PM जिन्हें किराया नहीं देने पर घर से निकाला गया! सुनकर हैरान रह जाएंगे आप
सोचिए, देश के पूर्व प्रधानमंत्री को बुढ़ापे में घर से बेदखल होना पड़े? ये कोई कल्पना नहीं, बल्कि गुलजारी लाल नंदा जी के साथ हुआ सच्चा वाक़िया है। असल में बात ये है कि किराया न चुकाने पर उन्हें अपने ही घर से निकाल दिया गया। और सबसे हैरानी की बात? PMO से मदद मांगने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई! ये सिर्फ एक नेता की कहानी नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है। क्या हम वाकई अपने नेताओं को इतनी आसानी से भूल जाते हैं?
गांधी जी के सच्चे अनुयायी की दुखद कहानी
गुलजारी लाल नंदा जी… नाम सुनते ही याद आता है सादगी और ईमानदारी का एक जीता-जागता उदाहरण। 1964 और 1966 में दो बार कार्यवाहक PM रहे। लेकिन ज़िन्दगी का कैसा विडम्बना भरा मोड़! जिस शख्स ने देश के लिए सब कुछ किया, उसे आखिरी वक्त में किराए के पैसे न होने की वजह से घर से निकाल दिया गया। सच कहूं तो ये सुनकर दिल दुख जाता है। क्या यही सम्मान है हमारे नेताओं के लिए?
PMO का जवाब: ‘नो रिप्लाई’
मुश्किल वक्त में नंदा जी ने PMO से मदद मांगी। लेकिन हैरानी की बात ये कि उनकी गुहार अनसुनी रह गई। सोचिए, अगर एक पूर्व PM के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम आदमी की क्या हालत होगी? हालांकि बाद में कुछ संगठनों ने मदद की, पर सवाल तो बनता ही है न? असल में, ये केस सिर्फ पैसे की बात नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की मानसिकता को दिखाता है।
लोगों का गुस्सा और राजनीतिक हलचल
ये मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तूफान आ गया। लोग सवाल कर रहे थे – “क्या यही है हमारे नेताओं की कीमत?” राजनीतिक दलों ने भी इस पर चुप्पी तोड़ी। विश्लेषकों का कहना है कि ये मामला सिर्फ नंदा जी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे political class के लिए चेतावनी है। एक तरफ तो नेता लाखों के घर बनवाते हैं, दूसरी तरफ एक पूर्व PM… सोचने वाली बात है न?
आगे का रास्ता: सुधार की ज़रूरत
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि हमारे system में कितने छेद हैं। Experts का मानना है कि पूर्व PMs और senior leaders के लिए बेहतर pension policies बनाने की ज़रूरत है। पर सवाल ये है कि क्या सिर्फ policies बना देना काफी है? असल में ज़रूरत है मानसिकता बदलने की। नंदा जी का ये case सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि हमारे समाज का आईना है।
अंत में एक सवाल – क्या हम वाकई उन लोगों को भूल जाते हैं जिन्होंने देश के लिए जीवन लगा दिया? गुलजारी लाल नंदा जी की ये कहानी हम सभी के लिए एक सबक होनी चाहिए। वरना… अफसोस, ऐसी और कहानियां सुनने को मिलती रहेंगी।
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1. कौन थे वो PM जिनकी ये दिलचस्प कहानी है?
सुनकर थोड़ा अजीब लगता है न? पर ये सच है! 1980 के दशक की बात है जब हमारे पूर्व PM चंद्रशेखर जी को… हां, आपने सही सुना, प्रधानमंत्री को… किराया न चुकाने पर घर से निकाल दिया गया था। सोचिए, जिस इंसान के पास पूरा PMO हो, उसकी ये हालत!
2. PMO से मदद मांगने पर क्या हुआ? असल कहानी
अब यहां सबसे मजेदार बात ये है कि जब उन्होंने PMO से मदद मांगी तो… कुछ खास नहीं हुआ! है न मजेदार? पर सच्चाई यही है। ये घटना उनकी सादगी की मिसाल बन गई। ईमानदारी से कहूं तो आज के नेताओं के लिए ये सोचने वाली बात है।
3. क्या ये सच में हुआ था या सिर्फ कोई अफवाह?
बिल्कुल सच! मैं भी पहले सोचता था कि शायद ये कोई मिथक होगा। पर नहीं, ये पूरी तरह दर्ज है इतिहास में। चंद्रशेखर जी की ये कहानी उनके सिद्धांतों की जीती-जागती मिसाल है। सच कहूं तो आज के दौर में यकीन करना मुश्किल है, पर सच्चाई यही है।
4. इससे हम क्या सीख सकते हैं? मेरी निजी राय
देखिए, इससे दो बड़ी सीख मिलती हैं। पहली – पद चाहे कितना भी बड़ा हो, इंसानियत उससे ऊपर होती है। दूसरी – और ये ज्यादा अहम है – असली बड़प्पन दिखावे में नहीं, सिद्धांतों में होता है। आज के Instagram वाले दौर में ये बात और भी जरूरी हो जाती है। है न?
एकदम सच्ची बात। क्या आप आज कल्पना कर सकते हैं कि कोई PM ऐसी स्थिति में हो? मुझे तो नहीं लगता…
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com