संसद सत्र में फिर हंगामा: मोदी का उमर अब्दुल्ला को ‘संवैधानिक मूल्यों’ वाला तारीफी बयान, विपक्ष का SIR मुद्दे पर अड़ंगा
अरे भई, आज तो संसद में फिर वही पुराना नज़ारा – नेता चिल्ला रहे हैं, स्पीकर परेशान हैं, और कामकाज ठप्प! असल में बिहार के उस Special Investment Region (SIR) मसले को लेकर विपक्ष इतना गरमाया हुआ है कि बहस के बिना आगे बढ़ने को तैयार ही नहीं। और बीच में ही PM मोदी ने तो बम फोड़ दिया – उमर अब्दुल्ला की तारीफ करके! जी हाँ, वही उमर अब्दुल्ला जिनके बारे में BJP कभी कुछ और ही कहती थी। राजनीति में तो रोज़ नए मोड़ आते हैं, लेकिन ये दोनों घटनाएं आज के दिन की सबसे ज़्यादा चर्चित बन गईं।
पूरा माजरा क्या है?
देखिए न, बिहार वाला SIR प्रोजेक्ट तो पिछले हफ़्ते से ही सुर्खियों में है। विपक्ष का कहना है कि ये तो किसानों की ज़मीन छीनने और पर्यावरण बर्बाद करने की साज़िश है। सच क्या है? वो तो बहस में ही पता चलेगा। पर सरकार और विपक्ष की जंग में संसद तो बंद हुई ही पड़ी है।
और फिर…मोदी जी का वो बयान! उन्होंने उमर अब्दुल्ला को ‘संवैधानिक मूल्यों में आस्था रखने वाला नेता’ बताया। अब ये तो वाकई हैरान करने वाली बात है, क्योंकि कश्मीर मुद्दे पर तो इन दोनों के विचार हमेशा से अलग रहे हैं। क्या ये कोई नया राजनीतिक संकेत है? या फिर सिर्फ़ दिखावा? अभी तो सब इसी पर बहस कर रहे हैं।
संसद में क्या हुआ?
आज का नज़ारा कुछ यूँ था – विपक्षी सांसद खड़े होकर “हम बहस चाहते हैं!” चिल्ला रहे हैं, स्पीकर उन्हें शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, और कामकाज बार-बार रुक रहा है। सच कहूँ तो ये तमाशा अब थोड़ा बोरिंग होने लगा है। हर सत्र में यही होता है – विपक्ष विरोध करता है, सरकार टालती है, और देश का काम अटक जाता है।
लेकिन मोदी-अब्दुल्ला वाली बात ने तो पूरे गेम को ही बदल दिया। National Conference और PDP जैसे दल इसे बड़ी बात बता रहे हैं, जबकि BJP वाले कह रहे हैं – “अरे यार, इतना भी सोचने की क्या बात है? बस एक सामान्य प्रशंसा थी।” पर सच तो ये है कि राजनीति में कोई भी बयान ‘सामान्य’ नहीं होता!
किसने क्या कहा?
राहुल गांधी तो मौके की नज़ाकत समझते ही हैं – उन्होंने सीधा सवाल दागा: “SIR पर बहस से सरकार क्यों डर रही है?” तेजस्वी यादव ने तो बिहार के किसानों के नाम पर पूरा भाषण ही दे डाला।
वहीं अमित शाह ने विपक्ष को जमकर लताड़ा: “देश विकास चाहता है, और ये लोग संसद रोकने पर तुले हैं।” और उमर अब्दुल्ला? उन्होंने मोदी की तारीफ को तो सराहा, लेकिन साथ ही कहा कि “कश्मीर में अब काम की बात होनी चाहिए।” यानी मीठी गोली के साथ थोड़ी कड़वाहट भी!
अब आगे क्या?
अभी तो स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। पर बिहार में विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं – वहाँ के किसान बिल्कुल मूड में नहीं हैं।
और सबसे बड़ा सवाल – क्या मोदी का ये बयान सच में कश्मीर नीति में बदलाव का संकेत है? या फिर ये सिर्फ़ एक राजनीतिक चाल है? अभी तो ये पहेली बनी हुई है। एक बात तय है – अगले कुछ दिनों में राजनीति का तापमान और बढ़ने वाला है।
अंत में इतना ही कहूँगा – भारतीय राजनीति कभी उबाऊ नहीं होती! जब लगे कि सब शांत हो गया है, तभी कोई नया ट्विस्ट आ जाता है। देखते हैं, ये नया ड्रामा किस ओर मुड़ता है।
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संसद सत्र में हंगामा और मोदी जी का उमर अब्दुल्ला को सराहना – जानिए पूरा मामला
1. आखिर संसद में इतना हंगामा क्यों हुआ?
देखिए, ये तो हर बार की कहानी है न! Opposition और ruling party के बीच किसी बात को लेकर तू-तू मैं-मैं हो गई। असल में, जब कोई sensitive issue आता है तो ये हंगामे वाली सीन तो बननी ही है। आपको याद होगा, पिछले सत्रों में भी ऐसा ही कुछ हुआ था।
2. मोदी जी ने अचानक उमर अब्दुल्ला की तारीफ क्यों कर दी?
अरे भई, ये तो बड़ी interesting बात हुई न! मोदी जी ने संसद में एकदम अचानक उमर साहब के कुछ अच्छे कामों की बात की। शायद यह message था कि राजनीति में सिर्फ विरोध ही नहीं, सहयोग भी जरूरी है। पर सच कहूं तो, इससे political माहौल पर क्या असर पड़ेगा, ये तो वक्त ही बताएगा।
3. क्या उमर अब्दुल्ला ने भी मोदी जी को जवाब दिया?
हां जी, बिल्कुल दिया! उमर साहब ने भी इस भावना की सराहना की। और सही कहा न – राजनीति में तो ऐसे ही सकारात्मक संवाद होने चाहिए। लेकिन क्या ये सिर्फ एक formalता थी या असली भावना? ये तो वही जानें!
4. इस पूरे प्रकरण का असर क्या होगा?
अच्छा सवाल! एक तरफ तो लगता है कि relations थोड़े improve हो सकते हैं। पर दूसरी तरफ… ये सब surface level की बातें तो नहीं? असल में, दिल्ली तो दिल्ली ही है – आज दोस्ती, कल दुश्मनी! पर hope तो करनी ही चाहिए कि future में healthy debates हों।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com