पायलट ने डिफेक्ट लॉग किया, IT ने कहा ALL OK… और फिर? 36 सेकेंड में ही क्रैश!
सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं – दिल्ली से लंदन जा रही फ्लाइट टेकऑफ के सिर्फ 36 सेकंड बाद ही धराशायी हो गई। असल में बात तो ये है कि पायलट ने पहले ही तकनीकी खराबी (Defect) की शिकायत कर दी थी। लेकिन एयरलाइन के इंजीनियरिंग वालों ने बस एक झटके में “ALL OK” लिखकर क्लियरेंस दे दिया। सच कहूं तो, ये सुनकर मुझे वो पुरानी कहावत याद आ गई – “जल्दबाजी में शैतान का काम!”
क्या हुआ था असल में?
देखिए, ये विमान दिल्ली से अहमदाबाद तो सही सलामत उड़ चुका था। पर पायलट ने वहीं कुछ गड़बड़ महसूस की थी। अब यहां दो सीन हो सकते हैं – या तो मेंटेनेंस टीम ने ठीक से चेक ही नहीं किया, या फिर उन्हें लगा कि “चलता है यार!”। पर नतीजा? लंदन के लिए उड़ान भरते ही विमान का सत्यानाश। ईमानदारी से कहूं तो, ये कोई छोटी-मोटी लापरवाही नहीं, बल्कि जानलेवा लापरवाही थी।
अब तक क्या पता चला है? (Key Updates)
अभी CVR (कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर) और FDR (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) की जांच चल रही है। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि शायद इंजन या कंट्रोल सिस्टम में कोई दिक्कत रही होगी। पर सवाल ये उठता है – अगर पायलट ने पहले ही बता दिया था, तो इसे नजरअंदाज क्यों किया गया? विमानन सुरक्षा वालों ने तो मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है।
किसने क्या कहा? (Reactions)
इस मामले में सबके अपने-अपने राग अलापने लगे हैं। पायलट एसोसिएशन वाले तो सीधे आग बबूला हैं – “जब पायलट कुछ बोल रहा है, तो उसे हल्के में लेना किसने सिखाया?” वहीं एयरलाइन वाले अपना पल्ला झाड़ रहे हैं – “हमने तो सारे प्रोटोकॉल फॉलो किए थे!” सबसे ज्यादा दर्द तो यात्रियों के परिजनों का है जो पूछ रहे हैं – “हमारे साथ ये खिलवाड़ क्यों?”
आगे क्या? (What Next?)
अब तो पूरी कहानी जांच रिपोर्ट पर ही निर्भर है। पर एक बात तो तय है – एयरलाइन की मेंटेनेंस प्रक्रिया पर सवाल तो उठेंगे ही। और शायद अब डिफेक्ट रिपोर्टिंग को लेकर नए सख्त नियम बनें। वैसे भी, हवाई सफर को लेकर लोगों का भरोसा पहले ही कमजोर हो चुका है।
मेरी निजी राय: ये कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है। या तो यहां किसी की नौकरी जाएगी, या फिर किसी की लाइसेंस। पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या हम इंसानों ने technology पर इतना भरोसा कर लिया है कि common sense भूल गए हैं? आपको क्या लगता है?
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ये घटना तो वाकई सोचने पर मजबूर कर देती है – क्या हम तकनीक पर इतना भरोसा कर लें कि इंसानी फैसलों को नज़रअंदाज़ कर दें? देखिए, पायलट ने चेतावनी दी थी, IT Team ने “ALL OK” बोल दिया, और नतीजा? एक ऐसा हादसा जो शायद टाला जा सकता था।
असल में बात ये है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल्स सिर्फ कागजों पर नहीं, दिमाग में भी चलने चाहिए। आपको पता है न, जैसे कार का ABS सिस्टम होता है, लेकिन ड्राइवर की सतर्कता भी तो ज़रूरी है? ठीक वैसे ही।
और हां, सिर्फ ज़िम्मेदारी लेने भर से काम नहीं चलेगा। सिस्टम में सुधार की ज़रूरत है – वो भी तुरंत। वरना… अरे भई, अगली बार किसकी बारी होगी?
पूरी जानकारी के लिए बने रहिए हमारे साथ। सच कहूं तो, ये मामला सिर्फ एक खबर नहीं, सबक है!
पायलट ने डिफेक्ट लॉग किया, IT ने कहा ALL OK, पर टेकऑफ के 36 सेकेंड बाद ही क्रैश! – कुछ जवाब जो आप जानना चाहते हैं
1. इस हादसे में पायलट ने कौन सा डिफेक्ट लॉग किया था?
देखिए, मामला कुछ ऐसा था – पायलट ने टेकऑफ़ से पहले ही aircraft के कुछ गड़बड़झाले को नोटिस कर लिया था। शायद engine में कोई दिक्कत थी, या फिर flight control system ठीक से काम नहीं कर रहा था। पर यहाँ IT वालों ने बड़ी हल्की ली! “ALL OK” बोलकर पल्ला झाड़ लिया। और नतीजा? 36 सेकेंड का उड़ान, फिर धड़ाम!
2. क्या इस घटना में कोई जानमाल का नुकसान हुआ?
अफसोस की बात है, लेकिन हाँ। कुछ लोगों की जान चली गई, कईयों को चोटें आईं। ऑफिशियल आँकड़े अभी पूरी तरह सामने नहीं आए, पर ये कोई छोटी-मोटी घटना तो थी नहीं। सच कहूँ तो, ऐसे हादसे दिल दहला देते हैं।
3. ऐसे cases में IT team की जिम्मेदारी क्या होती है?
अरे भई, IT team का काम ही यही होता है न! पायलट जो भी शिकायत करे, उसे गंभीरता से लेना। हर technical issue को अच्छी तरह चेक करना। अगर ठीक न हो तो aircraft को ground कर देना। लेकिन यहाँ? लापरवाही की हद हो गई। एक झटके में “ALL OK” का स्टैम्प लगा दिया। और कीमत चुकानी पड़ी लोगों ने।
4. इस तरह के हादसों को future में कैसे रोका जा सकता है?
सुनिए, ये कोई रॉकेट साइंस तो है नहीं। बस थोड़ी सी सावधानी और जिम्मेदारी चाहिए:
- पायलट की हर बात को seriously लेना – वो आसमान में उड़ान भरने वाला है भाई!
- Regular maintenance – गाड़ी का तो हम सर्विस करवाते हैं, ये aircraft है यार!
- IT team को proper training – सिर्फ computer चलाना ही काफी नहीं होता
और हाँ, airlines को safety पर पैसा खर्च करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। जान बचाने से बड़ा कोई investment नहीं होता।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com