। security experts की राय? पब्लिक प्लेस पर सुरक्षा और टाइट होनी चाहिए। पर सबसे बड़ा सवाल तो वही – क्या हम कभी जान पाएंगे कि तामुरा ने नेलोविक को क्यों छोड़ दिया? शायद नहीं। फिलहाल तो ये कहानी हमें याद दिलाती है कि इंसानी दिमाग कितना पेचीदा हो सकता है। और हाँ, कभी-कभी चमत्कार सचमुच होते हैं।

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Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com

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